Author : Shruti Jain

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Published on May 15, 2026 Updated 0 Hours ago

भारत की नई औद्योगिक नीति 2.0 और BHAVYA योजना देश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर कैसे बना रही है. आखिर जानें, कैसे यह पहल भारत के औद्योगिक ढांचे को मजबूत और आधुनिक बना रही है.

पढ़ें, भारत का इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन 2.0

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लगभग 33,660 करोड़ रुपये (4 अरब अमेरिकी डॉलर) के बजट के साथ, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2026 में पूरे देश में प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) की घोषणा की. यह योजना दिखाती है कि भारत उद्योग और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहता है. BHAVYA के तहत फैक्ट्री, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में नई नौकरियां बढ़ेंगी और बेहतर सुविधाएं बनेंगी. औद्योगिक पार्क कम संसाधनों का सही उपयोग करके देश को दुनिया के बाजार में ज्यादा मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करते हैं. विकासशील देशों में सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक पार्कों को तेजी से अपनाया जा रहा है.

चीन- एक उदाहरण

चीन इस बात का महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है कि किस प्रकार सरकारों ने औद्योगिक पार्कों का उपयोग तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किया. 1980 के दशक में शुरू किए गए इन पार्कों को चीन ने अपनी निर्यात-उन्मुख समाजवादी अर्थव्यवस्था में संस्थागत नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अपनाया था.

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) के अनुसार, चीन के औद्योगिक पार्कों ने क्षेत्रीय आर्थिक विकास, शहरीकरण और जीवन स्तर में सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. चीन में 2,500 से अधिक राष्ट्रीय और प्रांतीय औद्योगिक पार्क हैं, जो देश की लगभग 50 प्रतिशत GDP में योगदान देते हैं. प्रमुख पार्क तटीय क्षेत्रों के पास स्थित हैं और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोमेडिसिन, वस्त्र, कपड़े, जूते और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों के विनिर्माण पर केंद्रित हैं.

यह योजना दिखाती है कि भारत उद्योग और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहता है. BHAVYA के तहत फैक्ट्री, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में नई नौकरियां बढ़ेंगी और बेहतर सुविधाएं बनेंगी. औद्योगिक पार्क कम संसाधनों का सही उपयोग करके देश को दुनिया के बाजार में ज्यादा मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करते हैं.

हाल के वर्षों में चीन अपने औद्योगिक क्षेत्रों को ‘जीरो-कार्बन पार्क’ में बदलने पर ध्यान दे रहा है, ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके. इससे न केवल कार्बन न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलती है, बल्कि कार्बन ट्रेडिंग, कार्बन एसेट मैनेजमेंट, ऊर्जा ऑडिटिंग और ग्रीन फाइनेंस जैसी सेवाओं में नए बाजार अवसर भी पैदा होते हैं. ये पहलें वैश्विक व्यापार में ग्रीन लेबलिंग की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं और चीन को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी प्रदान करती हैं.

सफल औद्योगिक पार्कों के प्रमुख आधार

चीन का अनुभव बताता है कि औद्योगिक पार्क सिर्फ फैक्ट्री और सड़क बनाने की परियोजनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे पूरे औद्योगिक विकास का मजबूत तंत्र हैं. इनका उद्देश्य केवल सकल घरेलू उत्पाद और निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि रोजगार, नई तकनीक और पर्यावरण सुरक्षा को भी बढ़ावा देना है. चीन ने इन पार्कों को स्थानीय जरूरतों और संसाधनों के अनुसार विकसित किया, ताकि श्रमिकों, बिजली, पानी और परिवहन की बेहतर सुविधा मिल सके. सरकार ने आसान नियम और मजबूत प्रबंधन व्यवस्था बनाई. साथ ही, नवाचार बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, इनक्यूबेटर और IP सहायता दी गई. आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया.

भारत में औद्योगिक विकास की तस्वीर  

भारत ने औद्योगिक पार्कों की स्थापना में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. देश में 4,500 से अधिक औद्योगिक पार्क हैं, जिनकी सबसे अधिक संख्या आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्थित है. हालांकि, भारत के औद्योगिक पार्क कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जैसे निवेश की कमी, मंजूरियों में देरी और केवल भवन व सड़क बनाने पर ज्यादा ध्यान देना. कई बार मांग और जरूरत का सही आकलन किए बिना ही पार्क बना दिए जाते हैं, जिससे शुरुआती योजना और रणनीति की कमजोरियां साफ दिखाई देती हैं.

अभी ज्यादातर औद्योगिक पार्क पश्चिमी और दक्षिणी भारत में हैं, इसलिए उत्तर-पूर्व, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में भी अधिक विकास की जरूरत है. अधिकतर पार्क सरकारी हैं और निजी निवेश कम है. साथ ही, श्रमिकों के लिए आवास, सड़क, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है. 

