Author : Ayjaz Wani

Expert Speak Raisina Debates
Published on Feb 28, 2026 Updated 3 Days ago

हाल ही में भारत के CDS जनरल अनिल चौहान के आर्मेनिया दौरे से दक्षिण काकेशस में नई रणनीतिक हलचल शुरू हुई. जानें कैसे बढ़ता भारत-आर्मेनिया रक्षा सहयोग क्षेत्रीय संतुलन और भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत कर रहा है.

भारत-आर्मेनिया साझेदारी: जानें रणनीति

भारत और आर्मेनिया अपनी ऐतिहासिक साझेदारी को रणनीतिक रक्षा सहयोग में बदलकर दक्षिण काकेशस में शक्ति संतुलन मजबूत कर रहे हैं और त्रिपक्षीय दबावों का सामना कर रहे हैं.1 फरवरी 2026 को भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया गणराज्य का दौरा किया. इस यात्रा का उद्देश्य दक्षिण काकेशस में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और उभरते क्षेत्रीय गठबंधनों के बीच दीर्घकालिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना था. यह यात्रा द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी, जिसमें संयुक्त पहल और अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाएं शामिल हैं, ताकि साझा रणनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सके.

CDS ने आर्मेनिया के रक्षा मंत्री सुरेन पापिक्यान से मुलाकात की, नेशनल डिफेंस रिसर्च यूनिवर्सिटी (NDRU) में छात्रों को आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर संबोधित किया, और वाज़गेन सरगस्यान सैन्य अकादमी में आईटी प्रयोगशाला तथा दूरस्थ शिक्षा केंद्र का उद्घाटन किया. दोनों पक्षों ने पेशेवर प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और ड्रिल्स पर भी जोर दिया, जिससे सुरक्षा क्षेत्रों में परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान हो सके.

इस यात्रा का उद्देश्य दक्षिण काकेशस में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और उभरते क्षेत्रीय गठबंधनों के बीच दीर्घकालिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना था. यह यात्रा द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी, जिसमें संयुक्त पहल और अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाएं शामिल हैं.

साझा भू-राजनीतिक और भू-रणनीतिक हितों से प्रेरित भारत और आर्मेनिया की ऐतिहासिक साझेदारी अब अग्रिम पंक्ति की रणनीतिक साझेदारी में विकसित हो चुकी है. यह रणनीतिक पुनर्संरेखण मात्र एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों से उत्पन्न संभावित खतरों के बीच बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की साझा आकांक्षा का प्रतिबिंब है.

रक्षा सहयोग का विस्तार

आर्मेनिया और भारत ने 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित किए. 2020 में भारत ने 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक अनुबंध हासिल किया, जिसके तहत ‘स्वाथी’ हथियार-लोकेटिंग रडार की आपूर्ति की गई. यह प्रणाली 50 किलोमीटर की सीमा के भीतर दुश्मन के हथियारों का तेज़ और सटीक पता लगाने में सक्षम है. आर्मेनियाई सुरक्षा एजेंसियों ने बोली प्रक्रिया के दौरान स्वदेशी रूप से विकसित स्वाथी प्रणाली को रूसी और पोलिश रडार प्रणालियों से बेहतर माना. इस रक्षा समझौते ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बल दिया, जिसका उद्देश्य रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना है. अक्टूबर 2021 में भारत के विदेश मंत्री की आर्मेनिया यात्रा के बाद यह संबंध अधिक रणनीतिक और सुरक्षा-केंद्रित हो गया, जिससे रक्षा सहयोग में गहराई आई.

2020 के 44-दिवसीय नागोर्नो-कराबाख संघर्ष के दौरान तुर्किये ने अज़रबैजान को सक्रिय समर्थन दिया. पाकिस्तान ने भी बाकू का समर्थन किया, जो दोनों के बीच निकट रणनीतिक साझेदारी और कश्मीर तथा नागोर्नो-कराबाख जैसे मुद्दों पर समान दृष्टिकोण से प्रेरित था. आर्मेनियाई स्रोतों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना की विशेष इकाइयों ने अज़रबैजानी बलों के साथ मिलकर संघर्ष में भाग लिया, जिससे बाकू की जीत में योगदान मिला.

