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Published on Dec 23, 2025 Updated 7 Days ago

मालदीव में चीन का प्रभाव अब सिर्फ़ बड़े कर्ज़ तक नहीं रहा. अनुदान, ठेके और व्यापारिक संबंधों के ज़रिए बीजिंग लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है. इसका मतलब है कि देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा धीरे-धीरे बदल रही है.

मालदीव में चीन: कर्ज़, निवेश और रणनीतिक मौजूदगी

30 नवंबर को मालदीव सरकार द्वारा रसमाले परियोजना को तेज़ किए जाने का निर्णय केवल एक बड़े विकास कार्य की घोषणा भर नहीं है बल्कि यह राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के कार्यकाल में मालदीव की बदलती आर्थिक और रणनीतिक दिशा को भी दर्शाता है. रसमाले एक व्यापक भूमि पुनर्भरण परियोजना है जिसका उद्देश्य शहरी विस्तार, आवास और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए नई ज़मीन तैयार करना है और इसके अगले चरणों में बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए चीन के सहयोग की भूमिका अहम मानी जा रही है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मालदीव गंभीर आर्थिक दबावों, बढ़ते कर्ज़ और सीमित वित्तीय विकल्पों का सामना कर रहा है.

चीन कर्ज़ से आगे बढ़कर अनुदान, ठेकों और व्यापार के ज़रिए मालदीव में प्रभाव बढ़ा रहा है.

इस पृष्ठभूमि में चीन की रणनीति भी स्पष्ट रूप से बदली हुई दिखाई देती है. अब बीजिंग नए कर्ज़ देने या विशाल और पूंजी-प्रधान बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में सीधे निवेश करने से अपेक्षाकृत परहेज़ कर रहा है. इसके बजाय वह मौजूदा ऋणों के पुनर्गठन, अनुदान और दान के माध्यम से सहायता देने, चीनी कंपनियों के लिए व्यावसायिक ठेके सुरक्षित करने और दोनों देशों के बीच आर्थिक व वित्तीय संबंधों को और गहरा करने पर ज़ोर दे रहा है. यह दृष्टिकोण चीन को कम जोखिम के साथ प्रभाव बनाए रखने की अनुमति देता है जबकि मालदीव को तत्काल वित्तीय राहत और विकास कार्यों के लिए संसाधन मिलते हैं.

इन विभिन्न उपायों के ज़रिये, भले ही चीन की प्रत्यक्ष ऋण सहायता सीमित हो गई हो, बीजिंग मालदीव में अपनी मौजूदगी और प्रभाव को लगातार मजबूत कर रहा है. अनुदानों, ठेकों और वित्तीय जुड़ाव के माध्यम से वह देश की विकास प्रक्रिया में गहराई से जुड़ता जा रहा है जिससे मालदीव के लिए चीन से दूरी बनाना या विकल्प तलाशना भविष्य में और कठिन हो सकता है. इस तरह, मौजूदा रणनीति मालदीव को दीर्घकालिक रूप से चीन के साथ आर्थिक निर्भरता के रिश्ते में बाँधने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई देती है.


मालदीव का चीनी कर्ज़

राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन (2013–2018) के कार्यकाल में मालदीव में चीन की मौजूदगी और प्रभाव में काफ़ी वृद्धि हुई, जब सरकार ने बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए ऋण और राज्य गारंटी के रूप में चीन से लगभग 1.4 से 3.1 अरब अमेरिकी डॉलर उधार लिए. कोविड-19 महामारी के समय तक, इब्राहिम सोलिह के नेतृत्व वाली अगली सरकार ने इन चीनी ऋणों का भुगतान शुरू कर दिया था. नवंबर 2023 में जब मोहम्मद मुइज़्ज़ू सत्ता में आए तो उन्हें कमजोर आर्थिक प्रदर्शन और भारी कर्ज़ से जूझती अर्थव्यवस्था विरासत में मिली. बीजिंग के साथ अपने करीबी संबंधों के आधार पर मुइज़्ज़ू ने कार्यभार संभालने के बाद ऋण पुनर्गठन और अतिरिक्त ऋण की मांग की जबकि आज मालदीव का कुल कर्ज़ उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 131 प्रतिशत से भी अधिक हो चुका है.

प्रत्यक्ष ऋण घटने के बावजूद चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है.

हालाँकि बीजिंग ने आगे नए ऋण देने से साफ़ इनकार कर दिया. इसके पीछे कई आपस में जुड़े कारण थे- चीन की नीति में बड़े और महंगे बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट्स के बजाय अपेक्षाकृत छोटी, कम जोखिम वाली और तुरंत असर दिखाने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देना, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की वैश्विक रफ्तार का धीमा पड़ना तथा राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू और मालदीव की आर्थिक स्थिति को लेकर सीमित भरोसा. इसके अलावा, श्रीलंका जैसे देशों में ऋण पुनर्गठन के दौरान चीन को हुए वित्तीय नुकसान और ‘ऋण-जाल’ की छवि से जुड़ी चिंताओं ने भी बीजिंग को सतर्क बना दिया. इन्हीं परिस्थितियों में चीन का ध्यान नए ऋण उपलब्ध कराने के बजाय मौजूदा कर्ज़ के पुनर्गठन और प्रबंधन पर केंद्रित हो गया. जनवरी 2024 में मुइज़्ज़ू की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन ने ऋण राहत देने पर सैद्धांतिक सहमति तो जताई लेकिन शर्तों और प्रक्रियाओं को लेकर बातचीत लंबी खिंचती रही. इस बीच मालदीव सरकार अपने चीनी ऋणों का नियमित भुगतान करती रही. अंततः अक्टूबर 2025 में एक द्विपक्षीय ऋण-राहत समझौता तय हुआ, जो चीनी ऋणों को लगभग पाँच वर्षों के लिए स्थगित करने का संकेत देता है और इस तरह तत्काल दबाव को कम करते हुए कर्ज़ का वास्तविक बोझ आने वाली सरकार पर स्थानांतरित कर देता है.

