महासागरों को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती कानूनों की कमी नहीं बल्कि देशों और संस्थाओं के बीच तालमेल की कमी है. समुद्री विरासत, संग्रहालय, नई तकनीक और समान भागीदारी के जरिए दुनिया एक ऐसा मॉडल बना सकती है जो समुद्र, पर्यावरण और लोगों- तीनों का भविष्य सुरक्षित करें. जानिए कैसे..
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महासागरों के सामने सबसे गंभीर शासन चुनौती रूपरेखाओं की कमी नहीं है; यह विखंडन है. महासागरों से जुड़ी बड़ी समस्याएं जैसे प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ना और समुद्री खुदाई बहुत तेजी से बढ़ रही हैं. ये परेशानियां आपस में जुड़ी हैं, लेकिन इन्हें संभालने वाले अलग-अलग देश, कानून और सरकारी विभाग मिलकर काम नहीं कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, जब कोई विदेशी जहाज किसी छोटे देश में अवैध शिकार करता है, तो विभागों में आपसी तालमेल न होने से कोई भी जवाबदेही नहीं लेता. इस विखंडन को रोकने के लिए अमीर और गरीब देशों को बराबरी पर आकर पर्यावरण, सुरक्षा और सामाजिक समानता को एक साथ जोड़ना होगा. नतीजा यह होता है कि नियम होने के बावजूद नुकसान हो जाता है. प्रत्येक शासी निकाय यह दावा कर सकता है कि उसने अपना काम किया - फिर भी मछलियाँ गायब हो जाती हैं, समुदाय अपना प्राथमिक भोजन स्रोत खो देता है, और इस घटना के लिए कोई भी जवाबदेह नहीं होता है.
समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) और इसके ऐतिहासिक 2023 के कार्यान्वयन समझौते, हाई सीज़ ट्रीटी द्वारा समर्थित मौजूदा अंतरराष्ट्रीय रूपरेखाएँ महत्वपूर्ण कानूनी संरचनाएँ प्रदान करती हैं, लेकिन उनका कार्यान्वयन असंगत बना हुआ है. दुनिया के समुद्रों को बचाने के लिए 17 जनवरी, 2026 को 'हाई सीज़ ट्रीटी' (एक अंतरराष्ट्रीय समझौता) लागू हुई. इसका लक्ष्य 2030 तक 30% खुले समुद्र को सुरक्षित करना है, लेकिन अभी सिर्फ 1% हिस्सा ही सुरक्षित है. अमेरिका ने इस समझौते को बनाने में मदद की, पर वहां की संसद (सीनेट) ने इसे अभी तक पूरी मंजूरी नहीं दी है. उल्टा, ट्रंप प्रशासन उसी समुद्री हिस्से में खुदाई को बढ़ावा दे रहा है. पुरानी नावें और खराब बंदरगाह प्रकृति और इंसानों दोनों के लिए खतरा बन रहे हैं.
जब कोई विदेशी जहाज किसी छोटे देश में अवैध शिकार करता है, तो विभागों में आपसी तालमेल न होने से कोई भी जवाबदेही नहीं लेता. इस विखंडन को रोकने के लिए अमीर और गरीब देशों को बराबरी पर आकर पर्यावरण, सुरक्षा और सामाजिक समानता को एक साथ जोड़ना होगा.
किसी भी प्रभावी समाधान के केंद्र में समानता होनी चाहिए. अमीर देशों के लिए अत्यधिक मत्स्य पालन को सीमित करना या सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना नीतिगत रूप से एक उचित विकल्प लग सकता है. लेकिन वैश्विक दक्षिण के समुदायों के लिए, जहाँ अवैध मछली पकड़ने के कारण खाद्य सुरक्षा खतरे में है और गरीब देशों के लोग समुद्र से जुड़े खतरों के कारण अपना घर छोड़ने पर मजबूर हैं, जिससे उनके लिए पर्यावरण की बड़ी बातें एक विलासिता जैसी हैं. वहीं, अमेरिका जैसे देशों में सैकड़ों पर्यावरण संगठन (NGOs) मिलकर काम करने के बजाय अलग-अलग काम कर रहे हैं और थोड़े से संसाधनों के लिए आपस में लड़ रहे हैं. इस समस्या का एकमात्र समाधान यह है कि अमीर और गरीब देश बराबरी के स्तर पर एक साथ आएं, और सुरक्षा, पर्यावरण तथा सामाजिक समानता को मिलाकर एक मजबूत सिस्टम बनाएं.
