क्षेत्रीय सहयोग के लिए बिम्सटेक ने एक महत्वाकांक्षी रास्ता तैयार किया है, लेकिन कुछ भू-राजनीतिक बाधाएं इसकी समृद्धि, मज़बूती और खुलेपन के दृष्टिकोण को चुनौती दे रही हैं.
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दक्षिण एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच, बंगाल की खाड़ी की बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. बिम्सटेक ने ये फैसला 2023 में अपनाए गए चार्टर द्वारा मिले कानूनी अधिकारों के आधार पर लिया है. काफ़ी समय से बिम्सटेक की इस बात के लिए आलोचना की जाती रही है कि उसके पास ज़रूरी कार्य योजना का अभाव होता है. इस संगठन ने हाल ही में जो फैसला लिया है, उसका उद्देश्य इन्हीं आलोचनाओं को संबोधित करना है. बिम्सटेक का गठन बंगाल की खाड़ी में स्थित देशों और दक्षिण-दक्षिण पूर्व एशिया के देशों की सदस्यता से हुआ है. अपने बाईस वर्ष के अस्तित्व में पहली बार बिम्सटेक ने अगले पांच साल के लिए अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित करने वाला एक विज़न स्टेटमेंट अपनाया है. अप्रैल 2025 में इस संगठन के छठे शिखर सम्मेलन में “बैंकॉक विज़न 2030” जारी किया गया. इस विज़न स्टेटमेंट का आधार “2030 तक बिम्सटेक को इसके सदस्य देशों के लोगों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, लचीला और खुला क्षेत्र” बनाना है.
अगर ध्यान से देखा जाए तो इस विज़न दस्तावेज़ में बिम्सटेक के सात व्यापक सहयोग क्षेत्रों को फिर से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. ये तीन श्रेणियां हैं ‘समृद्ध’, ‘लचीला’, और ‘खुला’ यानी ‘ओपन’. संक्षिप्त रूप में इसे ‘पीआरओ’ भी कहा गया है.
अगर ध्यान से देखा जाए तो इस विज़न दस्तावेज़ में बिम्सटेक के सात व्यापक सहयोग क्षेत्रों को फिर से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. ये तीन श्रेणियां हैं ‘समृद्ध’, ‘लचीला’, और ‘खुला’ यानी ‘ओपन’. संक्षिप्त रूप में इसे ‘पीआरओ’ भी कहा गया है. बिम्सटेक में मूल रूप से सहयोग के तेरह क्षेत्र थे. कार्यक्षमता में सुधार लाने के लिए 2023 में सहयोग के इन तेरह क्षेत्रों को सात क्षेत्रों में बांटा गया. ये सात क्षेत्र हैं: (i) व्यापार, निवेश और विकास (ii) पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन (iii) सुरक्षा- इसे आतंकवाद विरोधी तंत्र और अंतर्राष्ट्रीय अपराध; आपदा प्रबंधन; ऊर्जा जैसे उप क्षेत्रों में विभाजित किया गया (iv) कृषि और खाद्य सुरक्षा- इसमें भी कृषि; मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे उप-क्षेत्र बनाए गए(v) लोगों के बीच संपर्क- इसके उप-क्षेत्र हैं: संस्कृति; पर्यटन; सदस्य देशों के लोगों के बीच संपर्क (vi) विज्ञान, प्रौद्योगिकी, और नवाचार - उप-क्षेत्र: प्रौद्योगिकी; स्वास्थ्य; मानव संसाधन विकास (vii) आपसी संपर्क. इस विज़न स्टेटमेंट में जो मूल्य-प्रभावित वर्गीकरण किए गए हैं, वो 1997 के बैंकॉक घोषणा पत्र पर आधारित है. 1997 के इस बैंकॉक घोषणापत्र को बिम्सटेक का मौलिक जनादेश माना जाता है. ये जनादेश इस क्षेत्र में सामान्य रुचियों के क्षेत्रों में सहयोग के लाने का काम करता है. इसका उद्देश्य बिम्सटेक के सदस्य देशों में तेज़ी से आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के लिए एक सशक्त वातावरण बनाना है.
