AI अब सिर्फ़ ऐप या रोबोट में नहीं बल्कि दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में भी घुस रहा है. अमेरिका, रूस और चीन की परमाणु ताकतों में इसका असर रणनीतिक स्थिरता और हथियारों की होड़ दोनों पर दिख रहा है.
उभरती तकनीकों का अलग-अलग एकीकरण (जिसका इस्तेमाल सहायक भूमिका से लेकर विशेष हथियार प्रणाली तक फैला हुआ है) रणनीति के पारंपरिक और परमाणु क्षेत्रों के बीच के अंतर को धुंधला कर रहा है. ये नए परमाणु युग की एक प्रमुख विशेषता है. हथियारों की होड़ में उलझे अमेरिका, रूस और चीन के द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने से सामरिक स्थिरता की गतिशीलता प्रभावित हो रही है. परमाणु क्षेत्र (विशेष रूप से परमाणु कमांड, कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन यानी NC3 ढांचे) के साथ-साथ गैर-परमाणु रणनीतिक हथियारों (NNSW) में AI को शामिल करने से परमाणु संपन्न देशों के लिए नई असुरक्षा और चुनौतियां पैदा हुई हैं. साइबर हमलों, गैर-परमाणु इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स-बेस्ड अटैक या AI-सक्षम हाइपरसोनिक मिसाइल के प्रति AI-एकीकृत सिस्टम की कमज़ोरी अलग-अलग देशों को पहले ही विरोधियों को रोकने और बढ़ी हुई प्रतिरोधक क्षमता के लिए हथियारों की एक तेज़ रेस की तरफ ले जा रही है. परमाणु और गैर-परमाणु प्रणालियों में AI एकीकरण की सीमा महत्वपूर्ण है क्योंकि ये परमाणु संपन्न देशों के बीच सामरिक स्थिरता के तत्वों को प्रभावित करेगी. प्रतिरोध, तनाव में कमी और संकट के समय निर्णय लेना नीति निर्माताओं के लिए गंभीर विषय बन जाते हैं.
परमाणु क्षेत्र (विशेष रूप से परमाणु कमांड, कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन यानी NC3 ढांचे) के साथ-साथ गैर-परमाणु रणनीतिक हथियारों (NNSW) में AI को शामिल करने से परमाणु संपन्न देशों के लिए नई असुरक्षा और चुनौतियां पैदा हुई हैं.
‘सामरिक स्थिरता’ शब्द का उदय शीत युद्ध के शुरुआती दशकों में हुआ. इसका प्रयोग परमाणु रणनीति के क्षेत्र में पूर्ववर्ती सोवियत संघ और अमेरिका के बीच सामरिक बातचीत की प्रकृति को परिभाषित करने के लिए किया जाता था. सामान्य भाषा में कहें तो सामरिक स्थिरता दो मुख्य बिंदुओं पर आधारित है: पहले परमाणु हमला (संकट स्थिरता) शुरू करने के लिए प्रोत्साहन की कमी और फिर परमाणु बलों को तैयार करने की रोकथाम (हथियारों की होड़ की स्थिरता). मूल रूप से इसकी परिकल्पना परमाणु प्रतिरोध को बनाए रखने पर रणनीतिक सोच के लिए एक वैचारिक ढांचे के रूप में की गई थी. लेकिन समय के साथ ‘प्रोत्साहन की कमी’ को लेकर व्यक्तिपरकता (सब्जेक्टिविटी) की धारणा परमाणु ताकत से संपन्न देशों के बीच स्थिरता को ख़तरे में डालने वाले एक विरोधाभासी तत्व के रूप में उभरी. विभिन्न देशों के द्वारा अलग-अलग व्याख्या के परिणामस्वरूप गलत आकलन का ख़तरा बढ़ जाता है जिसका रक्षा और प्रतिरोध पर अस्थिर करने वाला प्रभाव पड़ता है. बदलते परमाणु परिदृश्य में सामरिक स्थिरता को एक बौद्धिक और नीतिगत उपकरण के रूप में देखा जा सकता है. इससे ये विश्लेषण किया जा सकता है कि तकनीकी रूप से उन्नत हथियार कैसे प्रतिरोध को मज़बूत या कमज़ोर कर सकते हैं. नई तकनीकों वाला नया परमाणु युग, रणनीतिकारों के साथ-साथ नीति निर्माताओं के लिए सामरिक स्थिरता की शीत युद्धकालीन सोच पर नई व्याख्या और प्रभाव लाता है.