समुद्री संग्रहालय आम लोगों के भरोसेमंद स्थान होते हैं. ये किसी सरकारी विभाग या कंपनी की तुलना में अलग-अलग लोगों को एक साथ लाने, पर्यावरण और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुश्किल मुद्दों को आसान भाषा में समझाने तथा जनता को जागरूक करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. सैन डिएगो का मैरीटाइम म्यूजियम, जेनोआ के गैलाटा म्यूजियो डेल मारे के साथ साझेदारी में, बिल्कुल इसी तरह का एक मंच बनाने के लिए काम कर रहा है. एक ऐसा दोहराया जाने योग्य और स्केलेबल ‘BlueHQ’ मॉडल, जिसे दुनिया भर के समुद्री संग्रहालयों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के संस्थानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
दुनिया भर के 250 से अधिक सदस्य संस्थानों के एक नेटवर्क - इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैरीटाइम म्यूजियम के भीतर नेतृत्वकारी भूमिकाओं का लाभ उठाते हुए, और लंदन में लॉयड रजिस्टर्ड फाउंडेशन जैसे विरासत संगठनों, सैन डिएगो और जेनोआ के बंदरगाह प्राधिकरणों, ब्लू इकोनॉमी के नेताओं, प्रशिक्षण और विज्ञान संस्थानों, तथा सैन डिएगो और मैक्सिको के स्वदेशी ज्ञान धारकों के साथ मिलकर काम करते हुए, यह प्रयास भविष्य में बेहतर निर्णय लेने में सहायता के लिए अतीत (इतिहास) की ओर देखता है. इस वैश्विक प्रोजेक्ट के तहत, स्थानीय लोगों और विभागों को अलग-अलग रखने के बजाय पर्यावरण से जुड़े एक बड़े प्लान में शामिल किया जाएगा. इसके लिए साल 2026 में 3 साल का एक प्रोग्राम शुरू होगा, जिसमें एक फ्री डिजिटल टूलकिट दी जाएगी. इसकी मदद से कोई भी संस्था अपने बजट और जरूरत के हिसाब से इसे इस्तेमाल कर सकेगी.
किसी सरकारी विभाग या कंपनी की तुलना में अलग-अलग लोगों को एक साथ लाने, पर्यावरण और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुश्किल मुद्दों को आसान भाषा में समझाने तथा जनता को जागरूक करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. सैन डिएगो का मैरीटाइम म्यूजियम, जेनोआ के गैलाटा म्यूजियो डेल मारे के साथ साझेदारी में, बिल्कुल इसी तरह का एक मंच बनाने के लिए काम कर रहा है
कार्यबल विकास इस समानता की चुनौती का एक महत्वपूर्ण और अक्सर अनदेखा किया जाने वाला पहलू है. नीली अर्थव्यवस्था में जहाज निर्माण, समुद्री इंजीनियरिंग, महासागर विज्ञान, संरक्षण, रोबोटिक्स, लॉजिस्टिक्स और स्वच्छ ऊर्जा जैसे करियर शामिल हैं, जिनमें से सभी के लिए सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रबंधन दोनों में मजबूत नींव की आवश्यकता होती है. केवल महासागर-केंद्रित क्षेत्र - जिसमें मत्स्य पालन और समुद्री पर्यटन शामिल हैं - 2050 तक वैश्विक स्तर पर 9.3 करोड़ (93 million) अतिरिक्त नौकरियां पैदा कर सकते हैं, फिर भी इसके रास्ते में आने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों में कौशल की कमी, विशेष रूप से विकासशील देशों में अपर्याप्त प्रशिक्षण और शैक्षिक संसाधन, तथा अपर्याप्त धन और संस्थागत क्षमता शामिल हैं. समुद्री संग्रहालय ऐसे व्यवस्थित रास्ते बनाने में मदद कर सकते हैं जो शुरुआती प्रदर्शन से शुरू होकर इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप (शिक्षुता) और कम्युनिटी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा उद्योगों के साथ साझेदारी तक जाते हैं - जिससे एक विविध, वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यबल को तैयार किया जा सके जो जटिल महासागरीय प्रणालियों के भीतर जिम्मेदारी से काम करना जानता हो.