अनुदान और दान

नए ऋण न मिलने की स्थिति में चीन अनुदान और दान के माध्यम से मालदीव में अपनी आर्थिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है. जनवरी 2024 में चीन ने 13 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अनुदान का वादा किया, जिसका बड़ा हिस्सा माले और विलिमाले में सड़क निर्माण पर खर्च हुआ. 2025 के बजट के अनुसार, चीन 2023 और 2024 में मालदीव के लिए अनुदान का प्रमुख स्रोत रहा और 2026 में भी लगभग 81 प्रतिशत द्विपक्षीय अनुदान चीन से आने का अनुमान है. पिछले दो वर्षों में बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बढ़े चीनी अनुदानों ने न केवल चीन का प्रभाव बढ़ाया है बल्कि द्वीपीय समुदायों की आवश्यकताओं को पूरा कर सरकार के वादों को भी बल दिया है.

2025 में चीनी ऋण पाँच वर्षों के लिए स्थगित किए गए.

ठेके हासिल करना 

मालदीव की विभिन्न विकास परियोजनाओं में CMEC, CRCC और CHEC जैसी कई चीनी राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियाँ ठेकेदार के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. पहले के चरणों में चीन न केवल इन परियोजनाओं का वित्तपोषण करता था बल्कि उनके निर्माण और कई मामलों में संचालन की ज़िम्मेदारी भी उसी की होती थी. इसके विपरीत, वर्तमान दौर में चीनी कंपनियों की भागीदारी मुख्यतः निर्माण कार्यों तक सीमित हो गई है जबकि परियोजनाओं के लिए धन की व्यवस्था और उनके दीर्घकालिक संचालन की ज़िम्मेदारी मालदीव सरकार या अन्य बाहरी भागीदारों पर है. मालदीव के लिए चीनी ठेकेदार इसलिए आकर्षक हैं क्योंकि उनके पास बड़े पैमाने की परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय क्षमता है. वहीं चीन और उसकी कंपनियों के लिए ये अनुबंध केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश में स्थायी मौजूदगी बनाए रखने, स्थानीय नेटवर्क विकसित करने और दीर्घकालिक भू-राजनीतिक प्रभाव को मज़बूत करने का भी माध्यम हैं. हालांकि, मालदीव सरकार पर बढ़ता वित्तीय दबाव भविष्य में ठेकेदारों को समय पर भुगतान करने में कठिनाइयाँ पैदा कर सकता है जिससे परियोजनाओं की प्रगति और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी नई चुनौतियाँ उभर सकती हैं.

व्यापार और वित्तीय संबंध

दोनों देशों के बीच व्यापार और वित्तीय रिश्ते भी लगातार बढ़ रहे हैं. 1 जनवरी 2025 से लागू हुआ चीन–मालदीव मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कई वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करने का वादा करता है लेकिन इसके बावजूद व्यापार घाटा जस का तस बना हुआ है. “आपसी साझेदारी” पर ज़ोर दिए जाने के बावजूद, चीन को मालदीव का निर्यात बहुत सीमित है जबकि चीन से आयात कहीं अधिक है. परिणामस्वरूप, एफटीए लागू होने के बाद भी मालदीव का निर्यात लगभग स्थिर रहा है और चीनी आयात के मुकाबले बेहद कम बना हुआ है.

चीन का आर्थिक एकीकरण मालदीव की नीति-स्वतंत्रता और क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है.

दोनों देशों के बीच वित्तीय संबंध मज़बूत हो रहे हैं, खासकर तब जब मालदीव घटते डॉलर भंडार और बढ़ते कर्ज़ दबाव से जूझ रहा है. सितंबर 2024 में चीन और मालदीव के केंद्रीय बैंकों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए समझौता हुआ, जिसके बाद युआन खाते, लेनदेन और वीचैट पे जैसी सुविधाएँ शुरू की गईं. इससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिला लेकिन बड़े व्यापार घाटे के कारण मालदीव को युआन की कमी बनी रहेगी और उसे चीनी पर्यटकों, निर्यात तथा वित्तीय प्रवाह पर निर्भर रहना पड़ेगा. कुल मिलाकर, चीन का बढ़ता आर्थिक एकीकरण मालदीव की नीतिगत स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है और क्षेत्रीय संतुलन, विशेषकर भारत के लिए, नई चुनौतियाँ पैदा कर सकता है.


आदित्य गौड़ारा शिवमूर्ति ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम में एसोसिएट फ़ेलो हैं.

उदिति लुनावत ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन में रिसर्च इंटर्न हैं.

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Authors

Aditya Gowdara Shivamurthy

Aditya Gowdara Shivamurthy

Aditya Gowdara Shivamurthy is an Associate Fellow with the Strategic Studies Programme’s Neighbourhood Studies Initiative.  He focuses on strategic and security-related developments in the South Asian ...

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Uditi Lunawat

Uditi Lunawat

Uditi Lunawat is a Research Intern at the Observer Research Foundation. ...

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