Author : Abhishek Sharma

Expert Speak Raisina Debates
Published on Jan 30, 2026 Updated 0 Hours ago

उत्तर कोरिया में किम जोंग उन ने अचानक नहीं बल्कि सावधानी से अपनी बेटी किम जू ए को सत्ता की दिशा में बढ़ाना शुरू कर दिया है यह जानना दिलचस्प है कि कैसे एक छोटे से कदम से पूरे देश की राजनीति और भविष्य तय किया जा रहा है.

किम जू ए: सत्ता की राह पर पहला कदम

1 जनवरी को उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बेटी किम जू ए कुमसुसन पैलेस ऑफ द सन में नज़र आईं. 2022 में पहली बार लोगों के सामने नज़र आने के बाद किम जू ए ने अपने दादा और परदादा को श्रद्धांजलि देने के लिए पारिवारिक समाधि स्थल का दौरा किया. वैसे तो उनका बार-बार दिखाई देना लंबे समय से बहस का विषय रहा है लेकिन इस विशेष यात्रा ने किम जोंग उन की उत्तराधिकार योजना को लेकर विशेषज्ञों के आकलन को और अधिक बल दिया है. हालांकि बहुत कुछ रहस्य में लिपटा हुआ है. ये लेख उत्तर कोरिया में नेतृत्व के उत्तराधिकार की प्रक्रिया का विश्लेषण करता है, किम जू ए के राजनीतिक रूप से बार-बार दिखाई देने के पीछे की दलील को स्पष्ट करता है और बताता है कि आगे क्या होने वाला है. 

किम जोंग उन और उत्तर कोरिया की उत्तराधिकार रणनीति

पारंपरिक रूप से उत्तर कोरिया में नेतृत्व का उत्तराधिकार तीन महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर रहा है: सत्ताधारी नेता का स्वास्थ्य; आर्थिक स्थिरता एवं सामाजिक सामंजस्य जैसे आंतरिक कारण; और बाहरी सुरक्षा का माहौल जिसमें महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा और चीन एवं रूस के साथ कूटनीतिक संबंध शामिल हैं. किम जोंग उन के शासन में ये तीनों कारक स्थिर दिखते हैं. यही वजह है कि उन्होंने आधिकारिक रूप से उत्तराधिकार की किसी योजना की घोषणा नहीं की है. हालांकि स्थिरता दिखाई देने के बावजूद आंतरिक चर्चा शुरू हो चुकी हैं. उदाहरण के लिए, पिछले साल पार्टी के पदाधिकारियों के लिए प्रकाशित होने वाली वर्कर्स मैगज़ीन ने उत्तराधिकार के मुद्दे पर ज़ोर दिया और इस प्रक्रिया को शुरू किए जाने का समर्थन किया. 

ये लेख उत्तर कोरिया में नेतृत्व के उत्तराधिकार की प्रक्रिया का विश्लेषण करता है, किम जू ए के राजनीतिक रूप से बार-बार दिखाई देने के पीछे की दलील को स्पष्ट करता है और बताता है कि आगे क्या होने वाला है. 

ली सेउंग योल के अनुसार, उत्तर कोरिया में सत्ता हस्तांतरण को तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है: उत्तराधिकारी की वैधता की स्थापना; नेतृत्व की मज़बूती; और अंत में भविष्य के नेता के इर्द-गिर्द एक लोकप्रिय राजनीतिक-सैन्य आधार का निर्माण. पहले के उदाहरणों के आधार पर ऊपर ज़िक्र किए गए तीन कारकों के हिसाब से तीनों चरण अलग-अलग होते हैं. किम जोंग इल के मामले में उत्तराधिकार की योजना 1974 में शुरू होकर 1993 में समाप्त हुई. किम जोंग उन के लिए इसकी शुरुआत 2009 में हुई और 2010 में उनके पिता के निधन के साथ समाप्त हुई. अपने पिता की तुलना में किम जोंग उन को उत्तराधिकार की प्रक्रिया में ढलने के लिए बहुत कम समय (2008 से 2011) मिला जबकि उनके पिता के पास 70 के दशक के उत्तरार्ध से शुरू होकर अपनी राजनीतिक वैधता बनाने के लिए पर्याप्त समय था. 

