क्या आप जानते हैं कि हाल ही में भारत-मलेशिया संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) में अपग्रेड हुए हैं? जानें कैसे निवेश, प्रवासी समुदाय और हालिया रक्षा-सहयोग जैसे कदम इस साझेदारी को इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहे हैं.
प्रवासी आधार पर टिके, व्यापार से मजबूत, ASEAN ढाँचों में समाहित और समुद्री वास्तविकताओं से आकार लिए हुए, भारत-मलेशिया संबंध इंडो-पैसिफिक में बढ़ता हुआ सामरिक महत्व हासिल कर रहे हैं. भारत-मलेशिया संबंध लम्बे समय से केवल व्यापारिक जुड़ाव से आगे बढ़कर बहु-क्षेत्रीय रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं. अगस्त 2024 में संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) तक उन्नत किया जाना एक महत्वपूर्ण बदलाव था, जिसने न केवल द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किया बल्कि मलेशिया और भारत के हितों को व्यापक क्षेत्रीय संरचनाओं में भी समाहित किया, विशेष रूप से ASEAN की केंद्रीयता और संतुलित हिंद-प्रशांत व्यवस्था के संदर्भ में.
यह दृष्टिकोण क्षेत्रीय संस्थागत तंत्र को मजबूत करने के लिए पारस्परिक समर्थन और साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं - जैसे आतंकवाद तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के विरुद्ध सहयोग, पर समानता को दर्शाता है. छिटपुट संपर्क के बजाय, भारत-मलेशिया सहयोग अब संरचनात्मक परस्पर निर्भरता से परिभाषित हो रहा है. एक बड़ा प्रवासी समुदाय विश्वास की नींव प्रदान करता है; वैश्विक अस्थिरता के बावजूद व्यापार ने लचीलापन दिखाया है; और निवेश प्रवाह रणनीतिक क्षेत्रों की ओर धीरे-धीरे झुकाव का संकेत देते हैं, जैसा कि CSP हस्ताक्षर के बाद प्रधानमंत्री मोदी की तीसरी यात्रा के दौरान दिखाई दिया. ये सभी कारक मिलकर इस संबंध को व्यापक ASEAN-भारत आर्थिक ढाँचे का एक महत्वपूर्ण, भले ही कम आंका गया, स्तंभ बनाते हैं.
भारत-मलेशिया संबंध लम्बे समय से केवल व्यापारिक जुड़ाव से आगे बढ़कर बहु-क्षेत्रीय रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं. अगस्त 2024 में संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) तक उन्नत किया जाना एक महत्वपूर्ण बदलाव था, जिसने न केवल द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किया बल्कि मलेशिया और भारत के हितों को व्यापक क्षेत्रीय संरचनाओं में भी समाहित किया.
भारत-मलेशिया: प्रमुख आर्थिक और जनसांख्यिकीय संकेतक (2019-2025)
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श्रेणी |
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प्रवासी |
मलेशिया में भारतीय मूल के लोग (PIO) |
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भारतीय नागरिक / प्रवासी |
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व्यापार |
कुल द्विपक्षीय व्यापार |
19.8-20 अरब अमेरिकी डॉल(2024-25) |
2019 से निरंतर वृद्धि |
ASEAN में भारत के प्रमुख व्यापार साझेदारों में मलेशिया की स्थिति |
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भारत का निर्यात |
मध्यम वृद्धि |
पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएँ और रसायन प्रमुख |
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भारत का आयात |
लगातार उच्च |
पाम ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आपूर्ति शृंखला का आधार |
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व्यापार ढांचा |
CECA + ASEAN |
भारत तंत्र |
समीक्षा/आधुनिकीकरण के अधीन - गहरे बाज़ार एकीकरण को समर्थन |
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निवेश |
भारत में मलेशियाई FDI |
क्रमिक विस्तार |
निवेशक विश्वास में वृद्धि का संकेत |
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प्रस्तावित मलेशियाई निवेश |
1 अरब डॉलर तक (बहु-क्षेत्रीय परियोजनाएँ) |
उभरती पाइपलाइन |
लेन-देन आधारित व्यापार से दीर्घकालिक पूंजी की ओर बदलाव |
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प्राथमिक क्षेत्र |
तकनीक, अवसंरचना, सेवाएँ |
वस्तु आधारित क्षेत्रों से आगे विस्तार |
आपूर्ति शृंखला विविधीकरण प्रवृत्तियों से मेल |
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वित्तीय संपर्क |
डिजिटल भुगतान (जैसे UPI लिंक पहल) |
सहयोग का नया क्षेत्र |
लेन-देन लागत घटा सकता है और MSME व्यापार बढ़ा सकता है |
मलेशिया के साथ भारत की गहरी होती भागीदारी, नई दिल्ली की विकसित होती इंडो-पैसिफिक रणनीति में ASEAN की केंद्रीयता से अलग नहीं है. पिछले दशक में भारत की Act East नीति को आर्थिक एकीकरण से आगे बढ़ाकर रणनीतिक, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग तक विस्तारित किया गया है- और दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया इसका प्रमुख साझेदार है. यह बदलाव ऐसे समय में और स्पष्ट है जब ASEAN की एकजुटता अमेरिका और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण दबाव में है.
