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Published on Jan 02, 2026 Updated 6 Days ago

चीन स्मार्ट शहरों को सुविधा नहीं, रणनीति मानता है. इस लेख से जानें कि सिटी ब्रेन के ज़रिए वह शहरी जीवन, सुरक्षा और शासन को एक ही डिजिटल तंत्र में कैसे जोड़ रहा है.

सिटी ब्रेन: चीन का शहरों पर नया प्रयोग

मई 2024 में चीन ने स्मार्ट शहरों के विकास के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए, जिनका लक्ष्य 2027 तक शहरी जीवन में व्यापक डिजिटल परिवर्तन लाना है. इन दिशा-निर्देशों को चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना की तैयारियों से भी जोड़ा गया है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने स्पष्ट किया है कि देश को शहरों की पूरी क्षमता का उपयोग करते हुए शहरी नवीनीकरण को तेज़ करना चाहिए और ऐसे आधुनिक, लोगों-केंद्रित शहर विकसित करने चाहिए जो नवाचारी, रहने योग्य, सुंदर, टिकाऊ, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और स्मार्ट हों.

सरकारी स्तर पर चीन ने पहले सेफ सिटी की अवधारणा को अपनाया था जो धीरे-धीरे स्मार्ट सिटी में बदली और कई नीतिगत दस्तावेज़ों में दोनों को मिलाकर स्मार्ट सेफ सिटी के रूप में प्रस्तुत किया गया. चीन की स्मार्ट सिटी नीति में सुरक्षा एक केंद्रीय तत्व बनी हुई है जिसमें आग जैसी आपदाओं से लेकर आतंकवादी खतरों तक का दायरा शामिल है. इस क्षेत्र में चीनी कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. उदाहरण के तौर पर, रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी नोरिन्को (NORINCO) ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में सेफ और स्मार्ट सिटी समाधानों को शामिल किया है.

चीन का स्मार्ट सिटी मॉडल एक केंद्रीकृत ढांचे पर आधारित है जहां केंद्र सरकार पायलट शहरों का चयन करती है और स्थानीय सरकारें उन्हें ज़मीन पर लागू करती हैं.

चीन का स्मार्ट सिटी मॉडल एक केंद्रीकृत ढांचे पर आधारित है जहां केंद्र सरकार पायलट शहरों का चयन करती है और स्थानीय सरकारें उन्हें ज़मीन पर लागू करती हैं. सुरक्षा ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश के चलते चीन ने दुनिया की सबसे व्यापक निगरानी प्रणालियों में से एक विकसित की है. रिपोर्टों के अनुसार, 2018 तक देश में लगभग 20 करोड़ सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके थे और 2021 तक इनकी संख्या 56 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान जताया गया था.

सिटी ब्रेन से कैसे बदल रहा है चीन का शहरी शासन

शंघाई स्थित एसओएम सिटी डिज़ाइन प्रैक्टिस के वरिष्ठ सहयोगी नाइफ़ेई सन का मानना है कि स्मार्ट शहरों का विकास चीन के शहरी केंद्रों के लिए डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक अहम कदम है. उनके अनुसार, यह प्रक्रिया केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है बल्कि इससे उत्पादकता के एक नए चरण की नींव भी पड़ती है. स्मार्ट शहरों के माध्यम से शहरी सेवाओं को अधिक कुशल, तेज़ और समन्वित बनाया जा सकता है. नाइफ़ेई सन के मुताबिक, यह पहल चीन के बड़े महानगरों में अधिक बुद्धिमान, डेटा-आधारित और प्रभावी शासन प्रणाली स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

इस आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में चीन सिटी ब्रेन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ‘डिजिटल ट्विन’ पर विशेष जोर दे रहा है.

