Published on Apr 14, 2022 Updated 1 Days ago

कैरी लैम ने हॉन्ग कॉन्ग की नौकरशाही में क़रीब चार दशक बिताए और वो मुख्य सचिव के पद तक पहुंची जो कि विशेष प्रशासनिक क्षेत्र की सरकार का सबसे बड़ा प्रशासक होता है. कैरी लैम के कार्यकाल में हॉन्ग कॉन्ग और अधिक मज़बूती से मैनलेंड चीन से जुड़ा.

चीन को हॉन्ग कॉन्ग की बागडोर सौंप कर कैरी लैम का इस्तीफ़ा

हॉन्ग कॉन्ग की चीफ एग्जिक्यूटिव यानी सबसे बड़ी नेता कैरी लैम अपना दूसरा कार्यकाल पाने की कोशिश नहीं करेंगी. वो अपने पीछे एक बंटे हुए समाज की विरासत को छोड़कर जा रही हैं जिसको व्यापक प्रदर्शनों से काफ़ी नुक़सान हुआ है. साथ ही अब कमज़ोर पड़ चुकी कोविड लहर, जिसकी वजह से रिकॉर्ड संख्या में लोग हताहत हुए. इसके अलावा उनके कार्यकाल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हॉन्ग कॉन्ग छोड़ा.

कैरी लैम ने हॉन्ग कॉन्ग की नौकरशाही में क़रीब चार दशक बिताए और वो मुख्य सचिव के पद तक पहुंची जो कि विशेष प्रशासनिक क्षेत्र की सरकार का सबसे बड़ा प्रशासक होता है. सरकारी कार्यकाल की वजह से उन्हें इस द्वीप की राजनीति को नज़दीक से देखने का मौक़ा मिला और उनका ये तजुर्बा उस वक़्त काम आया जब 2017 में उन्होंने हॉन्ग कॉन्ग की चीफ एग्ज़िक्यूटिव के पद के लिए अपना दावा ठोका. लैम ‘एक देश, दो प्रणाली’ के ढांचे को हमेशा-हमेशा के लिए बदलने वाली विरासत छोड़कर जा रही हैं जो कि अब तक मुख्य भूमि चीन और हॉन्ग कॉन्ग के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के बीच संबंधों को सहारा देता रहा है. लैम के कार्यकाल के दौरान मेनलैंड चीन के साथ हॉन्ग कॉन्ग के और ज़्यादा जुड़ने के साथ हॉन्ग कॉन्ग के समाज को काफ़ी सुरक्षा के दौर से गुज़रना पड़ा.

लैम ‘एक देश, दो प्रणाली’ के ढांचे को हमेशा-हमेशा के लिए बदलने वाली विरासत छोड़कर जा रही हैं जो कि अब तक मुख्य भूमि चीन और हॉन्ग कॉन्ग के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के बीच संबंधों को सहारा देता रहा है.

पृष्ठभूमि

यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने 1997 में हॉन्ग कॉन्ग को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को सौंपा और इसके लिए व्यवस्था की गई कि हॉन्ग कॉन्ग का शासन ‘एक देश, दो प्रणाली’ के ढांचे के तहत होगा. इसका मतलब यह था कि इस द्वीप को स्वायत्तता मिलेगी और यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के शासन के तहत अपनी पूंजीवादी प्रणाली को कायम रखेगा. हालांकि रक्षा और विदेश मामलों का ज़िम्मा चीन के पास रहेगा. सीसीपी इस व्यवस्था के तहत चली क्योंकि उसे यकीन था कि एक दिन ये ढांचा ताइवान को भी मुख्य भूमि चीन की तरफ़ वापस आने के लिए लुभाएगा. लेकिन सीसीपी ने हमेशा हॉन्ग कॉन्ग के लोगों के प्रति अविश्वास का रुख़ बनाए रखा जबकि वो हॉन्ग कॉन्ग चीन को सौंपे जाने की ख़ुशी मनाती रही. चीन के सर्वोच्च नेता रहे देंग शियाओपिंग चाहते थे कि हॉन्ग कॉन्ग के उनके हमवतन लोग पहले देशभक्त बनें. देंग ने कहा था कि वो चाहते हैं कि देशभक्त इस द्वीप से जुड़े मामलों का नियंत्रण अपने पास रखें, वो चीन के प्रति सम्मान रखें और एक स्थायी हॉन्ग कॉन्ग की इच्छा रखें.[i]