नए वर्गीकरणों को निम्नलिखित उपखंडों में विभाजित किया जा सकता है:
‘समृद्ध बिम्सटेक’ का दृष्टिकोण आर्थिक एकीकरण और समावेशी विकास के सिद्धांत में निहित है. विज़न स्टेटमेंट का ये पिलर गरीबी से लड़ने, अंतर-क्षेत्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच मौजूदा विकासात्मक विषमताओं को कम करने की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देता है. फिजिकल और एनर्जी कनेक्टिविटी को एकीकृत बंदरगाह, समुद्री, भूमि, और ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के माध्यम से तेज़ करने पर ज़ोर दिया गया है. 2022 में बिम्सटेक के पांचवें शिखर सम्मेलन में परिवहन कनेक्टिविटी के मास्टर प्लान के तेज़ी से और प्रभावी कार्यान्वयन की बात कही गई थी. इसे आपसी संपर्क बढ़ाने में महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके साथ ही, सदस्य देशों को सुगम अंतर्देशीय आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. लंबे समय से लंबित बिम्सटेक मोटर वाहन समझौते को अंतिम रूप देने को कहा गया है.
इस संगठन के देशों में ऊर्जा सहयोग आवश्यक रहा है-विशेष रूप से 2018 में बिम्सटेक ग्रिड इंटरकनेक्शन पहल के अपनाने के बाद—लेकिन इससे संबंधित अध्ययन ने धीरे-धीरे प्रगति की. 2024 तक, ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए एक ड्राफ्ट मास्टर प्लान सदस्य देशों के साथ साझा किया गया. इसका अंतिम संस्करण वर्ष 2025 में ही जारी करने की योजना है. इसके साथ ही, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ब्लू इकोनॉमी, माउंटेन इकोनॉमी और सतत पर्यटन जैसे उभरते क्षेत्रों को भविष्य के विकास प्रेरक के रूप में स्थापित किया जा रहा है. कम विकसित देशों (एलडीसी) और लैंड-लॉक वाले देशों की विकास संबंधी ज़रूरतों का समर्थन करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित बिम्सटेक मुक्त व्यापार क्षेत्र समावेशी और न्यायसंगत बना रहे.
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित बिम्सटेक मुक्त व्यापार क्षेत्र समावेशी और न्यायसंगत बना रहे.
भोजन और आजीविका सुरक्षा भी केंद्रीय महत्व रखती है. इसके लिए कृषि, मत्स्य पालन और पशुपालन के सामूहिक आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया गया है. उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के उद्देश्य से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और बेहतर आपूर्ति श्रृंखलाओं का उपयोग किया जा रहा है.
‘मज़बूत बिम्सटेक’ पिलर स्थिरता, हर तरह की स्थिति से निपटने की तैयारियों और संस्थागत मज़बूती को दर्शाता है. कोविड-19 महामारी से मिला अनुभव ये स्पष्ट करता है कि सशक्त सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियां कितनी ज़रूरी हैं. बिम्सटेक के सदस्य पारंपरिक चिकित्सा में बढ़ते सहयोग के साथ संयुक्त क्षेत्रीय स्वास्थ्य रणनीति की दिशा में काम कर रहे हैं. जलवायु कार्रवाई भी उनके एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं. भारत में मौसम और जलवायु के लिए बिम्सटेक केंद्र और ऊर्जा केंद्र जैसी संस्थाओं की स्थापना की जा रही है. ये पर्यावरणीय स्थिरता और रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाने की बढ़ती प्रतिबद्धताओं को दिखाती है.
अगर मानव सुरक्षा के संबंध में बात करें तो विज़न दस्तावेज़ में साइबर क्राइम, नशीले पदार्थों और मानव तस्करी के साथ ही दूसरे बहुउद्देशीय ख़तरों को रोकने के लिए सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है. गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नए तंत्र की स्थापना की जा रही है. गृह मंत्रियों और स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक जैसे संस्थागत तंत्र इस तरह की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सकते हैं.
