Expert Speak Raisina Debates
Published on Mar 31, 2026 Updated 0 Hours ago

भारत हर साल अरबों डॉलर के सेमीकंडक्टर आयात करता है, ऐसे में ध्रुव64 स्वदेशी चिप बनाकर इस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक पहल है. जानिए देश में ही डिजाइन किया गया यह माइक्रोप्रोसेसर देश को किस तरह से आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम है.

ध्रुव64: क्या है, क्यों बना और कैसे करेगा असर...पढ़ें सबकुछ

सेमीकंडक्टर आधुनिक प्रौद्योगिकी के ‘माइटी माइ्ट्स‘ हैं, जो स्मार्ट ग्रिड से लेकर परिवहन, संचार और रक्षा तकनीकों तक कई प्रणालियों को संचालित करते हैं. वर्तमान में चिप डिज़ाइन में अमेरिका अग्रणी है, जो वैश्विक बाज़ार राजस्व का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रखता है; ताइवान फाउंड्री संचालन में लगभग 60 प्रतिशत वैश्विक फाउंड्री राजस्व के साथ प्रभुत्व रखता है; और चीन सक्रिय रूप से अपने दायरे का विस्तार कर रहा है चीन ने 2025 तक 70 प्रतिशत आत्मनिर्भरता का लक्ष्य रखा है और 2030 तक वैश्विक फाउंड्री क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हासिल करने का अनुमान है.

भारत, विश्व के लगभग 20 प्रतिशत चिप्स का उपभोग करने के बावजूद, अभी भी काफी हद तक आयात पर निर्भर है, जहाँ 2024 में आयात लगभग 24 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया. इस अंतर को कम करने और स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए भारत ने कई रणनीतिक पहल शुरू की हैं. ध्रुव64 इस क्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो इस अंतर को पाटने और चिप आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और कदम दर्शाता है.

DHRUV64: स्वदेशी छलांग

DHRUV64 एक 1.0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे सी-डैक (C-DAC) - सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग - द्वारा देश में ही डिज़ाइन किया गया है, जो भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है. RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित यह माइक्रोप्रोसेसर 5G अवसंरचना, ऑटोमोबाइल प्रणालियों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक स्वचालन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सहित कई क्षेत्रों में उपयोग के लिए उपयुक्त है.

यह पूरी तरह स्वदेशी होने के कारण इसमें किसी भी प्रकार के छिपे हुए स्पाइवेयर या बैकडोर की संभावना कम हो जाती है-जो उन क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जहाँ सुरक्षा अनिवार्य है. ये विशेषताएँ ध्रुव64 को एक सहयोगी प्लेटफ़ॉर्म के रूप में सक्षम बनाती हैं, जो स्टार्टअप, अकादमिक जगत और उद्योग को विदेशी IP कोर पर निर्भर हुए बिना भारतीय कंप्यूटिंग उत्पाद विकसित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है.

इस नवाचार को महत्वपूर्ण बनाने वाले कई कारण हैं. इसका RISC-V आर्किटेक्चर ओपन-सोर्स और रॉयल्टी-फ्री है, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन के दौरान लाइसेंसिंग लागत समाप्त हो जाती है और यह वैश्विक समकक्षों की तुलना में अधिक किफायती चिप बन सकता है. साथ ही, यह पूरी तरह स्वदेशी होने के कारण इसमें किसी भी प्रकार के छिपे हुए स्पाइवेयर या बैकडोर की संभावना कम हो जाती है-जो उन क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जहाँ सुरक्षा अनिवार्य है. ये विशेषताएँ ध्रुव64 को एक सहयोगी प्लेटफ़ॉर्म के रूप में सक्षम बनाती हैं, जो स्टार्टअप, अकादमिक जगत और उद्योग को विदेशी IP कोर पर निर्भर हुए बिना भारतीय कंप्यूटिंग उत्पाद विकसित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है.