हॉन्ग कॉन्ग के लोगों की वफ़ादारी को लेकर शक की वजह से चीन धीरे-धीरे यहां की जनसंख्या में बदलाव करने लगा. एक तरफ़ की परमिट योजना, जिसके तहत मेनलैंड चीन में रहने वाले लोगों को हॉन्ग कॉन्ग में रहने वाले अपने परिजनों से मिलने की स्वीकृति दी जाती है, का नतीजा ये निकला है कि चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने के बाद से 10 लाख से ज़्यादा मेनलैंड चीन के नागरिक हॉन्ग कॉन्ग पहुंचे हैं. मेनलैंड चीन से आई इस आबादी ने हाल के वर्षों में हॉन्ग कॉन्ग की जनसंख्या वृद्धि में 90 प्रतिशत का योगदान दिया है. हैरानी की बात यह है कि चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने के समय से ऐसा लगता है कि मेनलैंड चीन और हॉन्ग कॉन्ग के लोगों के बीच शादियां भी बढ़ गई हैं और इस वजह से भी हॉन्ग कॉन्ग की आबादी बढ़ी है. चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने से एक वर्ष पहले मेनलैंड चीन और हॉन्ग कॉन्ग के लोगों के बीच शादी हॉन्ग कॉन्ग में रजिस्टर हुई शादियों का सिर्फ़ 7 प्रतिशत थी लेकिन 2018 में यह आंकड़ा लगभग 33 प्रतिशत था. मेनलैंड चीन के प्रवासियों को लेकर हॉन्ग कॉन्ग के लोगों के विरोध की एक वजह यह भी है कि एक तरफ़ की परमिट योजना में 15 साल की उम्र से ज़्यादा प्रवासियों में से सिर्फ़ 21 प्रतिशत ने माध्यमिक स्कूल की शिक्षा पूरी की है और एकीकरण योजना की क़रीब-क़रीब 50 प्रतिशत वयस्क आबादी को नौकरी मिली है.

2019 में हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक सर्वे से उजागर हुआ कि सिर्फ़ 11 प्रतिशत लोगों ने अपनी पहचान के रूप में ‘चीन का नागरिक होने’ का ज़िक्र किया जो मेनलैंड चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने के बाद सबसे कम था.इस सर्वे में पता चला कि ख़ुद को ‘हॉन्ग कॉन्ग का रहने वाला’ कहने वाले 53 प्रतिशत लोग थे जो 1997 के बाद सबसे ज़्यादाथे.

हॉन्ग कॉन्ग की पहचान

जनसंख्या में बदलाव होने से स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया होती रही है. इस मामले में मेनलैंड चीन से लोगों के आने का जवाब एक मज़बूत ‘हॉन्ग कॉन्ग की पहचान’ और राजनीतिक सुधार के लिए जन आंदोलनों के इर्द-गिर्द केंद्रित है. 2019 में हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक सर्वे से उजागर हुआ कि सिर्फ़ 11 प्रतिशत लोगों ने अपनी पहचान के रूप में ‘चीन का नागरिक होने’ का ज़िक्र किया जो मेनलैंड चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने के बाद सबसे कम था.इस सर्वे में पता चला कि ख़ुद को ‘हॉन्ग कॉन्ग का रहने वाला’ कहने वाले 53 प्रतिशत लोग थे जो 1997 के बाद सबसे ज़्यादाथे. साल 2000 से प्रदर्शनकारी राजनीतिक सुधार की मांग के मुद्दे पर कई बार सड़कों पर प्रदर्शन कर चुके हैं.

इन घटनाओं ने लैम के कार्यकाल और उनके प्रशासन पर छाया डाली और चीन ने मेनलैंड के साथ हॉन्ग कॉन्ग के एकीकरण की कोशिशें को आगे बढ़ाया.  इसका असर ‘एक देश, दो प्रणाली’ के ढांचे पर पड़ा. चीन, हॉन्ग कॉन्ग से दूरी ख़त्म करने पर काम कर रहा था. सितंबर 2018 में हॉन्ग कॉन्ग को चीन के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के साथ जोड़ दिया गया. इसके कुछ ही समय बाद मेनलैंड चीन के गुआंगदोंग को हॉन्ग कॉन्ग और मकाउ के साथ जोड़ने वाले समुद्री पुल का उद्घाटन किया गया. फरवरी 2019 में सीसीपी ने ग्रेटर बे एरिया प्रोजेक्ट, हॉन्ग कॉन्ग और मकाउ के इलाक़ों को गुआंगदोंग प्रांत के नौ शहरों से मिलाकर बनाए गए एक आर्थिक क्षेत्र, के रूप में हॉन्ग कॉन्ग को मेनलैंड के साथ क़रीबी रूप से मिलाने के लिए अपना आर्थिक ब्लूप्रिंट जारी किया. 2019 में लैम का प्रशासन एक क़ानूनी प्रस्ताव लेकर आया जिसके तहत हॉन्ग कॉन्ग से मेनलैंड चीन को प्रत्यर्पण की इजाज़त मिल जाती. लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के प्रदर्शन की वजह से लैम को इसे वापस लेना पड़ा मगर इसके बाद भी हॉन्ग कॉन्ग को मेनलैंड चीन में मिलाने की बढ़ती कोशिशों के ख़िलाफ़ नियमित रूप से प्रदर्शन होते रहे.

