Author : Suyash Desai

Expert Speak Raisina Debates
Published on Dec 30, 2025 Updated 0 Hours ago

चीन की सेना अब लंबी तैयारी के बजाय आदेश मिलते ही तुरंत हमला करने की क्षमता विकसित कर रही है. यह कोल्ड स्टार्ट जैसी सैन्य सोच ताइवान से आगे बढ़कर अब भारत से लगी सीमाओं पर भी लागू होती दिख रही है, जो नई चिंता का संकेत है.

चीन की कोल्ड स्टार्ट सोच: भारत के लिए क्यों चिंताजनक?

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) धीरे-धीरे एक नई तरह की सैन्य रणनीति की ओर बढ़ रही है जिसे “कोल्ड स्टार्ट-जैसी” सैन्य परिचालन मुद्रा कहा जा सकता है. इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी संभावित विरोधी देश के पूरी तरह तैयार होने या बाहरी हस्तक्षेप से पहले ही तेज़, अचानक और उच्च तीव्रता वाले सैन्य हमले किए जाएँ यानी युद्ध की शुरुआत इतनी तेज़ हो कि सामने वाला प्रतिक्रिया देने का समय ही न पाए.

यह बदलाव चीन की व्यापक सैन्य मोबिलाइज़ेशन सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है जिसकी शुरुआत 2017-18 में हुई थी. हालांकि, 2022 के बाद ही PLA ने इस “कोल्ड स्टार्ट” जैसी रणनीति को ज़मीन पर लागू करना शुरू किया. अगस्त 2022 में अमेरिका की तत्कालीन प्रतिनिधि सभा अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा ने चीन को एक अवसर दिया, जिसके बाद उसने ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास कर इन सुधारों को वास्तविक परिस्थितियों में आज़माया.

PLA के सैन्य विचारों में “कोल्ड स्टार्ट” का अर्थ है-शांतिपूर्ण स्थिति से बिना किसी पूर्व चेतावनी के तुरंत युद्ध के लिए तैयार हो जाना. इसमें सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है आश्चर्य.

 इन सुधारों को चीन ने सीमित रूप से तिब्बत और शिनजियांग सैन्य जिलों में भी लागू किया है. आमतौर पर चीन की सैन्य सुधार पहलों की शुरुआत पूर्वी थिएटर कमांड (Eastern Theater Command) से होती है जिसे एक तरह की “परीक्षण प्रयोगशाला” माना जाता है लेकिन इस बार एक अलग तस्वीर सामने आई है. PLA ने कोल्ड स्टार्ट जैसी परिचालन क्षमता तिब्बत, शिनजियांग और संभवतः पूरे पश्चिमी थिएटर कमांड (Western Theater Command) में अधिक प्रभावी ढंग से विकसित की है. यह क्षेत्र सीधे तौर पर भारत से जुड़े सैन्य हालात के लिए ज़िम्मेदार है इसलिए भारत के लिए यह बदलाव विशेष रूप से चिंता का विषय है.

PLA के सैन्य विचारों में “कोल्ड स्टार्ट” का अर्थ है-शांतिपूर्ण स्थिति से बिना किसी पूर्व चेतावनी के तुरंत युद्ध के लिए तैयार हो जाना. इसमें सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है आश्चर्य. चीनी सैन्य ग्रंथों में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि जैसे ही आदेश मिले, सैनिक तुरंत हरकत में आ जाएँ. इसे चीनी भाषा में “वेन लिंग जी डोंग” कहा जाता है, यानी “आदेश सुनते ही तुरंत तैनाती”.

PLA की प्रसिद्ध संदर्भ पुस्तक Science of Military Strategy के 2020 संस्करण में 24 से 48 घंटे की “गोल्डन विंडो” का ज़िक्र किया गया है. इस समय सीमा के भीतर युद्ध क्षेत्र का मुख्यालय बलों को तैयार कर पहल अपने हाथ में ले सकता है. इसका मतलब है कि युद्ध के शुरुआती दो दिन निर्णायक माने जाते हैं.

