Author : Ayjaz Wani

Expert Speak Raisina Debates
Published on Dec 05, 2025 Updated 7 Days ago

तुर्किये OTS के माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और यूरोप व एशिया के बीच सेतु बनने का प्रयास कर रहा है, लेकिन उसके व्यापार, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र की अब भी अपनी सीमाएं हैं.

मध्य एशिया में तुर्किये की चर्चा क्यों: OTS और TRIPP क्या कहते हैं?

तुर्किक राज्यों के संगठन (OTS) का 12वां शिखर सम्मेलन 6 और 7 अक्तूबर को अज़रबैजान के गबाला में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य विषय क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा था. OTS का मुख्यालय इस्तांबुल में है और तुर्किये, कज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, किर्गिस्तान के अलावा अज़रबैजान इसके सदस्य देश हैं. हंगरी, तुर्कमेनिस्तान और तुर्किये गणराज्य उत्तरी साइप्रस (जिसे केवल तुर्किये ने मान्यता दी है) को पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है.

  • OTS का 12वां शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर केंद्रित था।
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  • OTS की जड़ें पैन-तुर्कवादी विचार में हैं जो तुर्क लोगों की एकजुटता को बढ़ावा देता है।
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  • अंकारा OTS के ज़रिए मध्य एशिया–काकेशस में अपना भू-रणनीतिक प्रभाव बढ़ा रहा है।

OTS की जड़ें 19वीं और 20वीं शताब्दी की पैन-तुर्कवादी राजनीतिक सोच में छिपी हुई हैं, जिसका मक़सद तुर्क लोगों की साझा जातीय, सांस्कृतिक और भाषायी विरासत के आधार पर उनमें एकजुटता को बढ़ावा देना था. अंकारा अब मध्य एशिया और दक्षिण काकेशस पर अपने भू-रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए OTS का उपयोग कर रहा है, जिस कारण यह क्षेत्र तुर्किये की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है. रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद से, तुर्किये ने सोची-समझी रणनीति के तहत सांस्कृतिक संबंधों का फ़ायदा उठाकर पूरे क्षेत्र में आर्थिक, रक्षा और सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाया है मगर चीन, रूस, ईरान और पश्चिमी देशों के हितों के कारण यहां का भू-राजनीतिक समीकरण उलझ गया है, जिस कारण मध्य एशियाई देश अंकारा के बढ़ते प्रभाव को लेकर सजग हैं.

“तुर्किये का रणनीतिक और आर्थिक लक्ष्य मध्य एशिया में बहुपक्षीय सहयोग व द्विपक्षीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक एकजुटता को बढ़ावा देना है.”

 

तुर्किये की रणनीतिक और आर्थिक महत्वाकांक्षाएं

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, तुर्किये ने OTS के माध्यम से न सिर्फ़ अपने कूटनीतिक प्रयास तेज़ किए, बल्कि रणनीतिक साझेदारियों को भी आगे बढ़ाया और काकेशस व मध्य एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचों से जुड़ी परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किए. तुर्किये का रणनीतिक और आर्थिक लक्ष्य मध्य एशिया में बहुपक्षीय सहयोग व द्विपक्षीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक एकजुटता को बढ़ावा देना है. कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए यहां मध्य गलियारा है, जो अज़रबैजान, जॉर्जिया, तुर्किये सहित मध्य एशियाई देशों से गुज़रते हुए चीन को यूरोपीय संघ से जोड़ता है. इस गलियारे को ट्रांस-कैस्पियन अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग (TITR) भी कहा जाता है. इस सबसे तेज़, सबसे सुरक्षित और सबसे किफायती गलियारे पर काम 2013 में शुरू हुआ था. साल 2017 तक बाकू-त्बिलिसी-कार्स रेलवे को आधुनिक बना दिया गया और उसकी शुरुआत भी कर दी गई, जो जॉर्जिया होकर गुज़रती है और तुर्किये को अज़रबैजान से जोड़ती है. कैस्पियन सागर में बाकू बंदरगाह और अक्ताऊ बंदरगाह के विकास के साथ-साथ ट्रांज-कज़ाकिस्तान रेलवे लाइन के विकास पर भी ध्यान दिया गया, जिससे तुर्किये और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक रिश्ता मज़बूत बन गया है. इससे अंकारा के साथ इस क्षेत्र का आर्थिक रिश्ता बढ़ गया है. तुर्किये ने 2024 में बाकू-त्बिलिसी-कार्स लाइन के आधुनिकीकरण को लेकर भी खूब प्रयास किए, ताकि 2030 तक मध्य गलियारे की क्षमता मौजूदा लगभग 58 करोड़ टन से तीन गुना बढ़ जाए. उसने बाकू बंदरगाह की क्षमता भी बढ़ाई है.

