ईरान युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, तेल और गैस के संकट पर ही बात होती रही, लेकिन हीलियम की कमी और सेमीकंडक्टर सेक्टर के संकट पर किसी का ध्यान नहीं गया. लेख से समझिए कैसे यह सेमीकंडक्टर और टेक सप्लाई चेन को भी हिला रहा है.
कोविड-19 महामारी के समय से ही वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में दरारें दिखने लगीं थी. इसे व्यवस्थित किया ही जा रहा था कि अब ईरान युद्ध ने एक और संभावित संकट के बारे में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. ये संघर्ष धीरे-धीरे सेमीकंडक्टर उत्पादन प्रणाली के एक महत्वपूर्ण तत्व, हीलियम की कमी को बढ़ा रहा है. एआई डेटा सेंटर की बढ़ती मांग की वजह से पहले से ही मेमोरी चिप की कमी पैदा हो चुकी है. हालांकि, इनमें से हर एक कारक अपने आप में चिंता का विषय है, लेकिन इनका संयुक्त प्रभाव निकट भविष्य में सेमीकंडक्टर और व्यापक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है. यही वजह है कि अब आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत बनाने और इसमें विविधता लाने पर ज़ोर दिया जा रहा है.
सेमीकंडक्टर निर्माण में हीलियम एक अनिवार्य तत्व है, विशेष रूप से एचिंग प्रक्रिया के दौरान हीलियम पर बहुत ज़्यादा निर्भरता होती है. समय के साथ, इस निर्भरता ने सेमीकंडक्टर उद्योग को गैस का सबसे बड़ा वैश्विक उपभोक्ता बना दिया है. हालांकि, हीलियम मुख्य रूप से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट्स से अपशिष्ट गैस के रूप में प्राप्त होती है. क़तर तीन संयंत्रों के माध्यम से वैश्विक आपूर्ति का लगभग 34 प्रतिशत हीलियम मुहैया कराता है, जिनमें से दो एलएनजी बाई-प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से इसके परिवहन में बड़ा व्यवधान पैदा हो गया था. रही-सही कसर क़तर एनर्जी के रास लाफान औद्योगिक शहर पर ईरान के हमले ने पूरी कर दी. यहां विश्व की सबसे बड़ी एलएनजी निर्यात सुविधा थी, लेकिन ईरान के हमलों के कारण उत्पादन और शिपिंग लगभग ठप हो गई है. इससे भविष्य में वैश्विक हीलियम आपूर्ति के लिए गंभीर ख़तरा पैदा हो गया है.
चित्र 1: 2025 में हीलियम का वैश्विक उत्पादन (मिलियन क्यूबिक मीटर में)एआई डेटा सेंटर की बढ़ती मांग की वजह से पहले से ही मेमोरी चिप की कमी पैदा हो चुकी है. हालांकि, इनमें से हर एक कारक अपने आप में चिंता का विषय है, लेकिन इनका संयुक्त प्रभाव निकट भविष्य में सेमीकंडक्टर और व्यापक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है.

स्रोत: रॉयटर्स
हालांकि, हीलियम की मौजूदा कीमतें पहले ही काफ़ी बढ़ चुकी हैं, लेकिन ये तत्काल चिंता का विषय नहीं है, क्योंकि उद्योग मुख्य रूप से दीर्घकालिक अनुबंधों पर काम करता है. इसके अलावा, पिछले साल हीलियम की अतिरिक्त आपूर्ति अल्पकालिक झटकों से बचाव का काम कर रही है. हालांकि, लंबे समय तक कमी रहने पर आपूर्तिकर्ताओं को अपने अनुबंधित ग्राहकों के लिए अप्रत्याशित रुकावट (फोर्स मेज्योर) घोषित करने के लिए मज़बूर होना पड़ सकता है. ये स्थिति सभी प्रमुख सेमीकंडक्टर निर्माताओं के लिए चिंता का विषय है, लेकिन ताइवान और दक्षिण कोरिया के लिए यह विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि ये दोनों देश अपनी अधिकांश हीलियम आपूर्ति खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों से हासिल करते हैं.
मेमोरी चिप्स सेमीकंडक्टर्स की सबसे महत्वपूर्ण श्रेणियों में से एक हैं, जो आधुनिक डिजिटल और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार हैं. हालांकि, दशकों से स्थापित आपूर्ति श्रृंखला मॉडल के कारण मेमोरी चिप निर्माण मुख्य रूप से तीन कंपनियों का कब्जा हो गया है: दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियां सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स, और अमेरिका स्थित माइक्रोन टेक्नोलॉजी. इन तीनों कंपनियां की डायनेमिक रैंडम-एक्सेस मेमोरी (डीआरएएम) के बाज़ार में 90 प्रतिशत से ज़्यादा की हिस्सेदारी है.
