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सोचिए, रूस से शुरू होकर ईरान तक एक मालगाड़ी 12 दिन में मध्य एशिया पार कर रही है- भारत का नया व्यापार मार्ग INSTC अब सिर्फ़ रास्ता नहीं बल्कि रणनीति भी बन गया है. यह भारत को मध्य एशिया के खनिज और व्यापार के अवसरों से जोड़ रहा है.
Image Source: An old Central Asia map. © cea + Flickr/CC BY 2.0
अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के पूर्वी हिस्से के लिए 8 नवंबर, 2025 का दिन ऐतिहासिक रहा, जब मॉस्को के उत्तरी भाग से शुरू होकर एक मालगाड़ी मध्य एशिया से होते हुए ईरान पहुंची. इस मालगाड़ी में 62 कंटेनर थे और हर कंटेनर की लंबाई 40 फुट थी. तेहरान के एप्रन ड्राई बंदरगाह तक की इस 900 किलोमीटर की यात्रा में मालगाड़ी को कुल 12 दिन लगे, जिसमें कज़ाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को पार करते हुए वह ईरान के इंचेह बोरुन में दाखिल हुई थी.
मार्च 2025 से भारत मध्य एशिया तक माल भेजने के लिए इसी रास्ते का उपयोग कर रहा है. इसके लिए गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से माल भेजा जाता है, जो ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह होते हुए मध्य एशिया तक पहुंचता है. नई दिल्ली के लिए, INSTC का पूर्वी गलियारा न सिर्फ़ स्वेज़ नहर का एक विकल्प बनकर उभरा है, बल्कि 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर तक निर्यात करने संबंधी लक्ष्य को पाने का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी बन रहा है. इसके अलावा, रेयर अर्थ व दुर्लभ खनिजों पर बीजिंग के निर्यात प्रतिबंधों को देखते हुए, पूर्वी गलियारा भारत को मध्य एशिया के बाज़ारों की निर्यात-क्षमता का उपयोग करने और मध्य एशियाई देशों में उपलब्ध इन खनिजों के विशाल भंडार का इस्तेमाल करके चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का अवसर भी दे रहा है.
ट्रेन 900 किमी का सफर 12 दिन में तय कर इंचेह बोरुन पहुँची।
INSTC पर साल 2000 में हस्ताक्षर किए गए थे. यह एक मल्टीमॉडल परिवहन गलियारा है, जो भारत को यूरेशिया से जोड़ता है. इसके लिए स्वेज़ नहर जाने की ज़रूरत नहीं रह जाती. इसमें रूस, ईरान और भारत शामिल हैं. परस्पर विरोधी हितों और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के कारण इस गलियारे का निर्माण-कार्य धीमा रहा, जिस कारण यहां से कार्गो कम जा रहे हैं. मगर, इसकी 928 किलोमीटर लंबी रेल लाइन, जिसे पूर्वी मार्ग या कज़ाकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान-ईरान (KTI) मार्ग के रूप में भी जाना जाता है, इस गलियारे होकर व्यापार बढ़ाने को तैयार है. KTI बनाने के लिए कज़ाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और ईरान के बीच 2007 में एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, जिसके बाद साल 2009 में इस रेल लाइन को बनाने का काम शुरू हुआ. इसकी कुल लागत लगभग 1.4 अरब डॉलर रही, जिसमें 37 करोड़ डॉलर का योगदान इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक ने किया है. यह 2014 में चालू हुआ, जो मध्य एशियाई देशों, ईरानी बंदरगाहों और भारत के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध बनाता है. मॉस्को-एप्रन रेलवे लाइन (सरख़्स से होकर गुज़रने वाले मार्ग की तुलना में लगभग 600 किलोमीटर छोटी) ने KTI की कनेक्टिविटी को और बेहतर बना दिया है.
पूर्वी गलियारा भारत के 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात लक्ष्य का प्रमुख रास्ता है।
INSTC का पश्चिमी गलियारा, जो 5,100 किलोमीटर लंबा है और रूस-फिनलैंड सीमा से लेकर बंदर अब्बास बंदरगाह तक के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को जोड़ता है, वाकई में छोटा परिवहन मार्ग है, पर ईरान पर प्रतिबंधों व अन्य भू-राजनीतिक मसलों के कारण इसका निर्माण-कार्य धीमा हो गया है. इससे जुड़ी महत्वपूर्ण रश्त-अस्तारा रेलवे लाइन तो अब तक अधूरी है. पूर्वी गलियारा को आधिकारिक तौर पर 2022 में शुरू किया गया था, जब पहली ट्रेन कज़ाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को पार करते हुए रूस और ईरान के बीच सीधा संपर्क बनाने में सफल रही. 2023-24 में, इस गलियारे से होकर ईरान को करीब 18 लाख से 20 लाख टन माल पहुंचाया गया, जो 2022 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक था. 2023 में, रूस, तुर्कमेनिस्तान और कज़ाकिस्तान ने इस गलियारे पर परिचालन के लिए एक नया संयुक्त उद्यम बनाया, जो माल के प्रकार और रास्तों के आधार पर सीमा शुल्क में 20 से 40 प्रतिशत तक छूट दे रहा है. यह मार्ग ज़ार के शासन-काल के समय के ट्रांस-कैस्पियन रेलमार्ग से भी जुड़ता है, जिससे उज़्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान तक पहुंचा जा सकता है.
