AI को बजट में सिर्फ़ एक तकनीक नहीं बल्कि आर्थिक विकास के औज़ार के रूप में देखना ज़रूरी है. लेख बताता है कि सही निवेश से AI मानव पूंजी, उत्पादकता और नवाचार को मज़बूत कर सकती है.
अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को आम बजट में सिर्फ़ एक प्रविष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. इसे ऐसी प्रौद्योगिकी समझना होगा जिसका व्यापक लाभ उठाया जा सकता है. यदि कौशल विकास, डेटा, ढांचागत बदलाव और नवाचार में ज़रूरी निवेश किए जाएं तो AI कई क्षेत्रों को नया रूप दे सकती है. कहा भी जाता है कि बड़े फ़ायदे केवल उपकरणों से नहीं, ‘नवाचार संबंधी कमियों को दूर करने’ से मिलते हैं.
AI मानव पूंजी से गहराई से जुड़ी है. इससे न सिर्फ़ AI मॉडल बनाने में सक्षम लोगों को लाभ मिलता है बल्कि उन कामगारों को भी फ़ायदा होता है जो अपने कामकाज में AI उपकरणों का उपयोग करते हैं. इस कारण, कामकाजी दुनिया के एक बड़े हिस्से पर AI का प्रभाव पड़ सकता है. यह प्रभाव बढ़ी हुई उत्पादकता के रूप में दिखेगा या विस्थापन के रूप में, इसका निर्धारण इससे होगा कि अर्थव्यवस्थाएं इसको किस रूप में अपनाती हैं? इसीलिए, इसको लेकर यह सोच महत्वपूर्ण है कि- ऑटोमेशन (स्वचालन) इंसानी कामकाज को ख़त्म कर सकता है लेकिन उसे नए दायित्व भी सौंप सकता है. कौशल विकास, योग्यता सुधार और प्रोत्साहन देकर सरकार इस संतुलन को बनाती है. बजट के संदर्भ में देखें तो सवाल यही है कि क्या भारत डिजिटल साक्षरता, बुनियादी संख्यात्मक ज्ञान, डोमेन प्रशिक्षण (जैसे- स्वास्थ्य, विनिर्माण और लॉजिस्टिक में) और कम समय में पूरा होने वाले पाठ्यक्रमों के माध्यम से बड़े पैमाने पर ‘AI सक्षम काम’ को बढ़ावा देने के ज़रूरी उपाय कर रहा है ताकि कामगारों को AI की मदद से काम करने के योग्य बनाया जा सके?
AI मानव पूंजी से गहराई से जुड़ी है. इससे न सिर्फ़ AI मॉडल बनाने में सक्षम लोगों को लाभ मिलता है बल्कि उन कामगारों को भी फ़ायदा होता है जो अपने कामकाज में AI उपकरणों का उपयोग करते हैं.
अभी तक जो आवंटन किया जाता रहा है, वे बताते हैं कि सरकार के इरादे तो नेक हैं पर कमियां भी हैं. बजट में AI से संबंधित प्रावधान साफ़-साफ़ दिखते हैं लेकिन बड़े बदलाव के लिहाज से वे अधूरे हैं. 2025-26 में, इंडियाAI मिशन के लिए 2,000 करोड़ रुपये; आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सीसीबीटी (साइबर सुरक्षा, संचार और बिग डाटा प्रौद्योगिकियों) में अनुसंधान और विकास के लिए 1,250 करोड़ रुपये; संशोधित सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले इकोसिस्टम योजना के लिए 7,000 रुपये; और, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के लिए 9,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था. नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम के लिए 1,178 रुपये का बजट था. इन सबसे पता चलता है कि सरकार संवेदनशील है- क्षमता निर्माण और हार्डवेयर-आपूर्ति क्षमता से लेकर श्रम-बाजार में पहुंचने तक. मगर इससे मानव पूंजी-निर्माण की सबसे कठिन समस्या का समाधान नहीं हो पाता, जो है- गैर-AI कारोबारी क्षेत्रों में AI का उपयोग न होना.
अंतरराष्ट्रीय साक्ष्य इसकी वज़ह बताते हैं. दरअसल, AI से जुड़े होने के बावजूद अधिकतर कामगारों को AI इंजीनियरिंग में योग्य बनने की ज़रूरत नहीं होती. इसके बजाय उन्हें प्रबंधकीय और डिजिटल कौशल की आवश्यकता होती है. अगले बजट में यही करना चाहिए. उसमें अप्रेंटिसशिप व कौशल विकास पर ज़ोर देना चाहिए और इनको श्रम बाजार में AI के विस्तार का मुख्य माध्यम मानना चाहिए. सरकारी नीतियों में इसकी नींव दिखती भी है. असल में, मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इंडियाAI मिशन में ‘भविष्य के कौशल’ की बात कही गई है, जिसमें AI पाठ्यक्रमों का बढ़ाने और डेटा व AI प्रयोगशालाओं को टियर-2 या 3 शहरों में ले जाने की योजना है. बजट इस सोच को एक बड़ा लक्ष्य बना सकता है.