सिर्फ सैन्य पुस्तकों में ही नहीं बल्कि चीन के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने भी बार-बार “तेज़ शुरू करो, तेज़ खत्म करो” की नीति पर ज़ोर दिया है. इस सोच का मतलब है-लगातार युद्ध के लिए तैयार रहना, थल-नौ-वायु सेनाओं का संयुक्त और तेज़ उपयोग करना और सबसे अहम, बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप से पहले लक्ष्य हासिल कर लेना.

PLA की प्रसिद्ध संदर्भ पुस्तक Science of Military Strategy के 2020 संस्करण में 24 से 48 घंटे की “गोल्डन विंडो” का ज़िक्र किया गया है. इस समय सीमा के भीतर युद्ध क्षेत्र का मुख्यालय बलों को तैयार कर पहल अपने हाथ में ले सकता है. इसका मतलब है कि युद्ध के शुरुआती दो दिन निर्णायक माने जाते हैं.

चीन के राष्ट्रपति और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी जिनपिंग ने अप्रैल 2023 में दक्षिणी थिएटर नौसेना के अधिकारियों को संबोधित करते हुए नए सैन्य संसाधनों की तेज़ तैनाती का आदेश दिया. यह उनके उस लंबे समय से दोहराए जा रहे संदेश को मजबूत करता है-“हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहो.” PLA के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इसी सोच को आगे बढ़ा रहे हैं जिनमें केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष से लेकर तिब्बत सैन्य ज़िले के बटालियन कमांडर तक शामिल हैं.

2022 के बाद से PLA सुधारों में मोबिलाइज़ेशन यानी त्वरित तैनाती पर खास ध्यान दिया गया है. केंद्रीय सैन्य आयोग ने तीन प्रमुख क्षेत्रों में बदलाव किए हैं-संस्थागत सुधार, प्रशिक्षण व शिक्षा में बदलाव और वास्तविक अभ्यासों के ज़रिये इन सुधारों को लागू करना.

पहला, संस्थागत सुधार. पूरे चीन में, यहाँ तक कि तिब्बत और शिनजियांग जैसे दूरदराज़ इलाकों में भी, राष्ट्रीय रक्षा मोबिलाइज़ेशन कार्यालय (NDMO) बनाए गए हैं. इनका उद्देश्य PLA को प्रशासनिक कामों से मुक्त करना है ताकि सेना पूरी तरह युद्ध तैयारी पर ध्यान दे सके. साथ ही, कमांड ढांचे को सरल बनाया गया है ताकि आदेश देने और उस पर कार्रवाई के बीच का समय घंटों से घटकर मिनटों में आ सके.

दूसरा, प्रशिक्षण और शिक्षा. 2022 के बाद से PLA के जवानों को विशेष रूप से मोबिलाइज़ेशन-केंद्रित सोच के साथ प्रशिक्षित किया जा रहा है. 2023-24 में चले “शी जिनपिंग विचारधारा” आधारित शिक्षा अभियान में बटालियन कमांडरों को निर्देश दिया गया कि वे कक्षा में विचारधारा पढ़ाने के साथ-साथ युद्ध-तैयारी अभ्यास भी कराएँ. इसका उद्देश्य यह है कि सबसे निचले स्तर तक सैनिक बिना पूर्व सूचना के युद्ध के लिए तैयार रह सकें.

तीसरा, ज़मीनी स्तर पर अभ्यास. 2022 से PLA तिब्बत, शिनजियांग और ताइवान के आसपास बहुत कम पूर्व सूचना के साथ सैन्य अभ्यास कर रही है. अगस्त 2022 में ताइवान के चारों ओर लाइव-फायर ज़ोन बनाकर, मिसाइल परीक्षण और नौसेना तैनाती करके चीन ने 1995-96 के बाद पहली बार ताइवान को पूरी तरह घेरने जैसा अभ्यास किया.

इसके बाद अप्रैल 2023 में “जॉइंट स्वॉर्ड” अभ्यास उसी दिन घोषित और शुरू किया गया. 2024 और 2025 में हुए अभ्यासों में समयसीमा और भी कम कर दी गई. अक्टूबर 2024 में तो सुबह-सुबह घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर विमानवाहक पोत, मिसाइल और वायुसेना सक्रिय हो गई. अप्रैल 2025 के अभ्यासों ने दिखाया कि PLA 48 घंटे के भीतर बहु-दिशात्मक नाकाबंदी और सटीक हमलों के लिए तैयार हो सकती है.

