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भविष्य के युद्ध अब मैदान से ज़्यादा लैब और सॉफ्टवेयर से तय हो रहे हैं. AI और स्वायत्त प्रणालियों को लेकर अमेरिका–चीन की होड़ ने रक्षा और भू-राजनीति की पूरी सोच बदल दी है.
उभरती तकनीकी अब आधुनिक भू-राजनीति और रक्षा योजना का केंद्र बन गई है. यह प्रतिस्पर्धा सबसे ज्यादा अमेरिका और चीन के बीच दिखाई देती है जहाँ दोनों ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्वायत्त प्रणालियों को भविष्य के युद्धों के अहम औजार मानते हैं. अमेरिकी वायुसेना के सचिव फ्रैंक केंडल के अनुसार, यह एक तकनीक-आधारित हथियारों की दौड़ है. 2024 की रक्षा विभाग की रिपोर्ट और कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस के अध्ययन बताते हैं कि चीन AI और स्वायत्त प्रणालियों में उल्लेखनीय बढ़त बना चुका है जिससे अमेरिका पर अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है.
निजी क्षेत्र भी इस प्रतिस्पर्धा में गहराई से शामिल हैं. हालाँकि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी नई नहीं है लेकिन इसका पैमाना और फोकस अब बदल गया है. उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में केवल स्वायत्त प्रणालियों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 110 हो गई है, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े स्टार्टअप्स 84 तक पहुँच चुके हैं और उन्नत कंप्यूटिंग व सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में 2023 में 134 स्टार्टअप्स सक्रिय थे. यह वृद्धि किसी अचानक उछाल का परिणाम नहीं है बल्कि इस बात को दर्शाती है कि निजी नवाचार किस तरह राज्य की प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठा रहा है जिससे अमेरिका–चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज़ हो रही है.

Source: McKinsey & Company
Figure 2: Catalogue of Products by New Defence Tech Companies and their Categorisation

Source. Author’s compilation
नीचे दिए गए चित्र में अमेरिका की कुछ प्रमुख रक्षा तकनीक कंपनियों द्वारा विकसित उत्पादों की एक सूची प्रस्तुत की गई है. इन उत्पादों को उनके मुख्य कार्यों-जैसे कमांड और कंट्रोल, संचार या क्रियान्वयन-के आधार पर वर्गीकृत किया गया है. जिन उत्पादों की भूमिका एक से अधिक है, उन्हें उनकी बहु-कार्यात्मक क्षमताओं को दर्शाने के लिए विशेष रूप से चिन्हित किया गया है.
आधुनिक रक्षा तकनीक के परिदृश्य में अमेरिकी रक्षा-तकनीकी कंपनियों द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों में तीन प्रमुख रुझान स्पष्ट रूप से उभरते हैं. पहला, खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) तथा बहु-कार्यात्मक प्लेटफॉर्मों का बढ़ता प्रभुत्व है, जहाँ लगातार निगरानी, डेटा संग्रह और खुफिया विश्लेषण को कमान और संचालन क्षमताओं के साथ जोड़ा जा रहा है; इस क्षेत्र में एंड्यूरिल, ब्लैकस्काई, प्लैनेट लैब्स और हॉकआई 360 जैसी कंपनियाँ प्रमुख हैं.
दूसरा, सॉफ्टवेयर-आधारित कमांड एंड कंट्रोल प्रणालियों का तेजी से उभार है जो क्लाउड-नेटिव, स्केलेबल और एआई-सक्षम हैं तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक तेज बनाती हैं; इसमें पैलेंटिर, एंड्यूरिल का लैटिस और शील्ड एआई का हाइवमाइंड अहम उदाहरण हैं. तीसरा, टैक्टिकल स्तर पर एआई और स्वायत्त प्रणालियों पर बढ़ता ध्यान है जहाँ युद्धक्षेत्र के अग्रिम मोर्चों पर काम करने वाली स्वचालित प्रणालियाँ मानवीय हस्तक्षेप को कम कर रही हैं; इस क्षेत्र में शील्ड एआई, स्काइडियो, एंड्यूरिल और डीड्रोन जैसी कंपनियाँ अग्रणी भूमिका निभा रही हैं.
ये रुझान यह भी दर्शाते हैं कि रक्षा नवाचार अब अलग-अलग उत्पादों के बजाय एक नई डिज़ाइन सोच की ओर बढ़ रहा है.
इस दिशा में कंपनियाँ तीन आपस में जुड़ी हुई मूल अवधारणाओं को प्राथमिकता दे रही हैं:
मॉड्यूलरिटी: इन प्रणालियों को इस तरह डिज़ाइन किया जा रहा है कि उनके अलग-अलग हिस्सों को पूरे प्लेटफ़ॉर्म को दोबारा बनाए बिना आसानी से बदला या उन्नत किया जा सके. पेंटागन इसे मॉड्यूलर ओपन सिस्टम्स अप्रोच (MOSA) कहता है. इससे तकनीकी उन्नयन सरल होता है, पूरे कार्यक्रम की अवधि में लागत कम रहती है और एक ही सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों के लिए कई आपूर्तिकर्ताओं के बीच प्रतिस्पर्धा संभव होती है.
स्केलेबिलिटी: ये प्लेटफ़ॉर्म छोटे यूनिट स्तर के अभियानों से लेकर पूरे थिएटर स्तर की तैनाती तक आसानी से बढ़ाए जा सकते हैं. इससे सेनाएँ मूल प्रणाली को बदले बिना अपनी क्षमता और तैनाती के स्तर को आवश्यकतानुसार बढ़ा सकती हैं.
