सोचिए, एक ऐसी दवा जो अस्पताल में जान बचाती है लेकिन सड़क पर वही कुछ ही मिनटों में जान ले सकती है- इसी का नाम है फेंटानिल. अब संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसे सामूहिक विनाश के हथियार (WMD) मानते हुए ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को नया रूप दे दिया है- आखिर यह बदलाव क्या संकेत देता है, जानिए इस लेख में.
दिसंबर 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार ने एक नया निर्देश जारी किया, जिसमें फेंटानिल और उसके प्रीकर्सर (पूर्व-रसायनों) को सामूहिक विनाश के हथियार (WMD) के रूप में वर्गीकृत किया गया. यह दर्जा अब तक केवल परमाणु, जैविक या रासायनिक युद्ध में इस्तेमाल होने वाले एजेंटों को दिया जाता था. इस कार्यकारी आदेश के तहत फेंटानिल की तस्करी रोकने के लिए आतंकवाद-रोधी उपाय अपनाने की आवश्यकता बताई गई है, जैसे कड़ी कानूनी कार्रवाई, वित्तीय प्रतिबंध और फेंटानिल तस्करी समूहों के खिलाफ व्यापक खुफिया प्रयास.
इस आदेश के बाद, अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में उन जहाजों के खिलाफ कई घातक हमले किए, जिन पर ड्रग्स ले जाने का संदेह था. इन कार्रवाइयों का संबंध आंशिक रूप से अमेरिकी न्याय विभाग के ऑफिस ऑफ लीगल काउंसल द्वारा जारी एक गोपनीय कानूनी ज्ञापन से बताया जाता है. इस ज्ञापन के अनुसार, तस्करी से जुड़े समूहों और उन जहाजों को सैन्य हमले के लिए कानूनी रूप से उचित लक्ष्य माना जा सकता है. फेंटानिल को ‘रासायनिक हथियार’ मानने से लेकर नौसैनिक हमलों तक के फैसले दिखाते हैं कि अमेरिका अब ड्रग्स की समस्या को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से देखने लगा है.
इस निर्देश के बाद अमेरिका को आलोचना का सामना करना पड़ा है क्योंकि उसने वैश्विक सहमति के बिना ही फेंटानिल को रासायनिक हथियार घोषित कर दिया. इससे फेंटानिल तस्करी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई मुख्यतः केवल अमेरिका तक सीमित हो जाती है और अन्य देशों की भूमिका सीमित हो जाती है, जो वैश्विक अप्रसार व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती है. इससे पहले WMD की श्रेणी में वे पदार्थ शामिल थे जो युद्ध या आतंकवादी हमलों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाते हैं, जैसे सारिन या एंथ्रेक्स न कि वे पदार्थ जो नशे की लत से जुड़े लोगों तक तस्करी के जरिए पहुँचते हैं.
ज्ञापन के अनुसार, तस्करी से जुड़े समूहों और उन जहाजों को सैन्य हमले के लिए कानूनी रूप से उचित लक्ष्य माना जा सकता है. फेंटानिल को ‘रासायनिक हथियार’ मानने से लेकर नौसैनिक हमलों तक के फैसले दिखाते हैं कि अमेरिका अब ड्रग्स की समस्या को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से देखने लगा है.
अमेरिका में ओवरडोज से होने वाली मौतों में 60 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए फेंटानिल जिम्मेदार है. अधिकारियों ने 2021 से 2024 के बीच लगभग 1,30,000 पाउंड अवैध फेंटानिल, 3,27,000 पाउंड फेंटानिल प्रीकर्सर रसायन और इस दवा के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले लगभग 9,900 उपकरण जब्त किए हैं. वैज्ञानिक दृष्टि से फेंटानिल की घातक क्षमता निर्विवाद है, क्योंकि बहुत कम मात्रा में भी यह अत्यंत घातक हो सकता है. इससे जनस्वास्थ्य, अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों के बीच कानूनी जिम्मेदारी का सवाल जटिल हो जाता है.
इससे पहले WMD की श्रेणी में वे पदार्थ शामिल थे जो युद्ध या आतंकवादी हमलों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाता हैं जैसे सारिन या एंथ्रेक्स कि वे जो नशे के आदी लोगों तक तस्करी से पहुँचते हैं.
सितंबर 2025 से अब तक अमेरिकी सेना कैरिबियन सागर, प्रशांत महासागर और अन्य अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में जहाजों के खिलाफ कम से कम नौ घातक हमले कर चुकी है. अमेरिका का दावा है कि ये कार्रवाई ड्रग तस्करी, विशेष रूप से कार्टेल से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई. एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इन हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है. अमेरिकी अधिकारियों ने इन कार्रवाइयों को ‘नार्को-आतंकवादियों’ के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा बताया और कहा कि सामान्य कानून-प्रवर्तन उपाय घातक सिंथेटिक ड्रग्स के प्रवाह को रोकने में विफल रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी एजेंसियों की कुछ रिपोर्टें इस दावे के विपरीत भी सामने आई हैं, जिनमें रिकॉर्ड स्तर पर कोकीन की जब्ती का उल्लेख है, लेकिन इसे WMD स्तर के खतरे से नहीं जोड़ा गया.