आसियान के भीतर मलेशिया की भूमिका- व्यावहारिक, सहमति-आधारित और संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों पर कभी-कभी सावधान- यह दर्शाती है कि नई दिल्ली की भागीदारी संतुलित और निरंतर रहनी चाहिए. मलेशियाई नीति-निर्माता भारत को केवल शक्ति-संतुलनकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे साझेदार के रूप में देख रहे हैं जो खुली, समावेशी और नियम-आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था के आसियान दृष्टिकोण को साझा करता है. यह सामंजस्य आसियान के भीतर रणनीतिक तनाव को कम करता है और समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद तथा आर्थिक संपर्क जैसे मुद्दों पर सामूहिक प्रतिक्रिया को मजबूत करता है. क्षेत्रीय प्रभावों के केंद्र में इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा का प्रश्न है, जहाँ दोनों देशों के हित मिलते हैं. मलक्का जलडमरूमध्य पर स्थित और दक्षिण चीन सागर के निकट मलेशिया का भौगोलिक स्थान उसे वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री संपर्क मार्गों की सुरक्षा में केंद्रीय बनाता है. भारत के बाहरी व्यापार का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इन जलमार्गों से गुजरता है, जो बताता है कि नई दिल्ली कुआलालंपुर के साथ समुद्री सहयोग को क्यों गहरा कर रही है.
मलेशियाई नीति-निर्माता भारत को केवल शक्ति-संतुलनकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे साझेदार के रूप में देख रहे हैं जो खुली, समावेशी और नियम-आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था के आसियान दृष्टिकोण को साझा करता है. यह सामंजस्य आसियान के भीतर रणनीतिक तनाव को कम करता है और समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद तथा आर्थिक संपर्क जैसे मुद्दों पर सामूहिक प्रतिक्रिया को मजबूत करता है.
संस्थागत सहयोग - नियमित नौसैनिक संवाद से लेकर द्विपक्षीय और आसियान -नेतृत्व वाले संयुक्त अभ्यासों तक - ने दोनों देशों की गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों जैसे समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, समुद्री साइबर जोखिम, तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) से निपटने की क्षमता बढ़ाई है. इसी संदर्भ में भारत और मलेशिया ने जनवरी 2026 में ADMM-Plus आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता की और टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित किया, जो क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी समन्वय में बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है.
रक्षा सहयोग भी वर्षों में परिपक्व हुआ है. Malaysia-India Defence Cooperation Committee (MIDCOM) के तहत नियमित बैठकें, हाल में फरवरी 2025 में आयोजित, तथा हरिमाउ शक्ति और समुद्र लक्ष्मण जैसे संयुक्त अभ्यास, और बहुपक्षीय मंचों में भागीदारी - यह सब व्यावहारिक सुरक्षा सहयोग के क्रमिक विस्तार को दर्शाते हैं. नई दिल्ली और कुआलालंपुर के संबंधों की विशेषता केवल आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत जन-से-जन आधार भी है. मलेशिया विश्व का तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय रखता है, जिसकी तमिल भाषा और संस्कृति में गहरी जड़ें हैं. ऑडियो-विजुअल सह-उत्पादन और प्रवासी कल्याण समझौतों जैसे हालिया कदम इन सामाजिक संबंधों को दीर्घकालिक सहयोग की रणनीतिक संपत्ति के रूप में मान्यता देते हैं.