आज के समय में पारंपरिक क्षेत्रों में युद्ध के सीमित या पूरी तरह परमाणु युद्ध में बदलने की ज़्यादा आशंका है. सामरिक स्थिरता के संदर्भ में भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और अमेरिका, रूस एवं चीन के बीच हथियार नियंत्रण पर सर्वसम्मति की कमी का चलन बढ़ गया है. इसके परिणामस्वरूप प्रतिरोध की विफलता के कारण हथियारों की होड़ का ख़तरा मंडरा रहा है. AI में प्रगति की वजह से अलग-अलग देश अपने प्रतिरोध को मज़बूत करने के लिए विकल्प तलाश रहे हैं जो तेज़ी से युद्ध की ओर ले जा रहा है.
नए परमाणु युग के सामरिक ढांचे में AI का एकीकरण परमाणु और पारंपरिक युद्ध के बीच सीमाओं को धुंधला कर रहा है जिससे संकट के समय तनाव बढ़ने का ख़तरा बढ़ रहा है.
लाभ के मामले में देखें तो NC3 में AI अर्ली वॉर्निंग और इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकॉनेसेंस (ISR) को बेहतर बना सकता है जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है. हालांकि युद्ध के उद्देश्यों को लेकर उभरती तकनीकों (विशेष रूप से AI) का फैलाव अलग-अलग देशों को अपने दुश्मनों की तुलना में पहले आगे बढ़ने की तरफ ले जा रहा है. इससे हथियारों की होड़ की स्थिरता प्रभावित होती है. किसी देश के द्वारा NC3 के ढांचे में AI को जोड़ने से परमाणु हथियारों की तैनाती के मामले में तैयारी का भी पता चलता है. इसके साथ-साथ AI गैर-परमाणु रणनीतिक हथियारों के द्वारा दुश्मन की परमाणु संरचना को निशाना बनाने की क्षमता को भी बढ़ा सकता है. इससे दुश्मन को भी ऐसा ही करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है. परमाणु हथियारों से संपन्न देशों के लिए सुरक्षा से जुड़ा असमंजस पैदा करके संकट की स्थिरता पर अस्थिरता का प्रभाव उत्पन्न किया जाता है. अमेरिका के द्वारा AI एकीकरण पहले से मौजूद ‘काउंटरफोर्स टारगेटिंग’ रणनीति के साथ मिलकर दुश्मनों के ख़िलाफ़ उसकी बढ़त को और मज़बूत कर सकता है. दूसरी तरफ चीन और रूस भी संकट के दौरान इसी तरह का प्रभाव पैदा करने के लिए पारंपरिक हथियार प्रणालियों के साथ AI को जोड़कर इस लाभ को बेअसर करने का प्रयास कर रहे हैं. वास्तविक स्थिति में देखें तो किसी हमला करने वाले देश के द्वारा अपने दुश्मन की परमाणु संरचना के विरुद्ध गैर-परमाणु रणनीतिक हथियारों का उपयोग करने के लिए मिलने वाला प्रोत्साहन भी निर्णय लेने वालों के सामने मुश्किल हालात पैदा कर देंगे.
तालिका 1: अमेरिका, रूस और चीन में AI सक्षम प्रणालियां
स्रोत: SIPRI, War On The Rocks, CNAS, Global Times
AI आधारित NC3 गंभीर साइबर हमलों के प्रति असुरक्षित है. संकट या संकट से पहले की स्थिति में इसका काम-काज ठप हो सकता है. साइबर आधारित NNSW की अंतर्निहित ‘रणनीतिक-सामरिक दोहरी क्षमता’ दुश्मन के बुनियादी ढांचे के ख़िलाफ़ प्रभाव आधारित परिणाम पैदा करती है. इस लक्ष्य की दिशा में आक्रामक या पूर्व नियोजित हमले AI सिस्टम को गलत फैसले लेने के लिए गुमराह करने में सक्षम है. इवेसिव (कपटपूर्ण) अटैक AI मॉडल में खामियों का फायदा उठाकर NC3 ढांचे में गलत पहचान की तरफ ले जा सकता है. गैर-परमाणु EMP (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स) अटैक NC3 के हार्डवेयर घटक के साथ-साथ सिस्टम की स्वायत्तता को भी बाधित कर सकता है.