मध्य गलियारा को लेकर तुर्किये की पहल को अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच हाल ही में हुए अमेरिका-समर्थित शांति समझौते से बढ़ावा मिला है. उसे हाल ही में शुरू किए गए ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस ऐंड प्रॉस्पेरिटी (TRIPP) से भी फ़ायदा मिलेगा, जो परोक्ष रूप से दक्षिण काकेशस की भू-राजनीति को नया आकार देने वाला है. TRIPP गलियारे को ज़ंगेज़ुर गलियारा भी कहा जाता है. यह नख़चिवन को, जो कि तुर्किये की सीमा से लगा अज़रबैजानी एन्क्लेव है, दक्षिणी आर्मेनिया से जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है. हालांकि, बाकू और येरेवन के बीच शांति समझौता जिस रूप में आगे बढ़ेगा, उसी रूप में इस गलियारे की भी तरक्क़ी होगी. यह गलियारा रूस और ईरान के चेकप्वाइंटस को दरकिनार करेगा, जिससे क्षेत्र में तुर्किये का प्रभाव बढ़ेगा और वह यूरोप व मध्य एशिया के बीच व्यापार और ऊर्जा का एक ट्रांजिट हब बन जाएगा.

अगले 5 से 10 वर्षों में TRIPP गलियारे की अनुमानित लागत 3 से 5 अरब डॉलर तक हो सकती है. इससे माल-उत्पादों की ढुलाई पर होने वाले ख़र्च में लगभग 20-30 अरब डॉलर की बचत हो सकेगी. इतना ही नहीं, माना जा रहा है कि 2027 तक यहां से लगभग 100 अरब डॉलर का व्यापार हो सकता है. तुर्किये इस गलियारे से मिलने वाले अवसरों का तेज़ी से लाभ उठा रहा है. अगस्त में, कार्स (तुर्किये) से अज़रबैजान के नख़चिवन एक्सक्लेव तक एक रेलवे लाइन का निर्माण-कार्य शुरू किया गया है.

“TRIPP गलियारा रूस और ईरान के चेकप्वाइंटस को दरकिनार करेगा, जिससे क्षेत्र में तुर्किये का प्रभाव बढ़ेगा और वह यूरोप व मध्य एशिया के बीच व्यापार और ऊर्जा का एक ट्रांजिट हब बन जाएगा.”

ट्रांस-एनाटोलियन प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (TANAP), दक्षिण काकेशस पाइपलाइन और ट्रांस-एड्रियाटिक पाइपलाइन (TAP) के विकास में भी तुर्किये बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है, ताकि अपने ऊर्जा स्रोतों में वह विविधता ला सके. इन पाइपलाइनों से कैस्पियन सागर और तुर्कमेनिस्तान से यूरोप तक गैस लाई जा सकती हैं, जिससे ईरान और रूस पर निर्भरता कम होगी. इस तरह की इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ता में अंकारा की सौदेबाजी की स्थिति को मज़बूत करेगी, क्योंकि इनसे तुर्किये का भू-रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है और नई आपूर्ति शृंखला में उसकी भूमिका भी उभरकर सामने आती है.

 

व्यापार और रक्षा सहयोग

तुर्किये ने 2016 में कज़ाकिस्तान और 2024 में उज़्बेकिस्तान के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) करके इस क्षेत्र में अपने व्यापारिक व वाणिज्यिक रिश्ते मज़बूत किए हैं. उज़्बेकिस्तान के साथ उसका संबंध तो रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच गया है. 2020 से 2024 के बीच OTS सदस्य देशों को कुल 36.6 अरब डॉलर का निर्यात किया गया, जबकि आयात 26 अरब डॉलर रहा. 2023 में कज़ाकिस्तान के साथ तुर्किये का व्यापार 6.4 अरब डॉलर और उज़्बेकिस्तान के साथ क़रीब 3 अरब डॉलर रहा, जो बीते वर्षों में तुलना में अच्छी-खासी बढ़ोतरी है. हाल के वर्षों में, चीन को पीछे छोड़ते हुए अंकारा तुर्कमेनिस्तान का सबसे बड़ा निर्यातक देश बनकर उभरा है.

“हाल के वर्षों में, चीन को पीछे छोड़ते हुए अंकारा तुर्कमेनिस्तान का सबसे बड़ा निर्यातक देश बनकर उभरा है.”

