चंडीगढ़ की बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति लोगों को अपने घरों में पर्यटकों को ठहराकर कमाई करने का मौका देती है जिससे पर्यटन और रोजगार बढ़ सकते हैं. अगर नियम ठीक से लागू नहीं हुए तो पार्किंग, किराया और मोहल्लों की शांति जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं. जानिए कैसे.
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चंडीगढ़ प्रशासन ने हाल ही में "बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति" (B&B नीति) का मसौदे प्रकाशित किया है. इस नीति के मुताबिक होटल, मोटेल, गेस्ट हाउस, बोर्डिंग और लॉजिंग हाउस के अलावा अन्य प्रतिष्ठानों में भी मेहमानों को आवास और भोजन के विकल्प प्रदान किए जा सकते हैं. इस नीति में 'प्रतिष्ठान' को एक ऐसे पंजीकृत आवासीय परिसर के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां अतिथियों को पैसे के भुगतान के बदले ठहरने और भोजन की सुविधा दी जा सकती है.
जो मकान मालिक अपने घर में मेहमानों को ठहराने की इच्छा रखते हैं, उन्हें अपने परिसरों को प्रतिष्ठान के रूप में पंजीकृत कराना होगा. हर बेडरूम के साथ अटैच टॉयलेट, पर्याप्त जल आपूर्ति, हवा और रोशनी की उचित व्यवस्था और ज़रूरी फर्नीचर होना चाहिए. प्रतिष्ठान को पार्किंग सुविधा भी प्रदान करनी होगी. अगर प्रतिष्ठान इन सभी शर्तों को पूरा करता है तो सरकार की वर्गीकरण समिति सेवाओं के निरीक्षण और मूल्यांकन के एक महीने के भीतर पंजीकरण कर देगी.
पंजीकरण प्रमाण पत्र को प्रतिष्ठान में प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए, और मेहमानों को नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए. मकान मालिक को मेहमानों का रिकॉर्ड रखना चाहिए और 15 दिन में पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इसका ब्यौरा देना चाहिए.
नई नीति का मसौदा मकान मालिकों को इस बात से भी रोकता है कि वे किसी भी वाणिज्यिक गतिविधियों में शामिल न हों, जैसे कि पर्यटन और यात्रा, दर्शनीय स्थलों का भ्रमण, परिवहन, या घर के निवासियों के अलावा किसी और को भोजन दान करना.
इस नीति में मेहमानों की जिम्मेदारियों, शिकायत निवारण, और उन परिस्थितियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है, जिनके आधार पर पंजीकरण रद्द किया जा सकता है. हालांकि, प्रतिष्ठानों को लाइसेंस की ज़रूरत नहीं होगी और उन्हें व्यावसायिक इकाइयों के रूप में नहीं माना जाएगा.
चंडीगढ़ प्रशासन पहले भी ऐसी नीति बना चुका है. 2008 में उसने ऐसी नीति लागू की थी, लेकिन कई मकान मालिकों ने इसका दुरुपयोग कर अपने घरों को छोटे होटलों में बदल दिया था. आखिरकार प्रशासन को वो योजना को वापस लेनी पड़ी.
इस बार, चंडीगढ़ प्रशासन ने ज़्यादा स्पष्ट और विस्तृत नीति पेश की है, जिसमें कड़े नियंत्रण हैं. हर एक पक्ष के कर्तव्य और जिम्मेदारियां निर्धारित की गई है. इस मसौदे में मालिकों को रिसेप्शन खोलने से रोक दिया गया है, और परिसरों को हमेशा एक आवासीय संपत्ति का स्वरूप बनाए रखने की बात कही गई है. नई नीति का मसौदा मकान मालिकों को इस बात से भी रोकता है कि वे किसी भी वाणिज्यिक गतिविधियों में शामिल न हों, जैसे कि पर्यटन और यात्रा, दर्शनीय स्थलों का भ्रमण, परिवहन, या घर के निवासियों के अलावा किसी और को भोजन दान करना.
हालांकि, कुछ नागरिकों ने संशोधित नीति का विरोध किया है. उन्हें डर है कि पार्किंग सुविधा ना होने की वजह से पर्यटकों की गाड़ियां सड़क पर खड़ी हो जाएंगी. इससे आपातकालीन वाहनों का रास्ता रुकेगा. कई लोगों ने ये भी चेतावनी दी है कि इस नीति से अराजकता पैदा कर सकती है और निर्माण उल्लंघनों को प्रोत्साहित कर सकती है.
इसके अलावा, लोगों को ये भी डर है कि नई बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया जाएगा, जिससे प्रतिष्ठान मालिक चुपचाप अपने आवास को होटलों में बदल देंगे. अधिकारियों को नियमित रूप से निरीक्षण करना होगा और अगर किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उस पर कड़ा जुर्माना और पंजीकरण रद्द करने जैसे कदम उठाने होंगे.