हालांकि, प्रदर्शनों के बाद भी हॉन्ग कॉन्ग को चीन से मिलाने का काम जारी रहा. जून 2020 में चीन ने हॉन्ग कॉन्ग की विधान परिषद के द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून, जिसके तहत ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाता है जिन्हें सीसीपी अलगाववाद, तोड़-फोड़, आतंकवाद और विदेशी ताक़तों के साथ मिलीभगत बताती है, को लागू करने की प्रक्रिया बदल दी. 2021 में लैम ने एक चुनाव प्रतिनिधित्व क़ानून को मंज़ूरी दी जिसके तहत सार्वजनिक पदों के लिए चुनाव लड़ने वालों उम्मीदवारों की छानबीन के लिए एक समिति का गठन किया गया. इसका मक़सद यह था कि सिर्फ़ ‘देशभक्त’ उम्मीदवार ही बड़े पदों तक पहुंचे और इस तरह देंग की इच्छाओं को पूरा किया जाए. लैम के कार्यकाल के दौरान मेनलैंड चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा को संरक्षित रखने वाले विभाग, एक ऐसी एजेंसी जिसका गठन राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत किया गया था, ने हॉन्ग कॉन्ग में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी. इस एजेंसी का काम राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को लागू करने में हॉन्ग कॉन्ग के प्रशासन पर निगरानी रखना और उसे सूचनाएं मुहैया कराना है. ये एजेंसी हॉन्ग कॉन्ग में विधान परिषद और चीफ एग्ज़िक्यूटिव का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की जांच-पड़ताल के लिए भी ज़िम्मेदार है. राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून और इस एजेंसी के ज़रिए चीन, हॉन्ग कॉन्ग की राजनीति पर अपनी पकड़ मज़बूत बनाने में सफल हुआ है.

लैम ने शायद सोचा कि चीन को ख़ुश रखना उनके लिए फ़ायदे का सौदा साबित होगा. सीसीपी के शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए लैम ने जुलाई 2021 में चीन का दौरा किया. यह पहला मौक़ा था जब किसी चीफ एग्ज़िक्यूटिव ने चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने के आधिकारिक सालगिरह के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया. इस तरह उन्होंने हॉन्ग कॉन्ग के लोगों को दिखाया कि उनकी प्राथमिकता किस चीज़ को लेकर है. लैम के कार्यकाल के दौरान हॉन्ग कॉन्ग पुलिस ने ब्रिटिश अंदाज़ वाली ड्रिल से हटकर मेनलैंड चीन में अपनाई जाने वाली मार्चिंग स्टाइल को अपनाया. इसका स्वाभाविक नतीजा यह निकला कि लैम के कार्यकाल के दौरान हॉन्ग कॉन्ग के समाज को काफ़ी ज़्यादा सुरक्षा की परतों से गुज़ारा जाने लगा. इसका सबूत चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने के बाद 2021 में पहली बार स्कूल में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा दिवस’ मनाने के लिए हॉन्ग कॉन्ग प्रशासन की तरफ़ से की गई भरपूर कोशिशों से मिलता है.

लैम के कार्यकाल के दौरान मेनलैंड चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा को संरक्षित रखने वाले विभाग, एक ऐसी एजेंसी जिसका गठन राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत किया गया था, ने हॉन्ग कॉन्ग में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी. इस एजेंसी का काम राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को लागू करने में हॉन्ग कॉन्ग के प्रशासन पर निगरानी रखना और उसे सूचनाएं मुहैया कराना है.

मेनलैंड चीन और हॉन्ग कॉन्ग के संबंधों में बदलाव का महत्वपूर्ण असर पड़ रहा है. हॉन्ग कॉन्ग की अदालतों में विदेशी जज फ़ैसला सुनाते रहे हैं और चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपे जाने के बाद भी इसे क़ानून के शासन की विशेषता के तौर पर देखा जाता रहा है. मार्च 2022 में यूके के सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून का हवाला देकर ऐलान किया कि वो अब हॉन्ग कॉन्ग की कोर्ट ऑफ फाइनल अपील में काम नहीं करेंगे. सिर्फ़ जज ही नहीं बल्कि हॉन्ग कॉन्ग का साधारण निवासी भी बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है.