हाल के वर्षों में चीन में स्मार्ट शहरों की सटीक संख्या भले ही स्पष्ट न हो लेकिन 2018 की डेलॉइट रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 1,000 से अधिक स्मार्ट शहरों की योजना या विकास कार्य चल रहा था. इनमें लगभग 500 पायलट स्मार्ट शहरों के साथ चीन सबसे आगे था. इसके बाद अमेरिका, यूरोप और भारत का स्थान था. वर्ष 2016 तक चीन में 542 पायलट स्मार्ट शहरों पर काम शुरू हो चुका था और 2018 तक इनमें से करीब 400 शहर व्यावहारिक रूप से विकसित हो चुके थे. स्मार्ट शहरों की यह पहल केवल घरेलू नीति तक सीमित नहीं है बल्कि बीजिंग अपनी स्मार्ट सिटी तकनीकों को दुनिया के अन्य देशों में भी बढ़ावा दे रहा है. 2020 में अमेरिकी विशेषज्ञों की एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि 34 चीनी कंपनियों ने 106 देशों में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से जुड़कर इन तकनीकों का निर्यात किया है.

इस आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में चीन सिटी ब्रेन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ‘डिजिटल ट्विन’ पर विशेष जोर दे रहा है. ‘सिटी ब्रेन’ आज के स्मार्ट शहरों का केंद्र है, जिसमें AI, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन, डिजिटल ट्विन और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी तकनीकों का समावेश है. 31 मार्च 2025 को चीन ने AI मॉडल डीपसीक-R1 पर आधारित सिटी ब्रेन 3.0 लॉन्च किया जिसका उद्देश्य शहरों में निगरानी और ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाना है. इसमें अल्ट्रा-हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन के लिए स्मार्ट ग्रिड और बाढ़ रोकने व कार्बन अवशोषण के लिए ‘स्पॉन्ज सिटी’ जैसी विशेषताएं शामिल हैं.

इसके साथ ही चीन डिजिटल गांव विकसित करने पर भी निवेश कर रहा है, जिसमें तकनीक आधारित कृषि, 5G नेटवर्क का विस्तार और ग्रामीण साइबर संस्कृति को बढ़ावा देना शामिल है. मई 2024 में चीन के कृषि और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय ने डिजिटल गांव विकास दिशानिर्देश 2.0 जारी किए.

स्मार्ट शहरों में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), कैमरे, ड्रोन और सेंसर जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग होता है.

स्मार्ट शहरों में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), कैमरे, ड्रोन और सेंसर जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग होता है. इनका इस्तेमाल खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) में किया जाता है. ऐसा उच्च-तकनीकी ढांचा सैन्य अभियानों को भी लाभ पहुंचाता है क्योंकि इससे हमलों की सटीकता और गति बढ़ती है तथा जवाबी कार्रवाई में लगने वाला समय घटता है. सैन्य दृष्टि से स्मार्ट शहरों में साइबर प्रणालियों का महानगरों से एकीकरण और विशेष परिस्थितियों में अभियान चलाने के लिए सैनिकों का विशेष प्रशिक्षण भी शामिल है.

चीन स्मार्ट शहरों के निर्माण में उन्नत तकनीकों का प्रयोग कर रहा है. जिनान में बुनियादी ढांचे की योजना के लिए 4-डी विज़ुअलाइज़ेशन, ग्वांगझोउ में बाढ़ नियंत्रण के लिए जल और मौसम संबंधी डेटा का उपयोग और श्योंगआन न्यू एरिया में डिजिटल ट्विन का निर्माण इसके उदाहरण हैं. इस तरह की डिजिटल शहरी व्यवस्था के लिए वास्तविक समय में डेटा अपडेट करने हेतु भारी मात्रा में डेटा और नेटवर्क क्षमता की आवश्यकता होती है. चीन का लक्ष्य सिटी ब्रेन विकसित करना है जो स्मार्ट सिटी का उन्नत रूप है और शहरी ढांचे की निगरानी का एक मॉडल तैयार करता है. हालांकि, सैन्य-नागरिक एकीकरण की नीति के साथ इसका जुड़ाव डेटा गोपनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा करता है.

हालांकि, सैन्य-नागरिक एकीकरण की नीति के साथ इसका जुड़ाव डेटा गोपनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा करता है.