चित्र 2 : राजस्व के हिसाब से डीआरएएम के बाज़ार में हिस्सेदारी

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वैश्विक स्तर पर हाइपरस्केलर एआई डेटा केंद्रों द्वारा संचालित हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (एचबीएम) की बढ़ती मांग के कारण, सभी प्रमुख मेमोरी चिप निर्माताओं ने धीरे-धीरे एचबीएम उत्पादन की ओर रुख़ किया है. हालांकि, जटिल निर्माण प्रक्रिया की वजह से एचबीएम चिप का उत्पादन डीआरएएम की तुलना में कम है, लेकिन इसके विस्तार से डीआरएएम की निर्माण क्षमता और दक्षता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. इस बदलाव के कारण स्मार्टफोन और पीसी जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक मेमोरी चिप्स की आपूर्ति श्रृंखला में बाधा उत्पन्न हो गई है. इसका नतीजा ये हुआ कि, डीआरएएम के स्टॉक में काफ़ी गिरावट आई है, और पिछले एक साल में इसकी कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है.
चित्र 3: इंवेन्ट्री स्तर पर डीआरएम की आपूर्ति में औसत कमी
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इसके अलावा, ये कमी एक व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक ज़ोखिम पैदा करती है. ये एआई हाइपरस्केलर्स द्वारा किए गए अरबों डॉलर के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को पटरी से उतारने का ख़तरा उत्पन्न करती है. सैमसंग और एसके हाइनिक्स दोनों ने मेमोरी चिप क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन एसके हाइनिक्स ने संकेत दिया है कि कम से कम 2027 तक ये कमी बनी रहने की आशंका है.
हालांकि, ऊपर बताए गए कारण ही सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप सेक्टर के बारे में चिंता करने के लिए काफ़ी हैं, लेकिन इनके परस्पर प्रभाव से निकट भविष्य में प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. इसका एक उदाहरण दक्षिण कोरिया में पहले से ही देखने को मिल रहा है, जहां 4 मार्च, 2026 को शेयर बाजार में 12 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जो कोरिया के इतिहास में सबसे बड़ी गिरावट है.
इस बीच, उद्योग अभी भी काफी हद तक लाभ-केंद्रित ऑफशोरिंग मॉडल की समस्या से जूझ रहा है. अभी इसमें मिल रही नाकामी को भविष्य की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को तैयार करते समय एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में लेना चाहिए.
दक्षिण कोरिया का उद्योग बहुत हद तक जीवाश्म ईंधन पर निर्भर है. इसमें सेमीकंडक्टर निर्माण भी शामिल है. दक्षिण कोरिया के कच्चे तेल का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात किया जाता है, वो भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते. सैमसंग और एसके हाइनिक्स की एचबीएम बाज़ार में 80 प्रतिशत और डीआरएएम बाज़ार में 70 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. ऐसे में किसी भी व्यवधान का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है. एआई हाइपरस्केलर्स के बढ़ते निवेश और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की लगातार बढ़ती मांग से ये ज़ोखिम और भी बढ़ गया है. आने वाले महीनों में हीलियम की संभावित कमी से स्थिति और भी बिगड़ सकती है. इससे वैश्विक मेमोरी चिप आपूर्ति में और भी बड़ा संकट पैदा हो सकता है.
कोविड-19 महामारी के कारण आपूर्ति में आई कमी ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया. हालांकि, इस तरह की कोशिशें पहले भी हो रहीं थीं, लेकिन इन्हें पूरी तरह से साकार होने में शायद अभी बहुत समय लगेगा. इस संक्रमण काल के दौरान, उद्योग आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले झटकों को झेलने के लिए तैयार नहीं हैं. फिर चाहे वे तकनीकी नवाचार से प्रेरित तेज़ी से बढ़ती मांग के कारण हों या महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों को बाधित करने वाले बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय संघर्षों के कारण.
ये संकट भारत जैसे उभरते विनिर्माण केंद्रों पर नई जिम्मेदारी डालता है, जिसने हाल ही में अमेरिकी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के साथ साझेदारी में अपनी पहली असेंबली, टेस्ट, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) सुविधा का उद्घाटन किया है.
वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के विकास के साथ इस उद्योग के नए खिलाड़ी भविष्य के झटकों और व्यवधानों से बाज़ारों को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इस बीच, उद्योग अभी भी काफी हद तक लाभ-केंद्रित ऑफशोरिंग मॉडल की समस्या से जूझ रहा है. अभी इसमें मिल रही नाकामी को भविष्य की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को तैयार करते समय एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में लेना चाहिए.
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Prateek Tripathi is an Associate Fellow at the Centre for Security, Strategy and Technology. His work focuses on an emerging technologies and deep tech including quantum ...
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