इन परिस्थितियों में मॉस्को, जो 2011 से 2020 के बीच आर्मेनिया को कुल हथियार आपूर्ति का 94 प्रतिशत प्रदान करने वाला प्रमुख आपूर्तिकर्ता था, ने युद्धविराम की व्यवस्था की और रूसी शांति सैनिक तैनात किए, किंतु यूक्रेन पर अपने ध्यान के कारण कथित रूप से हथियार आपूर्ति में कमी की. परिणामस्वरूप, येरेवन ने अधिक विश्वसनीय साझेदार की तलाश शुरू की और भारत की ओर रुख किया. चूँकि दोनों देशों ने अपने अधिकांश हथियार रूस से आयात किए थे, इसलिए भारतीय हथियार प्रणालियाँ आर्मेनियाई सशस्त्र बलों के साथ आसानी से समन्वित की जा सकीं. 2020 से 2024 के बीच येरेवन भारतीय रक्षा निर्यात का प्रमुख प्राप्तकर्ता बनकर उभरा, जिनके अनुबंधों का अनुमान लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है.

प्रारंभिक सुरक्षा चिंताओं से परे, यह रक्षा सहयोग अब व्यापक भू-राजनीतिक महत्व ग्रहण कर चुका है, क्योंकि दक्षिण काकेशस पुनः महाशक्ति प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बनता जा रहा है.आर्मेनिया-भारत रक्षा सहयोग दक्षिण काकेशस में शक्ति संतुलन बदल रहा है.

2022 में आर्मेनिया ‘आकाश’ मिसाइल प्रणाली का पहला विदेशी खरीदार बना और 720 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की 15 इकाइयों का आदेश दिया. यह प्रणाली भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा निर्मित है. यह लड़ाकू विमानों, निर्देशित मिसाइलों और ड्रोन सहित विभिन्न हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करती है. 2024 में इसकी आपूर्ति शुरू हुई, जिससे येरेवन की सैन्य क्षमता और रक्षा स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. मानवरहित हवाई खतरों से सुरक्षा बढ़ाने के लिए भारत ने एक उन्नत एंटी-ड्रोन प्रणाली भी उपलब्ध कराई, जो ड्रोन का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है.

रक्षा और सुरक्षा सहयोग के गहराने के साथ, 2023 में येरेवन ने नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास में रक्षा अताशे की नियुक्ति की. आर्मेनिया ने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लांचर बैटरियों के अधिग्रहण के लिए भी समझौते अंतिम रूप दिए. इनकी आपूर्ति जुलाई 2023 में शुरू हुई और जनवरी 2026 में नागपुर से अतिरिक्त खेप भेजी गई. नवीनतम उन्नत संस्करणों की मारक क्षमता 75 किलोमीटर तक बढ़ाई गई है.आर्मेनिया ने 8 से 12 भारतीय निर्मित Su-30MKI बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों की खरीद में भी रुचि दिखाई है, जिनका अनुमानित मूल्य लगभग 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. यह कदम अज़रबैजान द्वारा पाकिस्तान से चीन निर्मित JF-17 लड़ाकू विमानों की 4.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की खरीद के बाद सामने आया.

भारत-आर्मेनिया सहयोग का रणनीतिक गणित

यूरेशिया के बदलते परिदृश्य में भारत-आर्मेनिया संबंध रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बने हैं. पाकिस्तान-तुर्किये-अज़रबैजान धुरी के बीच यह सहयोग दक्षिण काकेशस में संतुलन और भारत की उपस्थिति सुदृढ़ करता है.भारत के रक्षा निर्यात का उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखना था. इसने आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच शांति प्रक्रिया के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ भी तैयार कीं. प्रारंभिक सुरक्षा चिंताओं से परे, यह रक्षा सहयोग अब व्यापक भू-राजनीतिक महत्व ग्रहण कर चुका है, क्योंकि दक्षिण काकेशस पुनः महाशक्ति प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बनता जा रहा है.आर्मेनिया-भारत रक्षा सहयोग दक्षिण काकेशस में शक्ति संतुलन बदल रहा है. यह साझेदारी यूरेशिया में भारत की उपस्थिति मजबूत कर उसे विश्वसनीय रक्षा निर्यातक और बहुध्रुवीय व्यवस्था के समर्थक रूप में स्थापित करती है.


अयजाज वानी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में फेलो हैं.

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Ayjaz Wani (Phd) is a Fellow in the Strategic Studies Programme at ORF. Based out of Mumbai, he tracks China’s relations with Central Asia, Pakistan and ...

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