(Source: Immigration Refugees and Citizenship Canada)

राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के जवाब में यूके के द्वारा लाई गई योजना के तहत 2021 में 97,000 से ज़्यादा वीज़ा हॉन्ग कॉन्ग के निवासियों के लिए जारी किए गए. हॉन्ग कॉन्ग से कनाडा जाना  रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. कनाडा के इमिग्रेशन रिफ्यूजी और सिटीज़नशिप का आंकड़ा बताता है कि 22,000 से ज़्यादा हॉन्ग कॉन्ग के लोगों ने 2021 में कनाडा में परमानेंट रेज़िडेंसी, काम या पढ़ाई का परमिट हासिल किया है. 2019 के मुक़ाबले इसमें 250 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस आंकड़े से पता चलता है कि छात्र हों या नौकरीपेशा लोग, वो चीन की बढ़ती पकड़ की वजह से हॉन्ग कॉन्ग में अपना भविष्य नहीं देखते हैं.

मेनलैंड की सत्ता या सुरक्षा सेवाओं से गहरे रूप से जुड़े रहे लोगों को प्रमुख पदों पर बिठाने से संकेत मिलता है कि चीन इस बात में यकीन करता है कि हॉन्ग कॉन्ग का इस्तेमाल पश्चिमी देशों के द्वारा सीसीपी के ख़िलाफ़ किया जा सकता है और इसलिए लैम के कार्यकाल के बाद भी हॉन्ग कॉन्ग को मिलाने की कोशिशें जारी रहेंगी.

लैम के बाद का युग हॉन्ग कॉन्ग की राजनीति के लिए बहुत उम्मीदों से भरा नहीं है. ‘केवल देशभक्त’ के सिद्धांत और 2021 के चुनावी बदलावों ने स्वतंत्र आवाज़ों को प्रभावहीन कर दिया है. लैम ने उन लोगों को बढ़ावा दिया जो क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों से जुड़े हुए थे. सुरक्षा सचिव जॉन ली को मुख्य सचिव बनाया गया. इस तरह पहली बार क़ानून लागू करने वाली एजेंसी से जुड़े किसी अधिकारी को नौकरशाही के सबसे बड़े पद पर नियुक्त किया गया. जॉन ली फिलहाल कैरी लैम की जगह लेने वाले अधिकारियों की रेस में सबसे आगे हैं और उन्हें सीसीपी का आशीर्वाद भी हासिल है. इससे पता चलता है कि हॉन्ग कॉन्ग के लिए आगे आने वाला समय कैसा होने वाला है. लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई करने में सबसे आगे रहे हॉन्ग कॉन्ग के पुलिस बल के प्रमुख क्रिस टैंग को सुरक्षा सचिव (जॉन ली की जगह) बनाया गया है. हॉन्ग कॉन्ग के पूर्व चीफ एग्ज़िक्यूटिव ल्यूंग चुन-यिंग, जो अब नेशनल कमेटी ऑफ चाइनीज़ पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (चीन का सर्वोच्च राजनीतिक सलाहकार संस्थान) के उपाध्यक्ष हैं, चुनाव समिति के प्रमुख बनने वाले हैं. यह चुनाव समिति हॉन्ग कॉन्ग के अगले नेता के बारे में फ़ैसला करेगी. हॉन्ग कॉन्ग एंड मकाउऊ अफेयर्स ऑफिस (एचकेएमएओ), जो इन विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े मामलों से निपटने में चीन की मदद करने वाली एक एजेंसी है, का नेतृत्व ज़िया बाउलोंग (Xia Baolong)  करते हैं जो कि मेनलैंड चीन में ईसाई चर्चों को ध्वस्त करने के लिए ज़िम्मेदार थे. ज़िया सीसीपी के महासचिव शी जिनपिंग के क़रीबी हैं और एचकेएमएओ में हाल ही में नियुक्त ज़ियाके सहयोगी वांग लिंगकुई राष्ट्रीय सुरक्षा के विशेषज्ञ हैं. मेनलैंड की सत्ता या सुरक्षा सेवाओं से गहरे रूप से जुड़े रहे लोगों को प्रमुख पदों पर बिठाने से संकेत मिलता है कि चीन इस बात में यकीन करता है कि हॉन्ग कॉन्ग का इस्तेमाल पश्चिमी देशों के द्वारा सीसीपी के ख़िलाफ़ किया जा सकता है और इसलिए लैम के कार्यकाल के बाद भी हॉन्ग कॉन्ग को मिलाने की कोशिशें जारी रहेंगी. इस तरह लैम का कार्यकाल हॉन्ग कॉन्ग के इतिहास में उसके समाज को छिन्न-भिन्न करने के एक महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव के बिंदु के रूप में याद किया जाएगा.

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