ध्रुव64 की यह उपलब्धि निरंतर और क्रमिक प्रगति का परिणाम है. यह यात्रा 2018 में शक्ति और AJIT से शुरू हुई, एम्बेडेड सिस्टम के लिए THEJAS32 तक आगे बढ़ी, और 2025 में स्पेस-ग्रेड विक्रम तथा औद्योगिक THEJAS64 तक पहुँची. अब DHRUV64 इस श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण चरण है, जबकि अगली पीढ़ी के धनुष प्रोसेसर पहले से ही विकासाधीन हैं.

वैश्विक परिदृश्य

आज दुनिया का सेमीकंडक्टर सिस्टम मुख्यतः तीन बड़ी ताकतों के आसपास बना है, और हर एक की अपनी अलग विशेषता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका: डिज़ाइन में नेतृत्व

संयुक्त राज्य अमेरिका बाज़ार हिस्सेदारी, डिज़ाइन क्षमता और तकनीकी नेतृत्व के मामले में दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर शक्ति है. 2024 में इसका वैश्विक राजस्व 50 प्रतिशत से अधिक रहा, जो लगभग 318 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है. हालांकि, घरेलू निर्माण क्षमता 1990 में 37 प्रतिशत से घटकर 2022 तक केवल 10 प्रतिशत रह गई है. इसे सुधारने के लिए अमेरिका ने 52.7 अरब अमेरिकी डॉलर के बजट के साथ चिप्स और विज्ञान अधिनियम लागू किया. हाल ही में 2025 के AI Action Plan के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस उद्योग को देश में वापस लाने के लिए CHIPS Act को ‘वेंचर-कैपिटल शैली‘ के दृष्टिकोण में ढालने की बात कही है, जिसमें इक्विटी या राजस्व साझेदारी शामिल हो सकती है. इससे स्पष्ट है कि औद्योगिक नीति अब अधिक प्रतिफल-केंद्रित और लेन-देन आधारित बन रही है, साथ ही घरेलू चिप निर्माण और डिज़ाइन नेतृत्व को बनाए रखने का प्रयास जारी है.

ताइवान: निर्माण में प्रभुत्व

ताइवान वैश्विक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में एक अत्यंत रणनीतिक स्थान रखता है. यह वैश्विक फाउंड्री राजस्व का 60 प्रतिशत से अधिक और अग्रणी चिप उत्पादन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नियंत्रित करता है. 2024 में इसके सेमीकंडक्टर बिक्री से लगभग 165 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न हुआ. औद्योगिक नवाचार अधिनियम के तहत सरकारी समर्थन, कर छूट और खर्च की प्रतिपूर्ति जैसे उपाय ताइवान की इस बढ़त को मजबूत करते हैं. साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर तकनीकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है और विदेशी संस्थाओं को व्यापारिक रहस्यों के अनधिकृत खुलासे पर कड़ी सज़ा दी जाती है.

संयुक्त राज्य अमेरिका बाज़ार हिस्सेदारी, डिज़ाइन क्षमता और तकनीकी नेतृत्व के मामले में दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर शक्ति है. 2024 में इसका वैश्विक राजस्व 50 प्रतिशत से अधिक रहा, जो लगभग 318 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है.

चीन: पैमाने का विस्तार

चीन का ध्यान उत्पादन की मात्रा बढ़ाने और आत्मनिर्भरता हासिल करने पर है. राज्य-समर्थित नीतियों-जैसे ‘908 परियोजना’ से लेकर National IC Industry Investment Fund तक-के माध्यम से चीन अब वैश्विक उत्पादन का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा रखता है. ‘चीन में निर्मित 2025’ नीति के तहत चीन 70 प्रतिशत सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जबकि राष्ट्रीय आईसी उद्योग निवेश कोष ने चिप आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए 47 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश प्रदान किया है. यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका के निर्यात प्रतिबंधों के बीच चीन अपने AI क्षेत्र का समर्थन करने के लिए 2026 तक उन्नत चिप उत्पादन को काफी बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें प्रति माह 100,000 वेफर का लक्ष्य शामिल है. चीनी फैब्स वैश्विक लेगेसी-नोड बाज़ार में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं और निर्माण क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं. वर्तमान वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य के बीच भारत का बाहरी निर्भरता को कम करने का लक्ष्य, ध्रुव64 जैसे स्वदेशी नवाचारों के महत्व को और अधिक स्पष्ट करता है.

