Author : Omkar Sathe

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Published on Jun 20, 2024 Updated 0 Hours ago

एक ओर जहां दुनिया में सस्ते और मिलावटी शहद का बोलबाला है, वहीं दूसरी ओर न्यूजीलैंड उच्च गुणवत्ता वाले शहद का निर्यात करता है. इस रणनीति के कारण वह इस क्षेत्र में चीन का प्रतिस्पर्धी बन गया है.

कैसे एक छोटा सा देश शहद निर्यात में चीन का प्रतिस्पर्धी बन गया

पृष्ठभूमि

दुनिया में चीन शहद का सबसे बड़ा निर्यातक है. दूसरे नंबर पर आमतौर पर झट से ध्यान में आने वाले देश US, भारत या ब्राजील का नंबर नहीं आता. आम तौर पर जिस देश के पास सबसे ज़्यादा कृषियोग्य भूमि होती है, वहीं कृषि उपज का सबसे बड़ा निर्यातक भी होता है. लेकिन शहद के मामले में चीन का सबसे नज़दीकी प्रतिस्पर्धी न्यूजीलैंड हैं, जिसने 2022 में 265 मिलियन US$ का शहद निर्यात किया था. इसी अवधि में चीन ने कुल 277 मिलियन US$ मूल्य का शहद निर्यात किया था. ऐसे में साफ़ है कि शहद निर्यात के मामले में न्यूजीलैंड, चीन से थोड़ा ही पीछे रह गया है. निर्यात को लेकर आंकड़े भले ही एक समान दिखाई दे रहे हो, लेकिन दोनों की रणनीति में काफी अंतर है.

चीन सस्ती कीमत पर भारी मात्रा में शहद का निर्यात कर रहा है, वहीं न्यूजीलैंड लग्जरी यानी विशुद्ध शहद का कम मात्रा में निर्यात कर रहा है.


2022 में चीन ने 156,000 MT शहद का निर्यात किया था. इसका औसत मूल्य US $ 1.8/Kg रहा था. इसके विपरीत न्यूजीलैंड ने केवल 10,400 MT शहद का US $25.3/kg मूल्य के हिसाब से निर्यात किया था. इससे यह साफ़ हो जाता है कि चीनी शहद के मुकाबले न्यूजीलैंड अपना शहद 14 गुना ज़्यादा दाम पर बेच रहा है. अत: चीन सस्ती कीमत पर भारी मात्रा में शहद का निर्यात कर रहा है, वहीं न्यूजीलैंड लग्जरी यानी विशुद्ध शहद का कम मात्रा में निर्यात कर रहा है.

फिगर 1 : 2022 में शहद के निर्यात की मात्रा और औसत मूल्य.


जब शहद निर्यात की बात आती है तो न्यूजीलैंड हमेशा से ही इस मामले में शीर्ष पर नहीं रहा. 1993 में जब चीन 70 मिलियन US $ शहद का निर्यात कर रहा था तो न्यूजीलैंड केवल 3.8 मिलियन US $ शहद का निर्यात करता था. उस वक़्त भी न्यूजीलैंड का शहद चीनी शहद के मुकाबले तीन गुना अधिक कीमत पर बिकता था. लेकिन यह आज जिस मात्रा में  बिक रहा है उस वक्त यह मात्रा उसके आसपास भी नहीं थी.


प्रीमियमीकरण यानी गुणवत्तापूर्ण होने के मामले में न्यूजीलैंड को मिली सफ़लता को उसके एक प्रतिस्पर्धी अर्जेंटीना को मिली सफ़लता के साथ तुलना करके समझा जा सकता है. 1993 में शहद निर्यात के मामले में अर्जेंटीना दूसरे स्थान पर था. वह चीन के मुकाबले 1.25 गुना अधिक कीमत पर 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का शहद निर्यात करता था. लेकिन 2022 आते-आते अर्जेंटीना का चीन के मुकाबले प्रीमियम केवल 1.9 गुना बढ़ा, जबकि न्यूजीलैंड के प्रीमियम में 14 गुना की वृद्धि देखी गई. न्यूजीलैंड का सफ़ल प्रीमियमीकरण अनूठा है और इसकी वजह से ही उसके निर्यात मूल्य में 80 प्रतिशत का इज़ाफ़ा देखा गया है. न्यूजीलैंड सरकार की ओर से चलाई गई विभिन्न पहलों की वजह से भी टुकड़ों में बंटे इस उद्योग को आगे बढ़ने में सहायता मिली है.