इसके अलावा, न्याय विभाग के ऑफिस ऑफ लीगल काउंसिल के एक गुप्त कानूनी ज्ञापन पर भी सवाल उठे हैं, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि अवैध ड्रग्स से होने वाले नुकसान और कुछ कार्टेल को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के आधार पर तस्करी से जुड़े जहाजों पर घातक हमले उचित हो सकते हैं. हालांकि इस ज्ञापन का पूरा पाठ सार्वजनिक नहीं किया गया है, और नागरिक स्वतंत्रता संगठनों ने इसे सार्वजनिक करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि समुद्र में संदिग्ध तस्करों पर लक्षित घातक हमले अंतरराष्ट्रीय कानून या सशस्त्र संघर्ष के कानून के तहत उचित नहीं ठहराए जा सकते, जब तक कोई वास्तविक खतरा मौजूद न हो. केवल मादक पदार्थों की तस्करी को सशस्त्र संघर्ष नहीं माना जाता. इसी बात को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने भी दोहराया और ऐसे हमलों को रोकने की अपील की, यह कहते हुए कि वे बल के उपयोग और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं.
अमेरिका का दावा है कि ये कार्रवाई ड्रग तस्करी, विशेष रूप से कार्टेल से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई. एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इन हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है. अमेरिकी अधिकारियों ने इन कार्रवाइयों को ‘नार्को-आतंकवादियों’ के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा बताया और कहा कि सामान्य कानून-प्रवर्तन उपाय घातक सिंथेटिक ड्रग्स के प्रवाह को रोकने में विफल रहे हैं.
आलोचकों का कहना है कि आम तौर पर राष्ट्र-राज्य खुले समुद्र में जहाजों के खिलाफ बल का प्रयोग केवल आत्मरक्षा में या सुरक्षा परिषद की विशेष अनुमति से ही कर सकते हैं, जो ड्रग तस्करी के मामलों में लागू नहीं होता. इस दृष्टि से ‘सशस्त्र संघर्ष’ की परिभाषा को बढ़ाकर ड्रग कार्टेल या तस्करों को शामिल करना एक खतरनाक उदाहरण स्थापित कर सकता है, जिसमें आपराधिक कानून के प्रवर्तन और सैन्य बल के उपयोग को एक साथ मिला दिया जाएगा.
फेंटानिल को WMD घोषित करने और कथित तस्करों के खिलाफ घातक नौसैनिक हमलों की वकालत करके सरकार ने एक ऐसी समस्या को-जो पहले जनस्वास्थ्य और कानून-प्रवर्तन से जुड़ी थी-अब सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे के रूप में पेश किया है. इस नई परिभाषा के व्यापक प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें बजट आवंटन, वैश्विक सहयोग और ड्रग नियंत्रण नीतियाँ शामिल हैं.
समुद्र में कानून लागू करने के लिए सेना का इस्तेमाल बढ़ने से यह सवाल उठ रहा है कि इसके साफ नियम क्या हैं’ अगर केवल शक के आधार पर जहाजों पर हमला किया जाए, तो आगे चलकर इसका गलत उपयोग भी हो सकता है. दूसरी ओर, सरकार ने हमलों के कानूनी कारण पूरी तरह नहीं बताए हैं, इसलिए नागरिक अधिकार संगठनों ने अदालत में मामला दायर किया है, ताकि लोगों को सच्चाई पता चल सके.
कई विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी को सैन्य बल के उपयोग का आधार मानने से मध्य और दक्षिण अमेरिका में लंबे समय से बने सहयोगी ढाँचे-जिनमें रोकथाम, अभियोजन और स्वास्थ्य-केंद्रित रणनीतियाँ शामिल हैं-को चुनौती मिल सकती है.
इस पारदर्शिता की कमी के कारण बंदी बनाए गए लोगों और बचे हुए लोगों की स्थिति भी अनिश्चित हो गई है, क्योंकि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें युद्ध के संदिग्ध, आतंकवादी या सामान्य आरोपी के रूप में देखा जा रहा है. इस तरह की नीतियों को लेकर सहयोगी देशों और क्षेत्रीय सरकारों में भी चिंता बढ़ी है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी को सैन्य बल के उपयोग का आधार मानने से मध्य और दक्षिण अमेरिका में लंबे समय से बने सहयोगी ढाँचे-जिनमें रोकथाम, अभियोजन और स्वास्थ्य-केंद्रित रणनीतियाँ शामिल हैं-को चुनौती मिल सकती है.
अमेरिका का हालिया कदम काफी विवादास्पद माना जा रहा है, क्योंकि यह वास्तव में मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के बजाय संदिग्ध ड्रग-तस्करी वाले जहाजों पर समुद्र में हमलों को उचित ठहराता हुआ दिखाई देता है. इसके कानूनी प्रभावों पर गंभीर विवाद हुआ है, और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है, खासकर उन्हें बिना अधिकार के की गई कार्रवाई या अनधिकृत हत्या के रूप में देखते हुए.
फेंटानिल को लेकर सेना के इस्तेमाल से कानून, स्वास्थ्य और सुरक्षा के बीच फर्क कम स्पष्ट हो गया है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय नियमों और कई देशों पर पड़ सकता है. आगे यह देखना होगा कि दूसरे देश भी ऐसा करते हैं या नहीं और कानून की सीमाएं कितनी मजबूत रहती हैं.
श्राविष्ठा अजयकुमार सेंटर फॉर सिक्योरिटी, स्ट्रेटेजी एंड टेक्नोलॉजी में एसोसिएट फेलो हैं.
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Shravishtha Ajaykumar is an Associate Fellow at the Centre for Security, Strategy, and Technology. Her research areas include Chemical, Biological, Radiological, and Nuclear (CBRN) strategy ...
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