तालिका 1: किम जोंग इल और किम जोंग उन के उत्तराधिकार का टाइमलाइन

किम जोंग इल का उत्तराधिकार

किम जोंग उन का उत्तराधिकार 

1961: कोरिया वर्कर्स पार्टी (KWP) में शामिल 

1964: KWP की सेंट्रल कमेटी के सांगठनिक ब्यूरो के निदेशक बने

फरवरी 1974: किम इल सुंग के उत्तराधिकारी घोषित, वर्कर्स पार्टी की सेंट्रल कमेटी के पॉलिटिकल ब्यूरो में निर्वाचित 

28 सितंबर 2010: चार स्टार वाले जनरल के रूप में प्रमोशन

24 दिसंबर 1991: कोरियन पीपुल्स आर्मी के सुप्रीम कमांडर बने

29 सितंबर 2010: कोरिया वर्कर्स पार्टी के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष

अप्रैल 1993: उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा आयोग (NDC) के अध्यक्ष घोषित 

10 अक्टूबर 2010: वर्कर्स पार्टी की 65वीं वर्षगांठ के दौरान किम जोंग उन पहली बार लोगों के सामने नज़र आए

8 जुलाई 1994: 82 साल की उम्र में किम इल सुंग का निधन 

18 दिसंबर 2011: 69 साल की उम्र में किम जोंग इल का निधन 

1997: KWP के महासचिव के रूप में निर्वाचित 

10 फरवरी 2011: आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय रक्षा आयोग (NDC) के उपाध्यक्ष नियुक्त 


स्रोत: लेखक का अपना संकलन, KBS, The Guardian

पहले चरण में नेता के साथ विदेशी दौरों के अलावा राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में शामिल होना भी है. उदाहरण के लिए, किम जोंग इल ने 1973 में पार्टी के संगठन, मार्गदर्शन और प्रचार मामलों के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया और किम इल सुंग के साथ 1965 और 1969 में पूर्ववर्ती सोवियत संघ और इंडोनेशिया की विदेश यात्रा की. इसी तरह, किम जोंग उन को 2009 में उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के तुरंत बाद राजनीतिक ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी. सत्ता संभालने से पहले उन्होंने भी अपने पिता के साथ दो बार चीन की यात्रा की.

किम जोंग उन के शासन में ये तीनों कारक स्थिर दिखते हैं. यही वजह है कि उन्होंने आधिकारिक रूप से उत्तराधिकार की किसी योजना की घोषणा नहीं की है. हालांकि स्थिरता दिखाई देने के बावजूद आंतरिक चर्चा शुरू हो चुकी हैं. 

उत्तर कोरिया में दूसरी और तीसरी पीढ़ी का सत्ता हस्तांतरण शीत युद्ध और किम जोंग इल के बिगड़ते स्वास्थ्य की पृष्ठभूमि में हुआ. आज अपने पिता और दादा के विपरीत किम जोंग उन की सेहत अच्छी लगती है और वो किसी आंतरिक या बाहरी चुनौती का सामना नहीं कर रहे हैं. इन कारणों को देखते हुए उनका शासन अधिक सुरक्षित लगता है. परमाणु हथियार होने और रूस एवं चीन के साथ गठबंधन की वजह से किम जोंग उन और मज़बूत हो गए हैं. इस स्थिर परिस्थिति को देखते हुए सत्ता हस्तांतरण की तुरंत कोई आवश्यकता नहीं है. हालांकि भविष्य में सत्ता की निरंतरता और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए किम जोंग उन से उम्मीद की जाती है कि वो अपने उत्तराधिकारी को जल्द तैयार करना शुरू कर देंगे. 

किम जू ए और वंशवादी राजनीति की निरंतरता

किम जू ए को पहली बार 2022 में उत्तर कोरिया की सबसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासॉन्ग-17 के लॉन्च के दौरान देखा गया था. इसके बाद से किम जोंग उन के सत्ता हस्तांतरण को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं. किम जू ए बार-बार महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य आयोजनों में भाग लेती देखी गई हैं. इनमें मिसाइल लॉन्च, विकास परियोजनाएं और फैक्ट्री का उद्घाटन शामिल हैं. लेकिन उनकी कम उम्र को देखते हुए उन्हें अभी तक कोई ख़ास राजनीतिक ज़िम्मेदारी या अधिकार नहीं मिला है. अपने पिता (सत्ता मिलने के समय उनकी उम्र 27 साल थी) के विपरीत जू ए की उम्र केवल 12 या 13 साल मानी जाती है जो राजनीतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए बहुत कम है. ये उनके लिए उत्तर कोरिया की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था की जटिलताओं का सामना करने के लिए एक दशक की लंबी अवधि की शुरुआत का संकेत है. 