मध्य एशिया में OTS देशों के बीच आपसी रक्षा सहयोग भी बढ़ा है, ख़ास तौर से 2020 के करबाख़ युद्ध और 2023 के नागोर्नो-करबाख़ संघर्ष के दौरान तुर्किये द्वारा अज़रबैजान को भेजे गए रक्षा उपकरण व ड्रोन के बाद से. 2022 में, कज़ाकिस्तान और अंकारा इस बात पर सहमत हुए थे कि वे संयुक्त रूप से मानवरहित हवाई वाहन (UAV) बनाएंगे और एयरोस्पेस में भी रक्षा सहयोग करेंगे. तुर्कमेनिस्तान और किर्गिस्तान ने भी अपने रक्षा संबंधों को मज़बूत करना शुरू कर दिया है. साल 2024 में, उज़्बेकिस्तान और तुर्किये ने भी प्रशिक्षण और रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने वाले एक सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए. जनवरी 2025 में उज़्बेक अधिकारियों ने बताया कि वे तुर्किये का UAV ख़रीदने जा रहे हैं. हालांकि, नाटो की सदस्यता और कुछ मध्य एशियाई देशों (जैसे किर्गिस्तान और कज़ाकिस्तान) के रूस की अगुवाई वाले CSTO का सदस्य होने के कारण, तुर्किये एक सीमा तक ही अपने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ा पाने में सफल हो सकता है.

 

सजग मध्य एशिया

तुर्किये सांस्कृतिक उत्थान के लिए अपने सॉफ्ट पावर का भी इस्तेमाल कर रहा है, जैसे लैटिन-आधारित तुर्की वर्णमाला के लिए. उसने अपने सांस्कृतिक प्रभाव को फिर से बनाने के लिए इस क्षेत्र में मस्जिदें बनवाई हैं. इसका नतीजा यह निकला है कि OTS हाई-प्रोफाइल यात्राओं, धार्मिक मार्गदर्शन, शैक्षणिक पहलों और मध्य एशियाई छात्रों के लिए तुर्की विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा पाने के लिए छात्रवृत्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है. हालांकि, रूस, चीन, ईरान और अन्य ताक़तवर पड़ोसियों के प्रभाव में आकर मध्य एशियाई देश अंकारा की कुछ मांगों का विरोध भी कर रहे हैं. वे उत्तरी साइप्रस को व्यापक मान्यता दिलाने के तुर्किये के प्रयासों का पूरा समर्थन नहीं करते, जिस कारण क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रिया दिख सकती है, ख़ास तौर से ब्रुसेल्स की तरफ़ से. 

“कुल मिलाकर, मध्य एशिया में तुर्किये का प्रभाव साझा सांस्कृतिक संबंधों पर कम और क्षेत्र के नाज़ुक भू-राजनीतिक संतुलन को बिगाड़े बिना संपर्क, वाणिज्य और सुरक्षा के क्षेत्र में भरोसेमंद विकल्प देने की उसकी क्षमता पर अधिक निर्भर करेगा.”

इसी तरह, ईरान TRIPP गलियारे को लेकर चिंतित रहा है और ऐसी किसी भी योजना का वह विरोध करेगा. रूस भी अंकारा और मध्य एशियाई देशों के बीच हाल ही में हुए रक्षा सौदों से खुश नहीं है और उनके बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों को संदेह की नजर से देखता है. हालांकि, अमेरिका सहित सभी पश्चिमी ताक़तें तुर्किये का समर्थन करती हैं, विशेष रूप से TRIPP गलियारे को लेकर. मगर मध्य एशियाई देश सबके साथ संतुलित विदेश नीति बनाने के पक्षधर है. इन नाज़ुक भू-राजनीतिक समय में OTS तुर्की देशों को दुनिया भर में एक साझा मंच उपलब्ध कराता है.

 

तुर्किये का मध्य एशियाई सपना

OTS और मध्य गलियारे व TRIPP जैसी परियोजनाओं के माध्यम से तुर्किये जिस तरह से प्रयास कर रहा है, वह संकेत है कि अंकारा यूरोप और एशिया के बीच एक सेतु बनना चाहता है. फिर भी, अंकारा के बढ़ते व्यापार, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र की अपनी सीमाएं हैं. आर्थिक और सुरक्षा के मामले में मध्य एशियाई देश रूस और चीन पर काफ़ी ज़्यादा निर्भर हैं, जिस कारण अमेरिका की भी इस क्षेत्र में रुचि बढ़ रही है, साथ ही ईरान की क्षेत्रीय संवेदनशीलताएं भी उभर रही हैं. इन सबसे तुर्किये की महत्वाकांक्षाएं कमज़ोर हो जाती हैं. कुल मिलाकर, मध्य एशिया में तुर्किये का प्रभाव साझा सांस्कृतिक संबंधों पर कम और क्षेत्र के नाज़ुक भू-राजनीतिक सतुलन को बिगाड़े बिना संपर्क, वाणिज्य और सुरक्षा के क्षेत्र में भरोसेमंद विकल्प देने की उसकी क्षमता पर अधिक निर्भर करेगा.


(अयजाज़ वानी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के फेलो हैं)

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