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Published on May 21, 2026 Updated 3 Days ago

माली की रोबोट्समाली परियोजना ने AI की मदद से स्थानीय भाषा में किताबें बनाकर बच्चों की पढ़ाई आसान की और साक्षरता बढ़ाई. लेख से समझिए कि कैसे AI शिक्षा के साथ भाषा और संस्कृति को भी मजबूत बना रहा है. 

रोबोट्समाली: शिक्षा में AI का मानवीय चेहरा

2025 की शुरुआत में यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट ने मातृभाषा में शिक्षा को फंड के मामले में सबसे कम में से एक लेकिन वैश्विक शिक्षण संकट को कम करने के लिए सबसे प्रभावशाली तरीका बताया. शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा को संस्थागत मान्यता देना उस भाषा को बोलने वालों के बीच निरक्षरता से निपटने के लिए ज़रूरी है. लेकिन ये प्रक्रिया अलग-अलग साहित्यिक संग्रह की उपलब्धता पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर है. स्थानीय भाषाओं में साहित्य की कमी शिक्षा से जुड़ी बाधाओं को बढ़ाती है क्योंकि छात्र अपरिचित भाषाओं से जूझते हैं जिससे भटकाव और ड्रॉपआउट रेट बढ़ता है. इस तरह का साहित्य भाषाई विविधता, सांस्कृतिक संदर्भ और सामाजिक-भाषाई बारीकी का प्रमाणिक अनुभव प्रदान करता है जिससे पढ़ाई की निपुणता, आलोचनात्मक सोच और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा मिलता है. 

लेकिन इस तरह का संग्रह तैयार करने में काफी समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है, विशेष रूप से कम संसाधन वाली उन भाषाओं में जिनका प्रतिनिधित्व मुद्रित सामग्री में कम है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इसका एक क्रांतिकारी समाधान प्रस्तुत करता है क्योंकि ये जेनरेटिव मॉडल और अनुवाद के ज़रिए सांस्कृतिक रूप से अनुकूल साहित्य के तेज़ और व्यापक निर्माण को सक्षम बनाता है. लार्ज लेंग्वेज मॉडल जैसे AI टूल कहानियां गढ़ सकते हैं, उनका अनुवाद किसी भी भाषा में कर सकते हैं और उन्हें ज़रूरी तस्वीरों के साथ जोड़ सकते हैं. ये सभी काम किसी इंसान की निगरानी में होते हैं ताकि सटीकता और संवेदनशीलता सुनिश्चित की जा सके.   

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसका एक क्रांतिकारी समाधान प्रस्तुत करता है क्योंकि ये जेनरेटिव मॉडल और अनुवाद के ज़रिए सांस्कृतिक रूप से अनुकूल साहित्य के तेज़ और व्यापक निर्माण को सक्षम बनाता है. लार्ज लेंग्वेज मॉडल जैसे AI टूल कहानियां गढ़ सकते हैं, उनका अनुवाद किसी भी भाषा में कर सकते हैं और उन्हें ज़रूरी तस्वीरों के साथ जोड़ सकते हैं.

AI से लैस मातृभाषा में शिक्षा का एक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण रोबोट्समाली है. 2023 में माली ने जब फ्रेंच की जगह स्थानीय भाषाओं (जैसे कि बम्बारा) की तरफ बदलाव किया तो रोबोट्समाली ने AI का उपयोग करके एक साल के भीतर 107 सांस्कृतिक रूप से आधारित बच्चों की किताबें तैयार की जिन्हें 300 से ज़्यादा छात्रों को बांटा गया. इससे साक्षरता को बढ़ावा मिला, समझ आसान हुई और भाषाई विरासत का संरक्षण हुआ. इस विश्लेषण का समय महत्वपूर्ण है क्योंकि AI अनुमान लागत में गिरावट, बहुभाषी मॉडल में सुधार और दान देने वालों की बढ़ती दिलचस्पी ने खंडित, अपर्याप्त रूप से वित्तपोषित पायलट प्रोजेक्ट द्वारा ख़राब प्रथाओं को बढ़ावा देने से पहले इस मॉडल के मूल्यांकन, उन्हें बेहतर बनाने और विस्तार करने के लिए एक सीमित अवसर प्रदान किया है.  

फ्रेंच मॉडल से स्थानीय भाषाओं की ओर 

माली 64 प्रतिशत निरक्षरता दर (2924 के अनुसार) से जूझ रहा है और इसका मुख्य कारण शिक्षा के प्राथमिक माध्यम के रूप में फ्रेंच भाषा का व्यापक उपयोग है जबकि लोगों के बीच इसकी सीमित मौजूदगी है. ये भाषाई विसंगति माली के औपनिवेशिक इतिहास की देन है जो 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर 1960 में स्वतंत्रता तक फ्रांस के शासन के अधीन रहा. इस दौरान फ्रांस ने स्थानीय भाषाओं को हाशिये पर धकेल कर फ्रेंच को प्रशासनिक और शैक्षिक संपर्क भाषा के रूप में थोप दिया. 