नेटवर्क सेंट्रिसिटी: हर उत्पाद को व्यापक डिजिटल नेटवर्क से जुड़ने योग्य बनाया जाता है जिससे विभिन्न सैन्य सेवाओं और सहयोगी देशों के बीच निर्बाध डेटा साझा करना और समन्वित संचालन संभव हो पाता है.
इसके अलावा, इन उत्पादों को केवल सैन्य अभियानों के लिए ही नहीं बल्कि ड्यूल-यूज़, वाणिज्यिक उपयोग और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों के लिए भी डिज़ाइन किया जा रहा है. यह एक व्यापक रुझान को दर्शाता है जहाँ व्यावसायिक-स्तर का नवाचार और किफायती मॉड्यूलर तकनीकें पारंपरिक, केवल सैन्य उद्देश्य से बनाए गए रक्षा हार्डवेयर की जगह ले रही हैं जिससे तेज़ अनुकूलन और विभिन्न क्षेत्रों में अधिक उपयोगिता संभव हो रही है.
डिफेन्स इनोवेशन यूनिट (DIU) और AFWERX जैसी पहलें अमेरिकी रक्षा विभाग के उस बदलाव को दर्शाती हैं जिसमें तेज़ प्रोटोटाइपिंग, ड्यूल-यूज़ नवाचार और स्टार्टअप्स के साथ सीधे सहयोग पर ज़ोर दिया जा रहा है. DIU का लक्ष्य व्यावसायिक तकनीकों को कम समय में सैन्य उपयोग में लाना है जबकि इसके रिप्लिकेटर इनिशिएटिव के तहत 18–24 महीनों में हज़ारों स्वायत्त प्रणालियाँ तैनात करने की योजना है. AFWERX ने नवाचार की एकीकृत पाइपलाइन बनाकर खरीद प्रक्रिया को तेज़ किया है और 2019 से अब तक हज़ारों अनुबंध प्रदान किए हैं. मोज़ेक वॉरफेयर और जॉइंट ऑल-डोमेन कमांड एंड कंट्रोल (JADC2) जैसी अवधारणाएँ बल संरचना को नया रूप दे रही हैं. मोज़ेक वॉरफेयर केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म की बजाय लचीली, परस्पर-संगत प्रणालियों पर आधारित है, जबकि JADC2 थल, वायु, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों को AI-संचालित रियल-टाइम नेटवर्क में जोड़ता है, जिससे तेज़ और सटीक निर्णय संभव होते हैं.
एक महत्वपूर्ण पहल एग्ज़ीक्यूटिव इनोवेशन कॉर्प्स का गठन है जिसके तहत प्रमुख तकनीकी कंपनियों के वरिष्ठ नेताओं को अंशकालिक रूप से सैन्य आधुनिकीकरण से जोड़ा गया है. इससे नागरिक तकनीक और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रियाओं के बीच की दूरी कम हो रही है.
वेंचर कैपिटल फर्में अब रक्षा तकनीक के क्षेत्र में केवल निवेशक भर नहीं रह गई हैं बल्कि वे इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. इन फर्मों द्वारा पूर्व सैन्य अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों और रक्षा मंत्रालय से जुड़े पूर्व अधिकारियों की नियुक्ति का उद्देश्य केवल तकनीकी समझ हासिल करना नहीं है बल्कि पेंटागन और नीति-निर्माण तंत्र तक बेहतर पहुँच और विश्वसनीयता स्थापित करना भी है. शील्ड कैपिटल, फाउंडर्स फंड और आंद्रेसेन होरोविट्ज़ जैसी प्रमुख फर्में इस दिशा में विशेष रूप से सक्रिय हैं और रक्षा नवाचार को रणनीतिक निवेश के रूप में देख रही हैं.
इन प्रयासों के माध्यम से निजी पूंजी, सैन्य आवश्यकताओं और नीति-निर्माण के बीच एक नया सेतु बन रहा है. इसका परिणाम यह है कि रक्षा प्लेटफॉर्म्स में अब बुद्धिमत्ता, निर्णय की गति और अनुकूलनशीलता को केंद्रीय महत्व दिया जा रहा है. वेंचर कैपिटल और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के इस संगम से एक ऐसा नया प्रभावशाली तंत्र उभर रहा है, जो पारंपरिक रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को चुनौती देता है और सैन्य क्षमताओं के विकास की दिशा को तेज़ी से बदल रहा है.
सॉफ्टवेयर-परिभाषित, AI-समेकित और मॉड्यूलर रक्षा प्रणालियों का उभार सैन्य शक्ति की सोच में एक बुनियादी बदलाव को दर्शाता है. बुद्धिमत्ता, गति और अनुकूलनशीलता अब रक्षा प्लेटफॉर्म्स का सक्रिय हिस्सा बन चुकी हैं. भारत के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण संकेत देता है. IDeX, DAIC, और DAIPA जैसे कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में नवाचार और AI को बढ़ावा देने की दिशा में शुरुआती प्रयास हैं लेकिन वैश्विक स्तर पर अधिक एकीकृत और अनुकूलनशील प्रणालियों के उभार को देखते हुए, भारत को तेज़ विकास चक्र, उपयोगकर्ताओं और नवोन्मेषकों के बीच बेहतर सहयोग तथा अपनी रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकों पर अधिक ध्यान देना होगा. अंतरिक्ष, एज स्वायत्तता और रियल-टाइम कमांड प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में भारत की अनुकूलन और नवाचार क्षमता उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा लचीलेपन के लिए निर्णायक होगी.
अरविंद सतीशकुमार ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के पूर्व इंटर्न रह चुके हैं.
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Aravind Sathishkumar is a former intern with the Observer Research Foundation. ...
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