फिगर : 2 शहद निर्यात के मामले में मात्रा और मूल्य का मूवमेंट यानी गति



स्रोत : वर्ल्ड इंटीग्रेटेड ट्रेड सॉल्यूशन के तहत देशों द्वारा प्राकृतिक शहद का निर्यात. 

 

न्यूजीलैंड सरकार की पहलों का अवलोकन 

भौगोलिक एडवांटेज का लाभ उठाना:

सन 1839 में न्यूजीलैंड का परिचय मधुमक्खियों से हुआ था. मधुमक्खियां, भोजन के लिए, लेप्टोस्पर्मम स्कोपेरियम अथवा मनुका, नामक पेड़ का उपयोग करती हैं. यह पेड़ केवल न्यूजीलैंड एवं ऑस्ट्रेलिया में ही पाया जाता है और यह वर्ष में केवल दो से छह सप्ताह के लिए ही खिलता है. ऐसे में मनुका का शहद एक बेहद दुर्लभ उत्पाद बन जाता है. इस दुर्लभता और इस उत्पाद की अनूठी विशेषताओं को लेकर आरंभिक जिज्ञासा ने 1980 और 1990 के दशकों में इसके निर्यात को शुरुआती सफ़लता दिलवाई. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में घरेलू उत्पाद को मिली सफ़लता ने सभी का ध्यान इस तरफ आकर्षित किया और बाद में विभिन्न सरकारी पहलों ने इसे और ज़्यादा प्रोत्साहित किया.

विनियमन:

न्यूजीलैंड ने शहद उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ‘स्टिक एंड कैरट’ का दृष्टिकोण अपनाया है. एक ओर इसके उत्पादन की प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जाती है. सभी बीकीपर्स यानी मधुमक्खियों के पालनकर्ताओं और मधुमक्खियों के बगीचों को सरकार के पास रजिस्टर होना अनिवार्य किया गया है. सरकार प्रत्येक बगीचे के रिकॉर्ड को कड़ाई से दर्ज़ करती है. इसके साथ ही शहद के हर बक्से के साथ एक यूनिक बीकीपर आइडेंटिफिकेशन अथवा ऐसा ही कोई संबंधित कोड होना अनिवार्य है ताकि इस बक्से पर हमेशा नज़र बनी रहे. इसके अलावा गुणवत्ता मानकों का सूक्ष्मता के साथ पालन करने वाले उत्पादक अपने उत्पाद को ‘मनुका शहद’ का नाम भी दे सकते है. शहद के कंसाइनमेंट में रखे बक्सों की प्रत्येक बैच को अधिकृत प्रयोगशाला में परखा जाता है. इन सारे बक्सों को चार रासायनिक मार्क्स यानी मापदंड और एक DNA परीक्षा से गुजरना होता है. चूंकि मनुका शहद को एक लक्ज़री उत्पाद माना जाता है, अत: इसकी गुणवत्ता पर कड़ी नज़र रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है. आमतौर पर सरकार की ओर से लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को ‘झंझट’ समझा जाता है, लेकिन इस मामले में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद का स्तर बनाए रखने के लिए इसका स्वागत ही किया जाएगा.