राष्ट्रीय मिशनों के साथ समन्वय

DHRUV64 भारत के सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता के लक्ष्य और व्यापक आत्मनिर्भर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. पहले की नीतिगत और कार्यक्रमगत पहलें, विशेष रूप से भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), इस महत्वाकांक्षा के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर चुकी हैं. 76,000 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान के साथ इस मिशन ने घरेलू निर्माण क्षमता को प्रोत्साहित किया और एक प्रारंभिक डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने में मदद की.

यह यात्रा 2018 में शक्ति और AJIT से शुरू हुई, एम्बेडेड सिस्टम के लिए THEJAS32 तक आगे बढ़ी, और 2025 में स्पेस-ग्रेड विक्रम तथा औद्योगिक THEJAS64 तक पहुँची. अब DHRUV64 इस श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण चरण है, जबकि अगली पीढ़ी के धनुष प्रोसेसर पहले से ही विकासाधीन हैं.

इसी आधार पर आगे बढ़ते हुए आईएसएम 2.0, जिसकी प्रारंभिक राशि 1,000 करोड़ रुपये है, सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (IP) के निर्माण पर केंद्रित रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है. हालाँकि, इस विस्तार के लिए एक मजबूत निर्माण आधार आवश्यक है. इस चुनौती से निपटने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) महत्वपूर्ण घटकों और पूंजीगत उपकरणों के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है, जिससे स्थानीय हार्डवेयर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सके. यह योजना भारत सेमीकंडक्टर मिशन के साथ मिलकर घरेलू सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूत करने में सहयोग करती है.

रणनीतिक प्राथमिकताएँ

भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ाने की महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिए संरचनात्मक और परिचालन चुनौतियों को दूर कर डिज़ाइन को बड़े पैमाने के उत्पादन में बदलना आवश्यक है. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी पहलों ने एक मजबूत नीतिगत आधार तैयार किया है, फिर भी उन्नत चिप्स के निर्माण (फैब्रिकेशन) के लिए भारत अभी भी विदेशी फाउंड्री पर निर्भर है. भारत को फैब्रिकेशन इकाइयों के संचालन और विस्तार के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन की भी गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है. ध्रुव64 भारत की सिलिकॉन यात्रा में स्वदेशी चिप डिज़ाइन की वास्तविक उपलब्धि और नवाचार का मार्ग दिखाता है.

इन चुनौतियों को दूर करने के लिए भारत पहले से ही अपनी सेमीकंडक्टर निर्माण अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लक्षित कदम उठा रहा है. हाल ही में माइक्रोन की सेमीकंडक्टर इकाई का उद्घाटन घरेलू असेंबली और परीक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है. इसी तरह एचसीएल-फॉक्सकॉन साझेदारी वैश्विक सहयोग के माध्यम से चिप आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को दर्शाती है. यह गति आगे टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की रणनीतिक साझेदारियों से और मजबूत होती है-जैसे इंटेल के साथ सिलिकॉन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए, ROHM के साथ पावर सेमीकंडक्टर के लिए, और क्वालकॉम के साथ उन्नत ऑटोमोटिव मॉड्यूल के लिए-जिनका उद्देश्य सेमीकंडक्टर निर्माण और आपूर्ति-श्रृंखला के विभिन्न पहलुओं को मजबूत करना है. सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कार्यबल विकास में निवेश और फैब्स, उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विशेषज्ञों का प्रशिक्षण आवश्यक है. इन उपायों से भारत मजबूत चिप डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धी निर्माण केंद्र बना सकता है; ध्रुव64 स्वदेशी चिप नवाचार की वास्तविक क्षमता और भविष्य की प्रगति का संकेत देता है.


देबज्योति चक्रवर्ती ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर डिजिटल सोसाइटीज में रिसर्च असिस्टेंट हैं.

खुश आडवाणी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर डिजिटल सोसाइटीज में रिसर्च इंटर्न हैं.

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.