विज़न स्टेटमेंट का तीसरा पिलर ‘ओपन बिम्सटेक’ एक साझा क्षेत्रीय पहचान बनाने की ख्वाहिश रखता है. ऐसी साझा पहचान, जो समावेशिता, संवाद, और लोगों से लोगों के जुड़ाव पर आधारित हो. सांस्कृतिक आदान-प्रदान, युवा-शैक्षणिक सहयोग और नवाचार इस खुले संबंधों की नींव बनाते हैं. पर्यटन, विशेष रूप से थीम वाले सर्किट जैसे कि बौद्ध धर्म, मंदिर और इको-टूरिज्म को सांस्कृतिक कूटनीति और आर्थिक संपर्क का एक माध्यम माना जाता है. अगर इस तरह के पर्यटन को जल्द शुरू किया जाता है तो इससे बिम्सटेक क्षेत्र की विविध विरासत और सॉफ्ट पावर की संभावनाओं का लाभ उठाया जा सकता है.
बिम्सटेक चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों में उसे पर्यवेक्षक की भूमिका मिले. ये कदम जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर वैश्विक संवादों को आकार देने और प्रतिक्रिया देने की उसकी आकांक्षा के अनुरूप हैं.
बिम्सटेक शिक्षा क्षेत्र में सहयोग, विशेष रूप से विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहता है. इसके साथ ही, युवा उद्यमिता और रचनात्मक उद्योगों के लिए समर्थन जुटाना भी उसका उद्देश्य है. इतना ही नहीं, बिम्सटेक अपनी वैश्विक भूमिका बढ़ाने की भी कोशिश कर रहा है. बिम्सटेक चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों में उसे पर्यवेक्षक की भूमिका मिले. ये कदम जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर वैश्विक संवादों को आकार देने और प्रतिक्रिया देने की उसकी आकांक्षा के अनुरूप हैं. खुला बिम्सटेक ढांचा केवल सीमाओं के पार गतिशीलता को बढ़ावा देने के बारे में नहीं है. इसके ज़रिए वो एक भागीदार, लोकतांत्रिक और वैश्विक रूप से जुड़े क्षेत्रीय आर्किटेक्चर का निर्माण भी करना चाहता है.
बिम्सटेक के प्रोसपेरस, रेसिलिएंट और ओपन यानी ‘पीआरओ’ का जो महत्वाकांक्षी रोडमैप चुना है, उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कई क्षेत्रों में मज़बूती की आवश्यकता है. सबसे पहली समस्या संस्थागत क्षमता और वित्तपोषण तंत्र को लेकर अस्पष्टता की है. इस संगठन ने बिम्सटेक मास्टर प्लान फॉर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी और ग्रिड इंटरकनेक्शन मास्टर प्लान जैसी पहल तो शुरू की, लेकिन इसके लिए एक समर्पित विकास कोष या स्पष्ट वित्तपोषण संरचना का अभाव है. इनकी अनुपस्थिति इस तरह की योजनाओं की व्यवहार्यता के बारे में गंभीर चिंताएं उठाती हैं.
दूसरे, सदस्य देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों को कम महत्व दिया गया है. म्यांमार में लगातार तनाव और अस्थिरता बनी हुई है. म्यांमार और बांग्लादेश के बीच रोहिंग्या संकट जैसे अनसुलझे द्विपक्षीय मुद्दे चिंता की बात हैं. ढाका में शासन में परिवर्तन के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव क्षेत्रीय एकता के लिए बड़ा ज़ोखिम पैदा करती है. फिर भी विज़न स्टेटमेंट में इन तनावों को कम करने के लिए संघर्ष-समाधान ढांचे या विश्वास निर्माण के उपायों का प्रस्ताव नहीं है.
मानव सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए महिला और बच्चों को इसमें स्पष्ट रूप से शामिल करना ज़रूरी है. ये विज़न दस्तावेज़ को समृद्ध और समावेशी विकास को सुनिश्चित करेगा. लैंगिक समानता को लेकर संवेदनशील नीतियां और कमज़ोर समुदायों के लिए लक्षित हस्तक्षेप सामाजिक लचीलापन और मज़बूती बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.