पुरस्कार: 

न्यूजीलैंड सरकार ने शहद उद्योग के बाज़ार को विकसित करने के लिए इस क्षेत्र के अनेक अहम खिलाड़ियों के साथ सक्रिय साझेदारी की है. अपने ‘ट्रेड एंड एंटरप्राइज’ यानी ‘व्यापार और उद्यम’ डिवीजन के माध्यम से सरकार ने 1990 के दशक में मनुका शहद के लिए अवसरों का पता लगाने के उद्देश्य से एक उद्योग संगठन के गठन में अहम भूमिका अदा की. अब इस संगठन को ‘द यूनिक मनुका फैक्टर हनी एसोसिएशन’ के नाम से पहचाना जाता है. इस संगठन ने अपना एक यूनिक मनुका फैक्टर यानी अनूठा मनुका मापदंड (UMF™) तय किया. इसका उपयोग क्वालिटी मार्क और रेटिंग के लिए किया जाता है. इसके मानक सरकार की ओर से तय न्यूनतम मानकों से अधिक ऊंचे निर्धारित किए गए हैं. जो उत्पादक इन मानकों पर खरा उतरने वाला शहद उत्पादित करते हैं वे अपने शहद की ब्रांडिंग के लिए UMF ट्रेडमार्क का उपयोग करते हुए सरकारी मार्केटिंग प्रोत्साहन कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं. 2011 में सरकार ने प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत एक बहुवर्षीय कार्यक्रम शुरू किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहद की उपज को बढ़ाने, आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने और इस उद्योग को अधिक वैज्ञानिक मॉडल की ओर ले जाना था. 2015 में न्यूजीलैंड सरकार ने इस उद्योग को ऑस्ट्रेलियाई उत्पादकों के ख़िलाफ़ एक कानूनी मामले को लड़ने में भी वित्तीय सहायता और समर्थन दिया था. यह मामला ऑस्ट्रेलियाई उत्पादकों की ओर से ‘मनुका हनी’ शब्द का उपयोग किए जाने को लेकर हुआ था. 

इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहद की उपज को बढ़ाने, आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने और इस उद्योग को अधिक वैज्ञानिक मॉडल की ओर ले जाना था. 

फिगर 3 : यूनिक मनुका फैक्टर

Amazon.com: New Zealand Honey Co.: (UMF) Unique Manuka Factor 

Unique Mānuka Factor (UMF) Grading System Explained | UMF™

स्रोत : यूनिक मनुका फैक्टर की अधिकृत वेबसाइट.

कड़ा अनुसंधान : 

इस उद्योग को मिलावट से बचाने के लिए सरकारी अनुदान पर होने वाले अनुसंधान ने मनुका शहद को प्रमाणित करने के लिए विशिष्ठ मानकों की पहचान की. शहद में मिलावट एक निरंतर बनी हुई वैश्विक समस्या है. इसे देखते हुए उत्पाद की छवि और गुणवत्ता को बनाए रखते हुए शहद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. न्यूजीलैंड की मिनिस्ट्री ऑफ़ प्राइमरी स्टैंडर्ड्‌स ने एक तीन वर्षीय वैज्ञानिक कार्यक्रम शुरू किया, जिसके तहत शुद्ध मनुका शहद की पहचान करने के लिए एक कसौटी विकसित की गई. इस मंत्रालय ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सलाह लेकर 7 उत्पादन वर्षों के दौरान 800 नमूनों का परीक्षण किया. इसके अलावा 700 पेड़ों की जांच के साथ ही एडवांस्ड स्टैटिस्टिकल मॉडल्स का उपयोग करते हुए मानकों की पहचान कर इन मानकों को विश्वसनीयता और सटीकता के लिए भी परखा गया. इसी अनुसंधान का परिणाम है कि आज हमें मानक-निर्धारित मनुका शहद उपलब्ध हो रहा है. वर्तमान सरकार के कुछ कार्यक्रमों में मनुका अनुसंधान में PhD-पात्र वैज्ञानिकों का प्रशिक्षण और विश्वविद्यालय स्तर पर होने वाले अनुसंधान प्रोजेक्ट्‌स को अनुदान देना शामिल हैं.