यह समझना होगा कि AI के उत्पादकता संबंधी प्रभाव प्रायः देर से दिखते हैं, क्योंकि कंपनियों को पहले इसे अपनाने के लिए निवेश करना पड़ता है, जिसमें डेटा पाइपलाइन, काम की पुनर्रचना, शासन और पूंजी, सभी शामिल हैं. कहा यही जाता है कि क्षमताएं प्रभावशाली हो सकती हैं, जबकि उत्पादकता का प्रभाव कम ही दिखता है, जब तक कि प्रसार और पुनर्गठन नहीं हो जाता. इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि बजट में AI को लेकर आवंटन कैसे किया जाए? हार्डवेयर में प्रोत्साहन और अनुसंधान व विकास ज़रूरी हैं, लेकिन बजट में ऐसी रणनीति बननी चाहिए कि सामान्य कंपनियां भी AI अपना सकें. अन्यथा, AI का उपयोग कुछ बड़ी कंपनियों तक ही सिमटकर रह जाएगा, जिस कारण उत्पादकता का पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा.
हमें यह समझने में मदद मिलती है कि बजट में AI को लेकर आवंटन कैसे किया जाए? हार्डवेयर में प्रोत्साहन और अनुसंधान व विकास ज़रूरी हैं, लेकिन बजट में ऐसी रणनीति बननी चाहिए कि सामान्य कंपनियां भी AI अपना सकें.
कमी आमतौर पर आर्थिक है और अपनाने संबंधी मापदंड से जुड़ी है. इंडियाAI पर मंत्रिमंडल की सहमति के दौरान ‘कंप्यूटिंग तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने’ पर ज़ोर दिया गया, जिसमें 10,000 से अधिक GPU में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से AI कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने और AI-एज-ए-सर्विस और प्री-ट्रेन्ड मॉडल के लिए बाज़ार बनाने की बात कही गई है. इससे उत्पादकता बढ़ेगी, क्योंकि स्टार्टअप और छोटी कंपनियों के लिए लागत कम हो जाएगी. हालांकि, बजट में अब भी ऐसी रणनीति बनाने की ज़रूरत है कि आपूर्ति पक्ष के प्रयास मांग पक्ष की ज़रूरतें पूरी कर सकें. जैसे, जिला अस्पतालों में AI-समर्थित जांच या कस्टम चेक में AI से निगरानी जैसी व्यवस्था शुरू करने के प्रयास. लक्ष्य यही होना चाहिए कि अगली कतार में AI को अपनाया जाए.
विकास का लाभ प्रायः इस बात पर निर्भर करता है कि क्या AI बड़े पैमाने पर कुल कारक उत्पादकता बढ़ाता है और साथ ही यह जोखिमों को कितना नियंत्रित रखता है, जैसे- श्रम बाजार के व्यवधान, बिक्री या उत्पादन का कुछ कंपनियों तक सिमटे होना, राज्यों व क्षेत्रों की असमान तैयारी आदि को. इसमें सुधार करने का एक उपयोगी तरीका IMF का एआई तैयारी सूचकांक ढांचा है, जो तैयारी को डिजिटल अवसंरचना, मानव पूंजी व श्रम नीति, नवाचार क्षमता और कानूनी ढांचे का एक साझा समूह मानता है. बजट के लिए यह ढांचा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संतुलित इनपुट पर ज़ोर देता है. यह संतुलन इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि एक स्तंभ पर अधिक धन लगाने से दूसरे स्तंभ की कमी दूर नहीं होती.
अब यह मौका है कि इनमें ‘AI ट्रांसलेशन’ को जगह दी जाए और इस तरह बजट का बंटवारा हो कि AI को प्रयोगशाला से कार्यस्थल तक और पायलट प्रोजेक्ट से व्यापक उपयोग तक ले जाना संभव हो.
अब तक के बजट में इसकी एक दिशा दिखी है, लेकिन अगले बजट में इसे और अधिक स्पष्ट बनाना होगा. भारत ने नई अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना (2025-26 में 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान) के माध्यम से नवाचार के लिए फंड उपलब्ध कराया है और स्किल इंडिया (2,700 करोड़ रुपये) को लगातार आर्थिक मदद दी है. अब यह मौका है कि इनमें ‘AI ट्रांसलेशन’ को जगह दी जाए और इस तरह बजट का बंटवारा हो कि AI को प्रयोगशाला से कार्यस्थल तक और पायलट प्रोजेक्ट से व्यापक उपयोग तक ले जाना संभव हो.
मानव पूंजी बढ़ाने पर जो आवंटन किए जाएं, उनका बड़ा हिस्सा कामकाज से जुड़ी क्षमताओं को सुधारने पर ख़र्च किया जाना चाहिए. जैसे- अप्रेंटिसशिप में मिलने वाले क्रिडेंशियल और क्षेत्र-विशिष्ट मॉड्यूल और नियोक्ता से जुड़े प्रशिक्षण पर, जिसका ऑडिट प्लेसमेंट और मिलने वाले वेतन के आधार पर हो.
उत्पादकता नीति में क्रियान्वयन को शामिल किया जाना चाहिए, जिसके लिए व्यवधानों को दूर करना होगा और MSME को प्रोत्साहन देना होगा, ताकि 'AI बाजार' की कल्पना सच साबित हो सके.
विकास नीति इस तरह बननी चाहिए कि नवाचार को लेकर दिए जाने वाले आर्थिक प्रोत्साहन (जैसे- RDI) AI-प्राथमिकताओं को पूरा कर सकें. इससे भारत का एआई पारिस्थितिकी तंत्र घरेलू उत्पादकता और निर्यात योग्य क्षमताएं, दोनों पैदा कर सकेगा.
इस तरह, AI के लिए तय किया गया बजट देश की विकास योजना को नई गति दे सकता है.
आर्य रॉय बर्धन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर न्यू इकोनॉमिक डिप्लोमेसी में जूनियर फेलो हैं.
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Arya Roy Bardhan is a Junior Fellow at the Centre for New Economic Diplomacy, Observer Research Foundation. His research interests lie in the fields of ...
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