मार्च 2025 में, भारत ने INSTC के पूर्वी मार्ग से होकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से कज़ाकिस्तान तक माल की एक खेप भेजी. यह खेप सबसे पहले बंदर अब्बास बंदरगाह पहुंची, जिसके बाद उसको मध्य एशिया तक पहुंचाया गया. इस खेप ने भारत का मध्य एशिया के साथ संपर्क और व्यापार बढ़ा दिया है, जबकि मध्य एशिया की कोई भी सीमा समुद्र से नहीं लगती, यह चारों तरफ़ ज़मीन से घिरा है. भारत के मध्य एशिया के साथ पहले से ही कई समझौते हैं, जिनमें 2018 में नई दिल्ली का आश्गाबात समझौते का सदस्य बनना काफ़ी महत्वपूर्ण है. इस समझौते का उद्देश्य फ़ारस की खाड़ी और मध्य एशिया के बीच एक परिवहन गलियारा बनाना है. इसका एक मकसद ‘TIR कार्नेट’ का उपयोग करने वाली व्यवस्था ‘माल के अंतरराष्ट्रीय परिवहन पर सीमा शुल्क कन्वेंशन (TIR कन्वेंशन, 1975)’ को लागू करना भी है, जिसमें एक ही दस्तावेज़ के साथ कई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से माल ले जाने की सुविधा मिल जाती है.
2000 में शुरू INSTC भारत को यूरेशिया से जोड़ने वाला मल्टीमॉडल गलियारा है।
मध्य एशियाई देशों ने भी क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं का नेतृत्व करने के भारत के प्रयासों का समर्थन किया है. वह नई दिल्ली के साथ बेहतर संपर्क व व्यापार को लगातार बढ़ावा दे रहा है. दोनों क्षेत्र व्यापार और संपर्क को बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों से जुड़े हुए हैं. 2019 के बाद से, भारत और मध्य एशिया के बीच विदेश मंत्री स्तर की बातचीत मुख्य रूप से सीधे संपर्क को लेकर ही होती रही है. 2020 में नई दिल्ली ने इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1 अरब डॉलर की ऋण सुविधा शुरू की. 2023 में एक संयुक्त कार्य समूह भी बनाया गया, ताकि चाबहार बंदरगाह के माध्यम से संपर्क बढ़ाया जा सके. मध्य एशिया ने भी इस बंदरगाह को INSTC में शामिल करने का समर्थन किया है. नई दिल्ली ने 2024 में चाबहार बंदरगाह की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ईरान के साथ दस साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया, जिससे ‘बंदरगाह में बड़े निवेश’ के रास्ते खुल गए हैं. 2026 में जब चाबहार और ज़ाहेदान को जोड़ने वाली रेल लाइन की शुरुआत होगी, तब भारत और मध्य एशिया के बीच क्षेत्रीय संपर्क व व्यापार को और गति मिलेगी.
चाबहार बंदरगाह के ज़रिये अफ़ग़ानिस्तान के साथ भारत का व्यापार अब लगभग 1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे हिंद महासागर और यूरेशिया में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को कम करने में मदद मिल रही है. अंदरूनी आर्थिक बदलावों और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण मध्य एशिया का सामरिक महत्व बढ़ गया है. यही कारण है कि यूरोपीय संघ (EU), तुर्कीये, भारत और अमेरिका इस क्षेत्र के साथ संबंध मज़बूत करने की कोशिशों में हैं.
मध्य एशिया में रेयर अर्थ–खनिजों के विशाल भंडार से वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
यहां रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के विशाल भंडार हैं, जिस कारण यहां वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. मध्य एशिया में रेयर अर्थ के खरबों डॉलर के भंडार हैं और यहां वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की रणनीतिक क्षमताएं मौजूद हैं. अकेले कज़ाकिस्तान में करीब 5,000 भंडार हैं, जिनकी कीमत 46 ट्रिलियन डॉलर मानी जा रही है. चूंकि अभी यहां के ज़्यादातर महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग चीन में होती है, इसलिए इस क्षेत्र में रणनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन गई है. मध्य एशिया ने संतुलित भू-आर्थिक और राजनीतिक संबंध बनाने के उद्देश्य से यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ रेयर अर्थ को लेकर तकनीकी सहायता, अन्वेषण और प्रसंस्करण को लेकर साझेदारी बनाना शुरू कर दिया है.
ऐसी परिस्थितियों में, नई दिल्ली को INSTC के पूर्वी मार्ग के साथ और नज़दीक से जुड़ जाना चाहिए, ताकि उसके लिए मज़बूत, विश्वसनीय व विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखला बन सके और परिवहन संपर्क भी टिकाऊ रहे. यह मार्ग एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि भारत ने 2025 में मध्य एशियाई देशों के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है, जो रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ा है, ताकि इनकी आपूर्ति में चीन का दबदबा कम हो सके. साफ़ है, यह पूर्वी मार्ग नई दिल्ली के व्यापार में विविधता ला सकता है, खनिज आपूर्ति को सुरक्षित बना सकता है और INSTC में चाबहार को एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब बनाने से यूरेशिया में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद कर सकता है.
(अयजाज़ वानी (पीएचडी) ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में फेलो हैं)
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Ayjaz Wani (Phd) is a Fellow in the Strategic Studies Programme at ORF. Based out of Mumbai, he tracks China’s relations with Central Asia, Pakistan and ...
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