विद्वानों ने तकनीक के उपयोग और जनभागीदारी के आधार पर चीन के स्मार्ट शहर मॉडल को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है. इनमें तकनीक-प्रधान ‘ज्ञान-तकनीकी शहर’, सभी क्षेत्रों को जोड़ने वाला ‘समग्र शहर’, हरित तकनीक पर केंद्रित ‘ग्रीन सिटी’ और सीमित आईसीटी ढांचे पर आधारित मॉडल शामिल हैं. इन वर्गीकरणों से स्पष्ट होता है कि अमेरिका के विकेंद्रीकृत और नीचे से ऊपर बढ़ने वाले मॉडल के विपरीत चीन का स्मार्ट सिटी दृष्टिकोण अधिक केंद्रीकृत और ऊपर से नीचे लागू किया जाने वाला है जहां जनभागीदारी की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित रहती है.

हुआवेई, अलीबाबा और बायडू जैसी चीनी कंपनियां स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को बढ़ावा देने और उनके निर्यात के मामले में आईबीएम, सिस्को और जीपीएस जैसी पश्चिमी कंपनियों से सीधी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं. इसके चलते चीन और अमेरिका के बीच स्मार्ट सिटी तकनीकों के निर्यात को लेकर वैश्विक होड़ तेज हो गई है, खासकर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों में. इन देशों में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के लिए आईओटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, 5जी, एआई, सेंसर और डेटा सेंटर जैसी तकनीकों की आपूर्ति अमेरिका और चीन-दोनों से की जा रही है.

मध्य पूर्व में चीन की भूमिका तेजी से बढ़ी है. 2014 से 2024 के बीच चीन द्वारा शुरू की गई 34 स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में से 28 में हुआवेई की प्रमुख भूमिका रही है. अमेरिका ने इन परियोजनाओं को लेकर डेटा में सेंध, निगरानी और खुफिया गतिविधियों की आशंका जताई है और दावा किया है कि इनमें से 13 परियोजनाओं का संबंध चीनी खुफिया तंत्र से है. इसके बावजूद, मध्य पूर्व के कई देश चीन के साथ सहयोग को टिकाऊ विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक विविधीकरण के अवसर के रूप में देख रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी अमेरिकी प्रभुत्व को सीधी चुनौती दे रही है.

चीन की स्मार्ट अवसंरचना का विस्तार केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोहरे उपयोग की रणनीति दिखाई देती है.

अमेरिका को आशंका है कि केंद्रीकृत रूप से संचालित चीनी स्मार्ट सिटी ढांचे में व्यापक निगरानी और सत्तावादी मूल्यों का प्रसार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, क्योंकि इन प्रणालियों में कंपनियों को सरकार के साथ डेटा साझा करना पड़ता है. चीन की स्मार्ट अवसंरचना का विस्तार केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोहरे उपयोग की रणनीति दिखाई देती है—एक ओर तकनीकी आधुनिकीकरण और प्रभुत्व, और दूसरी ओर भविष्य में वैश्विक ‘डिजिटल ब्रेन’ पर प्रभाव बढ़ाने की दीर्घकालिक सोच. सैन्य–नागरिक एकीकरण, उन्नत एआई क्षमताओं और बेल्ट एंड रोड पहल के जरिए चीन न केवल अपने मॉडल को देश के भीतर लागू कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी मानकों और साइबर अवसंरचना को भी आकार देने की कोशिश कर रहा है, जो अमेरिका सहित कई देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है.


अमृता जश, मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, ह्यूमैनिटीज एंड आर्ट्स, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस), मणिपाल, कर्नाटक, भारत में जियोपॉलिटिक्स और इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

निष्ठा कुमारी सिंह, मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, ह्यूमैनिटीज एंड आर्ट्स, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस), मणिपाल, कर्नाटक, भारत में जियोपॉलिटिक्स और इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में डॉक्टोरल कैंडिडेट और डॉ. टीएमए पाई फेलो हैं।

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