अधिकारियों की एक टीम मौके का मुआयना कर इसे सत्यापित करेगी. नई मसौदे में सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर भी ध्यान दिया गया है, क्योंकि यहां ठहरने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखना आवश्यक है. पर्यटकों के पहचान पत्र और दूसरी जानकारियों को एक डेटाबेस में अपलोड करना चाहिए, जिस तक अधिकारियों की आसान पहुंच हो.
इस नीति में परिसर के भीतर पार्किंग का सबूत देना अनिवार्य है. अधिकारियों की एक टीम मौके का मुआयना कर इसे सत्यापित करेगी. नई मसौदे में सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर भी ध्यान दिया गया है, क्योंकि यहां ठहरने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखना आवश्यक है. पर्यटकों के पहचान पत्र और दूसरी जानकारियों को एक डेटाबेस में अपलोड करना चाहिए, जिस तक अधिकारियों की आसान पहुंच हो.
बेड और ब्रेकफास्ट नीति सिर्फ चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है. दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, केरल, राजस्थान और गोवा के अलावा लद्दाख और अंडमान और निकोबार में भी इस तरह की नीति लागू है. वहां इसे “इंक्रेडिबल इंडिया बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना” नाम दिया गया है. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मध्य प्रदेश भी इसी तरह की योजनाएं चलाते हैं. वैश्विक स्तर पर, इसी अवधारणा का इस्तेमाल करने वाला एयरबीएनबी एक लोकप्रिय ऑनलाइन मार्केटप्लेस है. एयरबीएनबी आवास, होमस्टे और पर्यटन अनुभवों की सुविधा मुहैया कराता है.
बेड एंड ब्रेकफास्ट योजनाएं कई पर्यटकों के लिए आकर्षक बनी रहेंगी, लेकिन इस नीति को सख्ती से नियंत्रित करने की आवश्यकता है. इस बात पर भी ध्यान देना ज़रूरी है कि इससे किराये के बाज़ार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
ऐसे योजनाओं ने वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता हासिल की है. बेड एंड ब्रेकफास्ट का मुख्य आकर्षण इसका लचीलापन, लंबी अवधि के ठहरने के लिए अपेक्षाकृत कम लागत, और घर जैसा माहौल अधिक व्यक्तिगत आवासीय वातावरण में निहित है. उदाहरण के लिए, मान लीजिए कोई परिवार वार्षिक मिलन समारोह के लिए यात्रा कर रहा हो, परिवार में बुजुर्ग और बच्चे भी हों. ऐसे में कोई होटल इस परिवार को विशेष साझा क्षेत्र प्रदान नहीं कर सकता. अगर ये परिवार लंबे समय तक ठहरना चाहता है, तो होटल बेहद महंगे हो सकते हैं. इसकी तुलना में बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना वाले घर पसंदीदा भोजन, अतिरिक्त मदद, गोपनीयता और अधिक आरामदायक वातावरण दे सकते हैं. ऐसे सुविधाएं उन परिवारों के लिए और भी ज़रूरी हैं, जो डॉक्टर की सलाह पर किसी शहर का दौरा कर रहे हैं. ऐसे मौकों पर अक्सर लंबे समय तक ठहराव और लगातार देखभाल की आवश्यकता होती है. ऐसे मामलों में, बेड एंड ब्रेकफास्ट आवास ज़्यादा व्यावहारिक विकल्प प्रदान करते हैं. घर के मालिकों के लिए भी ये वैकल्पिक आय का स्रोत साबित हो सकते हैं.
हालांकि, बेड एंड ब्रेकफास्ट योजनाओं के अपने नुकसान रहे हैं. एयरबीएनबी जैसे आवास मॉडल के खिलाफ़ कई प्रमुख यूरोपीय शहरों में विरोध प्रदर्शन देखे गए, जिनमें पेरिस, बार्सिलोना, मैड्रिड, माला और लंदन शामिल हैं. विरोध का कारण ये है कि इससे होने वाली किराये ने आवास संतुलन को प्रभावित किया. मकान मालिक इन्हें पारंपरिक दीर्घकालिक किरायों की तुलना में प्राथमिकता देने लगे. स्थानीय लोग उच्च किराए सहन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्हें उपनगरों की ओर धकेल दिया गया. नतीजतन, कई शहरों ने अल्पकालिक किरायों पर प्रतिबंध लगाया और बिना लाइसेंस लिए घर किराये पर देने वालों पर भारी जुर्माने लागू किया.
भारत के पर्यटन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी अपार संभावनाएं बनी हुई है, विशेष रूप से उभरते घरेलू और नए तरह का अनुभव लेने वाले पर्यटन के सेक्टर में. इस संदर्भ में, बेड एंड ब्रेकफास्ट योजनाएं कई पर्यटकों के लिए आकर्षक बनी रहेंगी, लेकिन इस नीति को सख्ती से नियंत्रित करने की आवश्यकता है. इस बात पर भी ध्यान देना ज़रूरी है कि इससे किराये के बाज़ार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
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Dr. Ramanath Jha is Distinguished Fellow at Observer Research Foundation, Mumbai. He works on urbanisation — urban sustainability, urban governance and urban planning. Dr. Jha belongs ...
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