क्षेत्रीय प्रभाव हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे तक भी फैलते हैं, जहाँ आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और तकनीकी सहयोग प्रमुख चिंता बन रहे हैं. भारत और मलेशिया सेमीकंडक्टर सहयोग, डिजिटल आर्थिक एकीकरण और तकनीकी साझेदारी की खोज कर रहे हैं- जो दर्शाता है कि द्विपक्षीय संबंध अब व्यापक क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं में समाहित हो रहे हैं.
आर्थिक संबंधों को आसियान -भारत व्यापार ढांचों के अंतर्गत और गहरा करने की आवश्यकता है. सेमीकंडक्टर और डिजिटल अवसंरचना जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में मूल्य श्रृंखलाओं को जोड़ना मलेशिया के स्थापित पारिस्थितिकी तंत्र और भारत के विस्तृत बाज़ार आधार का बेहतर उपयोग कर सकता है.
आगे देखते हुए, CSP के तहत संबंधों की स्थायित्व और रणनीतिक प्रासंगिकता इस बात पर निर्भर करेगी कि हाल के वर्षों की गति को दोनों देश कितनी प्रभावी तरह ठोस तंत्र और निरंतर सहयोग में बदलते हैं. हालिया उच्च-स्तरीय बैठकों में हस्ताक्षरित MoU और समझौते एक बहु-क्षेत्रीय एजेंडा को दर्शाते हैं, जिसका उद्देश्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं और रणनीतिक दृष्टिकोणों को और निकटता से जोड़ना है. इन वार्ताओं के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा-पार आतंकवाद की निंदा की और वैश्विक आतंकवाद-रोधी व्यवस्थाओं में दोहरे मानदंडों को अस्वीकार किया. इस एजेंडा को लागू करने के लिए कुछ रणनीतिक आवश्यकताएँ हैं. पहला, रक्षा और सुरक्षा स्तंभ- MIDCOM संवाद और नियमित संयुक्त अभ्यासों द्वारा समर्थित- को उभरते क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और इंटरऑपरेबिलिटी पहल तक विकसित करना होगा.
दूसरा, आर्थिक संबंधों को आसियान -भारत व्यापार ढांचों के अंतर्गत और गहरा करने की आवश्यकता है. सेमीकंडक्टर और डिजिटल अवसंरचना जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में मूल्य श्रृंखलाओं को जोड़ना मलेशिया के स्थापित पारिस्थितिकी तंत्र और भारत के विस्तृत बाज़ार आधार का बेहतर उपयोग कर सकता है. साथ ही, ADMM Plus, आसियान-भारत संयुक्त सहयोग तंत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत पहलों जैसे आसियान -केंद्रित मंचों में इन द्विपक्षीय प्रयासों को समाहित करना खुलेपन और बहुपक्षवाद के मानकों को मजबूत करेगा तथा महाशक्ति प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न शून्य-योग दबाव को कम करेगा.
अंततः, विश्वविद्यालय सहयोग, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम और संरचित सांस्कृतिक पहल- जैसे TVET, ‘Study in India’ कार्यक्रम और नई घोषित तिरुवल्लुवर छात्रवृत्ति- को प्रतीकात्मक आदान-प्रदान से आगे बढ़ाकर स्थायी संस्थागत साझेदारी में बदलना होगा. छात्र गतिशीलता, संयुक्त शोध और उद्योग-शैक्षणिक संबंधों को बढ़ावा देना दीर्घकालिक विश्वास को मजबूत करेगा और साझेदारी को भू-राजनीतिक परिवर्तनों के प्रति अधिक लचीला बनाएगा.
इन सभी प्रयासों के साथ, भारत-मलेशिया साझेदारी दक्षिण-पूर्व एशिया और व्यापक हिंद-प्रशांत में एक रणनीतिक रूप से समाहित, परिचालन रूप से प्रासंगिक और क्षेत्रीय स्थिरता प्रदान करने वाली शक्ति में परिवर्तित हो सकती है.
प्रतनाश्री बसु ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सामरिक अध्ययन कार्यक्रम में एसोसिएट फेलो हैं.
श्रीपर्णा बनर्जी भी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सामरिक अध्ययन कार्यक्रम में एसोसिएट फेलो हैं.
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Pratnashree Basu is an Associate Fellow with the Strategic Studies Programme. She covers the Indo-Pacific region, with a focus on Japan’s role in the region. ...
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Sreeparna Banerjee is an Associate Fellow in the Strategic Studies Programme. Her work focuses on the geopolitical and strategic affairs concerning two Southeast Asian countries, namely ...
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