इस संदर्भ में किम जू ए के बार-बार दिखाई देने को उत्तर कोरिया में सत्ता हस्तांतरण की योजना से जोड़ा जाना चाहिए. ये भविष्य में उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी का एक हिस्सा है. ये सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया के पहले चरण में उनके प्रवेश का प्रतीक है जो उनकी राजनीतिक वैधता को मज़बूत बनाने पर केंद्रित है. आयोजनों में किम जोंग उन के साथ दिखाकर उन्हें उत्तर कोरिया की अगली नेता के रूप में पेश किया जा रहा है. इससे उत्तर कोरिया के राजनीतिक संस्थानों को स्पष्ट संकेत मिलता है.   

परमाणु हथियार होने और रूस एवं चीन के साथ गठबंधन की वजह से किम जोंग उन और मज़बूत हो गए हैं. इस स्थिर परिस्थिति को देखते हुए सत्ता हस्तांतरण की तुरंत कोई आवश्यकता नहीं है. 

आंतरिक राजनीति के अलावा सत्ता हस्तांतरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चीन और रूस समेत करीबी साझेदारों के सामने अगले नेता की राजनीतिक वैधता को स्थापित करना भी है. विक्ट्री डे परेड के लिए पिछले साल किम जोंग उन की चीन यात्रा के दौरान किम जू ए अपने पिता के साथ थीं. ये उनकी पहली विदेश यात्रा थी. ये दौरा महत्वपूर्ण था क्योंकि इस दौरान उनका परिचय चीन के नेतृत्व और दूसरे समाजवादी मित्रों से कराया गया. किम जोंग उन और उनके पिता के सत्ता हस्तांतरण की तैयारी के दौरान भी ऐसा ही देखा गया था.

चौथी पीढ़ी का उत्तराधिकार एवं शासन रणनीति

अपनी बेटी को बार-बार लोगों के सामने लाकर किम जोंग उन अगले उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें  राजनीतिक वैधता और अधिकार दिलाने की कोशिश कर रहे हैं. इस मामले में उन्होंने ख़ुद की कठिन यात्रा से सबक सीखा है. अपने पिता के असामयिक निधन से किम जोंग उन सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने में नाकाम रहे जिसका समापन पार्टी के सातवें सम्मेलन के दौरान होना था. इसके परिणामस्वरूप उनकी राजनीतिक यात्रा चुनौतीपूर्ण रही. पिता के निधन के बाद कुछ वर्षों तक उनके लिए सत्ता संभालना आसान नहीं रहा. उनका ज़्यादातर समय अपना प्रभाव बढ़ाने और सेना एवं पार्टी के भीतर ख़ुद को मज़बूत करने में गुजरा. उन्हें अपने भाई समेत पार्टी में वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं को हटाना पड़ा. 

उत्तर कोरिया के सामाजिक-राजनीतिक माहौल में किम जू ए को नेता बनाने पर काफी प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है. उत्तर कोरिया का बेहद पितृसत्तात्मक समाज इस चुनौती को और बढ़ाएगा. जू ए की कम उम्र को देखते हुए किम जोंग उन उनके लिए सत्ता हस्तांतरण की नींव रख रहे हैं ताकि वयस्क होते ही सत्ता पर उनकी पकड़ मज़बूत हो जाए. सार्वजनिक समारोहों में किम जू ए का दिखना सत्ता हस्तांतरण के पहले चरण को गति प्रदान करता है. ये अभी अनिश्चित है कि कब वो गद्दी पर दावा करेंगी लेकिन ये तय है कि उन्हें रणनीतिक रूप से अपने पिता की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है.


अभिषेक शर्मा ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में जूनियर फेलो हैं.

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