AI में हो रहा विकास और परमाणु संपन्न देशों के द्वारा उसका एकीकरण अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण का हिस्सा है. इस घटनाक्रम का शांति काल और संकट काल- दोनों ही परिस्थितियों में निर्णय लेने पर असर हो सकता है जिससे रणनीतिक स्थिरता पर तीन तरीकों से प्रभाव पड़ सकता है.
AI की प्रगति वाला नया परमाणु युग अलग-अलग देशों को प्रतिरोध, संकट प्रबंधन और हथियार नियंत्रण दृष्टिकोण पर फिर से विचार करने के लिए चुनौतियां और प्रोत्साहन- दोनों पेश करता है ताकि अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़तरों को कम किया जा सके.
पहला, AI की प्रगति अगर क्रांतिकारी बदलाव नहीं ला रही है तब भी प्रतिरोध को बनाए रखने के लिए मानकों को फिर से परिभाषित कर रही है. ये परमाणु प्रतिरोध पर शीत युद्ध के समय की सोच की सीमाओं को उजागर कर रही है और इसके साथ-साथ परमाणु माहौल में युद्ध में सक्षम बना रही है. दूसरा, प्रतिरोध के बदलते रूप के साथ तनाव बढ़ने और प्रतिरोध की विफलता की समस्या अधिक जटिल और गंभीर हो जाती है. तीसरा, नए परमाणु युग में AI मानव स्तर की निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिए नई प्रकार की चुनौतियों पेश करता है क्योंकि वो अधिक जटिल, संभावित संकट की स्थिति को बढ़ाता है जिनके लिए सटीकता, गति और समय से संबंधित फैक्टर की दिक्कतों के बावजूद सोचने, ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने और कार्रवाई करने की आवश्यकता होती है.
रणनीतिक माहौल में काफी बदलाव हुआ है जो शीत युद्ध के युग से अलग है. इसमें अमेरिका, चीन और रूस के बीच रणनीतिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा दिख रही है जिसका व्यापक रणनीतिक स्थिरता पर असर होगा. अतीत के दशकों की तरह रणनीति का परमाणु क्षेत्र तकनीकी प्रभावों में बदलाव से अछूता नहीं रहा है. इससे अलग-अलग देशों के सामने प्रतिरोध को मज़बूत बनाने और उसे बनाए रखने के लिए चुनौतियां पैदा हो रही हैं. नए परमाणु युग के सामरिक ढांचे में AI का एकीकरण परमाणु और पारंपरिक युद्ध के बीच सीमाओं को धुंधला कर रहा है जिससे संकट के समय तनाव बढ़ने का ख़तरा बढ़ रहा है. ये स्थिति अलग-अलग देशों के बीच संकट की स्थिरता और हथियारों की होड़ की स्थिरता- दोनों के लिए ख़तरा पैदा कर रही है.
युद्ध की स्थिति में दुश्मन के द्वारा पहले हमला किए जाने का डर संकट की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा भय का कारण और अस्थिरता पैदा करने वाला बना हुआ है. प्रतिरोध की क्षमता बढ़ाने के लिए AI एकीकरण में पहले आगे बढ़ने का फायदा हथियारों की होड़ की स्थिरता पर नकारात्मक असर डालता है. AI की प्रगति वाला नया परमाणु युग अलग-अलग देशों को प्रतिरोध, संकट प्रबंधन और हथियार नियंत्रण दृष्टिकोण पर फिर से विचार करने के लिए चुनौतियां और प्रोत्साहन- दोनों पेश करता है ताकि अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़तरों को कम किया जा सके.
राहुल रावत ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सामरिक अध्ययन कार्यक्रम में अनुसंधान सहायक हैं।
नेहा कौशल ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सामरिक अध्ययन कार्यक्रम में पूर्व प्रशिक्षु हैं।
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Rahul Rawat is a Research Assistant with ORF’s Strategic Studies Programme (SSP). He also coordinates the SSP activities. His work focuses on strategic issues in the ...
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Neha Kaushal is a former intern with the Strategic Studies Programme at Observer Research Foundation ...
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