इंडस्ट्रियल पार्क रेटिंग सिस्टम (IPRS) 2.0 रिपोर्ट के अनुसार, जानकारी की कमी और कम पारदर्शिता भारत के औद्योगिक भूमि विकास में बड़ी बाधा बनी हुई हैं. इन समस्याओं को दूर करने के लिए इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) बनाया गया है, ताकि जानकारी आसान हो और बेहतर योजना बन सके. अभी ज्यादातर औद्योगिक पार्क पश्चिमी और दक्षिणी भारत में हैं, इसलिए उत्तर-पूर्व, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में भी अधिक विकास की जरूरत है. अधिकतर पार्क सरकारी हैं और निजी निवेश कम है. साथ ही, श्रमिकों के लिए आवास, सड़क, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है.  भारत के कुछ औद्योगिक क्षेत्रों पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि वहाँ आवश्यक सुविधाओं की कमी है, जबकि श्रमिकों के लिए परिवहन और संचालन लागत भी अधिक है.

औद्योगिक पार्कों को भविष्य के लिए तैयार बनाना

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अनुसार, पारंपरिक औद्योगिक नीति अक्सर सब्सिडी, संरक्षणवाद या किसी विशेष क्षेत्र को प्रोत्साहन देने तक सीमित रहती थी. औद्योगिक नीति 2.0 पुरानी नीतियों से अलग है, क्योंकि यह सिर्फ सब्सिडी या उद्योगों को सुरक्षा देने तक सीमित नहीं रहती. इसमें बेहतर बुनियादी ढांचा, नई तकनीक, कौशल विकास, निवेश, व्यापार और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर उद्योगों को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाता है. चीन ने इसी तरीके से अपने औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाया. दूसरे देशों के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि केवल औद्योगिक पार्क या SEZ की नकल करने से फायदा नहीं होगा. जरूरी है कि ऐसा मजबूत औद्योगिक तंत्र बनाया जाए जो लागत कम करे, कंपनियों और सप्लाई नेटवर्क को मजबूत बनाए तथा उद्योगों को देश और दुनिया के बाजारों से जोड़े.

एआई आधारित डिजिटल सुविधाओं से बेहतर योजना और तेज लॉजिस्टिक्स संभव होंगे. साथ ही, पार्कों को सड़क, रेल, बंदरगाह और निर्यात केंद्रों से मजबूत कनेक्टिविटी देनी होगी. भारत की औद्योगिक नीति 2.0 तभी सफल होगी, जब औद्योगिक क्लस्टर केवल उत्पादन केंद्र न रहकर रोजगार, समावेशन और टिकाऊ विकास को भी बढ़ावा देंगे.

BHAVYA पहल भारत की औद्योगिक पार्क रणनीति को भूमि-आधारित मॉडल से पारिस्थितिकी तंत्र आधारित दृष्टिकोण की ओर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. अब तक औद्योगिक क्लस्टरों ने बुनियादी भौतिक अवसंरचना तैयार की है, लेकिन सुधारों के अगले चरण में उद्यमों के आसपास के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा. इसमें साझा परीक्षण सुविधाएँ, प्रमाणन, डिजाइन, कौशल केंद्र और उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग जैसी व्यावसायिक सहायता सेवाओं को मजबूत करना शामिल होगा.

इसके साथ ही, पार्कों को आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, लैंगिक-संवेदनशील अवसंरचना और सामुदायिक सुविधाओं में निवेश करना होगा, ताकि वे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने वाले उत्पादक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य कर सकें.

BHAVYA से जुड़े औद्योगिक पार्कों को भविष्य के लिए आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना होगा. इसके लिए सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली बचाने वाली इमारतें और कम प्रदूषण वाली उत्पादन व्यवस्था अपनानी होगी. उद्योगों को स्वच्छ तकनीक और ग्रीन सर्टिफिकेशन के लिए भी मदद देनी होगी. एआई आधारित डिजिटल सुविधाओं से बेहतर योजना और तेज लॉजिस्टिक्स संभव होंगे. साथ ही, पार्कों को सड़क, रेल, बंदरगाह और निर्यात केंद्रों से मजबूत कनेक्टिविटी देनी होगी. भारत की औद्योगिक नीति 2.0 तभी सफल होगी, जब औद्योगिक क्लस्टर केवल उत्पादन केंद्र न रहकर रोजगार, समावेशन और टिकाऊ विकास को भी बढ़ावा देंगे.


श्रुति जैन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज में एसोसिएट फेलो हैं.
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Shruti Jain

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Shruti is an Associate Fellow at the Centre for Development Studies, Observer Research Foundation (ORF), where her research examines the intersections between policy, economic diplomacy ...

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