फिगर 4 : परीक्षण एवं अनुसंधान

स्रोत : परीक्षण, अनुसंधान

वैज्ञानिक अनुसंधान के अलावा विस्तृत मार्केट रिसर्च भी किया गया है. यह रिसर्च सरकार-उद्योग पार्टनरशिप के माध्यम से किया गया. इस रिसर्च ने ऐसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों को ख़ोजा, जिनकी ओर ज़्यादा ध्यान नहीं गया था, लेकिन वहां शहद की मांग को लेकर अपार संभावनाएं दिख रही थी. इसके साथ ही ‘प्रीमियम हनी’ सेगमेंट में संभावित प्रतिस्पर्धियों की भी पहचान की गई. निजी क्षेत्र की तर्ज़ पर ही इस रिसर्च ने ज़मीनी स्तर पर खुदरा क्षेत्र से जानकारी एकत्रित की. इसमें निर्यात बाज़ार में खुदरा स्तर पर मूल्य प्रीमियम और सुपरमार्केट्‌स में शेल्फ पर उपलब्ध शहद के बारे में जानकारी जुटाई गई. इसके अलावा इससे जुड़े उपभोगकर्ताओं में संभावित वृद्धि की संभावनाओं को भी तलाशा गया.

दीर्घावधि के प्रयास: 

मनुका प्लांटेशंस यानी मनुका बागीचों को दीर्घावधि तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए 2020 में सरकार की सहायता से मनुका चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया गया. भविष्य की ओर देखते हुए 2023-24 में सरकार ने एक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए भी अनुदान दिया. यह अनुदान न्यूजीलैंड के इस उद्योग को 2030 तक एक बिलियन अमेरिकी डॉलर्स तक पहुंचाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर दिया गया था.

 

निष्कर्ष 

एक ओर जहां दुनिया में सस्ते और मिलावटी शहद ने कब्ज़ा किया हुआ है, वहीं दूसरी ओर न्यूजीलैंड उच्च गुणवत्ता वाले शहद का निर्यात करता है. उसकी इस रणनीति ने उसे इस तथ्य के बावजूद चीन के साथ मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया है कि उसके पास एक प्रतिशत से भी कम कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है. टूकड़ों में बिखरे उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए न्यूजीलैंड की ओर से अपनाई गई रणनीतियों से सबक सीखा जा सकता है. टूकड़ों में बिखरे उद्योग को साझा ब्रांडिंग और निवेश की आवश्यकता होती है. न्यूजीलैंड सरकार ने ऐसे क्षेत्र में आक्रामक होकर निवेश किया जिसमें आरंभिक सफ़लता साफ़ दिखाई दे रही थी. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने अधिकांश पहल शुरू करने में उद्योग के लोगों को ही साथ में रखा है. इसमें लाइसेंसिंग, उद्योग के लिए ट्रेडमार्क तैयार करना, बाज़ार को लेकर अनुसंधान करना और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ विशिष्ठ बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ना शामिल हैं.

 

इसी तर्ज़ पर भारत के ऐसे क्षेत्रों, जहां निजी खिलाड़ी अपने स्तर पर निवेश करने जितने बड़े नहीं है, उन्हें इसी तरह का सहयोग मुहैया करवाया जा सकता है. इसके लिए इन उद्योगों के साथ साझेदारी की जा सकती है. उत्पाद की गुणवत्ता को तय कर इसे बनाए रखने और मौजूदा उद्योग को मानकों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने की दृष्टि से अनुसंधान और विकास में निवेश किया जाना आवश्यक है. अंत में उच्च-गुणवत्ता वाले उत्पादकों को रणनीतिक मार्केटिंग और ट्रेडमार्किंग के माध्यम से समर्थन दिया जाए तो इन उत्पादकों को दीर्घावधि में लाभ मिल सकता है. सरकार और उद्योग जगत के बीच नज़दीकी सहयोग का न्यूजीलैंड का मॉडल, अध्ययन और अनुपालन योग्य है. ऐसा होने पर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए यह मॉडल लाभदायक साबित हो सकता है. 

 


ओंकार साठे, CPC एनालिटिक्स में साझेदार हैं.

लेखक अनुसंधान और डाटा चित्रण में अथर्व शिरोड़े तथा ओवी करवा के सहयोग को स्वीकारते हुए आभार प्रकट करते हैं.

 

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