 

PLA अब तेज़, संयुक्त और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों की ओर बढ़ रही है. भारत के लिए यह संकेत है कि चीन अब सीमाओं पर लंबे समय तक तैयारी करने के बजाय कम समय में अचानक सैन्य दबाव बनाने की क्षमता विकसित कर चुका है. इसलिए भारत को इस बदलती चीनी सैन्य रणनीति पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है.

इन सभी घटनाओं से साफ़ होता है कि PLA अब तेज़, संयुक्त और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों की ओर बढ़ रही है. भारत के लिए यह संकेत है कि चीन अब सीमाओं पर लंबे समय तक तैयारी करने के बजाय कम समय में अचानक सैन्य दबाव बनाने की क्षमता विकसित कर चुका है. इसलिए भारत को इस बदलती चीनी सैन्य रणनीति पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है.

यह बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय क्यों होना चाहिए

आमतौर पर पीएलए (चीनी सेना) के लिए पूर्वी क्षेत्र उसका परीक्षण क्षेत्र रहा है क्योंकि ताइवान से जुड़ी स्थिति 1993 से उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक प्राथमिकता रही है. इसी वजह से पूर्वी थिएटर कमांड को सैन्य आधुनिकीकरण, नई तकनीक और नीतिगत सुधारों का सबसे ज़्यादा लाभ मिला है. इसके विपरीत, शिनजियांग और तिब्बत जैसे क्षेत्र आम तौर पर सुधारों और संसाधनों के मामले में सबसे पीछे रहे हैं लेकिन हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है. भारत से सटे ये दोनों सैन्य ज़िले और पूरा पश्चिमी थिएटर कमांड, अब चीन की नई “कोल्ड स्टार्ट” सैन्य सोच के सबसे बड़े लाभार्थी बनते दिख रहे हैं.

इसके कई ठोस उदाहरण सामने आए हैं. सितंबर 2021 में पश्चिमी चीन में एक परिवहन और आपूर्ति केंद्र ने 23 सैन्य–नागरिक हवाई मार्ग शुरू किए, जिनके ज़रिये एक ही दिन में लगभग एक हज़ार किलोमीटर दूर सीमा क्षेत्रों तक ज़रूरी उपकरण और सेवाएँ पहुँचाई गईं. मार्च 2022 में, पीएलए की 77वीं ग्रुप आर्मी की एक इकाई ने चेंगदू से शिगात्से तक रिकॉर्ड समय में आवाजाही की. वर्ष 2025 में भी दो घटनाएँ विशेष रूप से ध्यान देने योग्य रहीं-जनवरी में दक्षिण शिनजियांग में भारत सीमा के पास वार्षिक सैन्य अभ्यास के दौरान तेज़ तैनाती पर ज़ोर और जुलाई में शिनजियांग सैन्य ज़िले के तहत रेजिमेंट स्तर के लाइव-फायर अभ्यासों में त्वरित तैनाती का वास्तविक प्रदर्शन.

नेतृत्व के निर्देश, संस्थागत सुधार और लगातार सैन्य अभ्यास मिलकर यह दर्शाते हैं कि चीनी सेना अब तेज़, संयुक्त और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहाँ लक्ष्य है बाहरी हस्तक्षेप से पहले अपने उद्देश्यों को पूरा करना.

ये घटनाएँ अलग-अलग नहीं हैं बल्कि पिछले कुछ वर्षों से चल रही एक निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा हैं. इनसे साफ़ संकेत मिलता है कि चीन लगातार समय-सीमा को कम कर रहा है, परिवहन ढांचे को मज़बूत बना रहा है और हिमालयी सीमा पर बहुत कम समय की तैयारी में सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता विकसित कर रहा है.

नेतृत्व के निर्देश, संस्थागत सुधार और लगातार सैन्य अभ्यास मिलकर यह दर्शाते हैं कि चीनी सेना अब तेज़, संयुक्त और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहाँ लक्ष्य है बाहरी हस्तक्षेप से पहले अपने उद्देश्यों को पूरा करना.


सुयश देसाई चीन की रक्षा और विदेश नीति पर अध्ययन करने वाले एक शोधार्थी हैं.

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