समुद्री इतिहास अपने आप में इस प्रयास में एक शक्तिशाली संसाधन है. इतिहास की पुरानी गलतियों, पर्यावरण के नुकसान और नई तकनीकों से सीखकर हम भविष्य के बड़े खतरों से बच सकते हैं. ये पुराने अनुभव सरकारी विभागों को मिलकर काम करने और एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति बनाने में मदद करते हैं.
एक चिंतित जनता, जिसका एक स्थायी भविष्य में विश्वास कम हो रहा है, के लिए संग्रहालय कहानीकारों के रूप में समस्या को भविष्य के समाधानों के साथ जोड़ सकते हैं. 'ओशिनस: एलेक्सिस रॉकराम' नामक प्रदर्शनी ने समय के साथ महासागरीय स्वास्थ्य पर समुद्री उद्योग के प्रभावों पर केंद्रित विशेष कलाकृतियों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की. प्रदर्शनी में महासागरों के खतरों को दिखाने के साथ-साथ उनके तकनीकी समाधान भी पेश किए गए. इसे देखकर आम लोग बहुत प्रेरित हुए और उन्होंने पर्यावरण को बचाने तथा नई समुद्री तकनीकों (नीली अर्थव्यवस्था) में निवेश और सकारात्मक बदलाव की संभावना देखी. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की नवीकरणीय ईंधन और सेल-असिस्ट (पाल-सहायता) तकनीक के माध्यम से डीकार्बोनाइजेशन रणनीति को शामिल करके, एमएमएसडी 19वीं सदी के नवाचारों को 21वीं सदी से जोड़ रहा है, जिससे इन समाधानों का अर्थ समझ में आता है और इनमें निवेश की पुष्टि होती है.
समुद्र की देखरेख के नियमों और विभागों का आपस में बंटा होना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इस परेशानी को दूर किया जा सकता है. इसके लिए हमें एक ऐसे नए तरीके (मॉडल) की जरूरत है जो बांटने के बजाय सबको जोड़ने का काम करें. यह तरीका ऐसा होना चाहिए जो पर्यावरण को बचाने, समुद्री जहाजों की सुरक्षा करने और समाज के गरीब-अमीर सबको बराबरी का हक देने की बातों को एक साथ लेकर चले.
साथ ही, यह तरीका स्थानीय लोगों की ज़मीनी ज़रूरतों को पूरा करता हो. जब हम पुराने अनुभवों (विरासत) को नई तकनीकों से जोड़ेंगे, सुरक्षा के साथ पर्यावरण का ध्यान रखेंगे और अच्छी शिक्षा देकर युवाओं को काम सिखाएंगे (रोजगार विकास), तो पूरी दुनिया के देश एक साथ मिलकर काम कर पाएंगे. यह तरीका सभी देशों को सही ढंग से समुद्र संभालने की प्रेरणा देगा.
क्रिस्टीना ब्रोफी कैलिफोर्निया के सैन डिएगो स्थित मैरीटाइम म्यूजियम की अध्यक्ष और सीईओ हैं और इंटरनेशनल काउंसिल फॉर मैरीटाइम म्यूजियम (आईसीएमएम) और टीएमए ब्लू टेक की बोर्ड सदस्य हैं.
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Christina Connett Brophy, PhD, is the President and CEO of the Maritime Museum of San Diego, California and a former senior executive at the Mystic ...
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