इसके अलावा, डिजिटल और ब्लू इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों पर ज़ोर देना संरचनात्मक असमानताओं को अपर्याप्त रूप से संबोधित करता है. इसमें सबसे खास है डिजिटल विभाजन, पर्यावरणीय संबंधी कमज़ोरियां और नियामक असंगतियां. इसके अलावा बाहरी देशों और अंतर्राष्ट्रीय मंचों के साथ बिम्सटेक की रणनीति क्या हो, इस बारे में अस्पष्टता बनी हुई है. वैश्विक संस्थानों, वित्तीय एजेंसियों और बहुउद्देशीय मंचों के साथ भागीदारी को लेकर ज़्यादा स्पष्टता होनी ज़रूरी है. बिम्सटेक की विश्वसनीयता बढ़ाने, संसाधन सुरक्षित करने और घोषणाओं को कार्य रूप देने की तरफ बढ़ने के लिए ऐसा किया जाना आवश्यक है.
बिम्सटेक विज़न स्टेटमेंट इस क्षेत्र में सहयोग और विकास को बढ़ावा देने की दृष्टि से एक मील का पत्थर है. ऐसे में अब इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्यों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाना चाहिए. छठे शिखर सम्मेलन में इसके अलावा कुछ अन्य प्रशासनिक सुधारों को भी अपनाया गया, जैसे कि ‘बिम्सटेक तंत्र के लिए प्रक्रियाओं के नियमों को अपनाना और ‘भविष्य की दिशा पर प्रसिद्ध व्यक्तियों के समूह की रिपोर्ट को लागू करना’. ये सब बातें क्षेत्रीय एकता की भावना में योगदान करती हैं. मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए ये विशेष रूप से ज़रूरी है, क्योंकि एक तरफ जहां भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) का भविष्य पहले से कहीं अधिक निराशाजनक दिख रहा है. 2016 में पाकिस्तान में हुए 19वें सार्क शिखर सम्मेलन के विफल होने के बाद इसके प्रमुख सदस्य देश—भारत, बांग्लादेश और म्यांमार—पूर्व की ओर मुड़ने लगे. इससे बिम्सटेक की सामरिक प्रासंगिकता और ज़्यादा बढ़ गई है.
संभावनाएं भारत-पाकिस्तान के बीच फिर से तनाव बढ़ने के बाद सार्क के दोबारा मज़बूत होने की संभावना करीब-करीब ख़त्म हो गई है. 22 अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकवादी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्षेत्रीय सहयोग के लिए बिम्सटेक पर निर्भरता कई गुना बढ़ गई है.
हालांकि, बिम्सटेक की आंतरिक चुनौतियां बनी हुई है. ढाका में अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध खराब होते जा रहे हैं. म्यांमार गृहयुद्ध में उलझा हुआ है. सभी सदस्य देशों के बीच कुछ साझा लक्ष्य और राजनीतिक इच्छाशक्ति बिम्सटेक के प्रभावी रूप से कार्य करने के लिए एक आवश्यक न्यूनतम अपेक्षा है.
ये देखना उत्साहजनक है कि आपसी मतभेदों के बावजूद बिम्सटेक के सदस्य देश क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए संस्थागत सुधारों की कोशिश कर रहे हैं.
वैसे ये देखना उत्साहजनक है कि आपसी मतभेदों के बावजूद बिम्सटेक के सदस्य देश क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए संस्थागत सुधारों की कोशिश कर रहे हैं. भविष्य के लिए एक साझा दृष्टिकोण का खाका तैयार किया जा चुका है. फिर भी, दस्तावेज़ से लेकर ज़मीन पर कार्यान्वयन की यात्रा अभी बाकी है. इस विज़न दस्तावेज़ की सफलता प्रभावी तंत्र की स्थापना, राजनीतिक प्रतिबद्धता और ज़रूरत के हिसाब से बदलने वाली नीतियों पर निर्भर करेगी.
श्रीपर्णा बनर्जी ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम में एसोसिएट फेलो हैं.
सोहिनी बोस ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम में एसोसिएट फेलो हैं.
अंसुआ बसु रे चौधरी ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के नेबरहुड इनीशिएटिव में सीनियर फेलो हैं.
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Sohini Bose is an Associate Fellow at Observer Research Foundation (ORF), Kolkata with the Strategic Studies Programme. Her area of research is India’s eastern maritime ...
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