माली की इस चुनौती को वहां की दयनीय सामाजिक-आर्थिक स्थिति और बढ़ाती है. मानव विकास सूचकांक में इसकी रैंकिंग सबसे निचले पायदान पर है. इसका कारण कम औद्योगीकरण और दूर-दराज के सीमाई इलाकों में सक्रिय जिहादी समूहों से सुरक्षा का ख़तरा है. माली 13 राष्ट्रीय भाषाओं को मान्यता देता है जिसमें बम्बारा लगभग 80 प्रतिशत लोग बोलते हैं. लेकिन ये भाषाएं मुख्य रूप से मौखिक हैं. लिखित साहित्य की लगभग पूरी तरह से अनुपस्थिति के कारण साक्षरता इन भाषाओं को बोलने वाले छोटे से हिस्से तक ही सीमित है. ये अभाव एक ऐसा चक्र बनाता है जिसमें मूलभूत मातृभाषा में शिक्षा लागू नहीं हो पाती क्योंकि लिखित निपुणता को प्रोत्साहित करने के लिए ज़रूरी पठन सामग्री काफी हद तक उपलब्ध नहीं है. 

रोबोट्समाली के शिक्षा के लिए AI कार्यक्रम के डिज़ाइन को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने में ‘विंडो एंड मिरर अप्रोच’ की मुख्य भूमिका है. ये एक शैक्षणिक ढांचा है जिसका उद्देश्य प्री-स्कूल से लेकर हाईस्कूल स्तर तक व्यापक पठन सामग्री तैयार करना है.

इसका समाधान करने के लिए रोबोट्समाली के शिक्षा के लिए AI प्रोजेक्ट ने एक व्यवस्थित समाधान का प्रस्ताव दिया. इसके तहत माली की भाषाओं को शिक्षा के व्यावहारिक माध्यम के रूप में स्थापित करने के लिए सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक साहित्य को तेज़ी से तैयार किया जाएगा, तेज़ी से विकसित हो रही साहित्यिक पहचान को बढ़ावा दिया जाएगा और साक्षरता को प्रोत्साहित किया जाएगा. इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अलग-अलग टूल के माध्यम से सामग्री के उत्पादन को तेज़ किया गया जो लेखकों के द्वारा तैयार किए गए वृत्तांतों को अंग्रेज़ी या फ्रेंच से बम्बारा जैसी स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करते हैं. 

विंडो एंड मिरर अप्रोच  

रोबोट्समाली के शिक्षा के लिए AI कार्यक्रम के डिज़ाइन को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने में ‘विंडो एंड मिरर अप्रोच’ की मुख्य भूमिका है. ये एक शैक्षणिक ढांचा है जिसका उद्देश्य प्री-स्कूल से लेकर हाईस्कूल स्तर तक व्यापक पठन सामग्री तैयार करना है. इसके परिणामस्वरूप जो साहित्य तैयार होता है, उसका उद्देश्य छात्रों के बीच अलग-अलग दिलचस्पी का समाधान करने और बढ़ावा देने के लिए विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करना भी था.  

‘विंडो’ वाला आयाम छात्रों को व्यापक दुनिया से परिचित कराता है जिससे वो स्थानीय सीमाओं से आगे देखते हैं और दुनिया को लेकर जागरूकता को बढ़ावा मिलता है. इसके विपरीत ‘मिरर’ पहलू साहित्यिक सामग्री को परिचित सांस्कृतिक संदर्भों में स्थापित करता है जिससे ये प्रासंगिक और समझने योग्य बन जाती है. 

कम संसाधन वाली भाषाओं में साहित्य तैयार करने के लिए जेनरेटिव AI के उपयोग में कई तरह की चुनौतियां हैं जिनका समाधान करने के लिए सावधानीपूर्वक रणनीति बनाने की आवश्यकता है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है विषय वस्तु की गुणवत्ता, सांस्कृतिक उपयुक्तता और शैक्षणिक प्रभाव को सुनिश्चित रखने के लिए मानवीय समीक्षा और बार-बार संशोधन की ज़रूरत. AI से तैयार कहानियों में अक्सर तथ्यात्मक अशुद्धियों, लहजे की विसंगतियों और सांस्कृतिक रूप से असंवेदनशील तत्वों को दूर करने के लिए पर्याप्त संपादन की आवश्यकता होती है. इन भाषाओं में धाराप्रवाह बोलने वाले लेखकों का अभाव इस समस्या को और बढ़ाता है. इसकी वजह से गुणवत्ता सुनिश्चित करने में काफी समय देना पड़ता है और खर्च करना पड़ता है. 

वैश्विक उदाहरण के ज़रिए विस्तार

सब-सहारा अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में सरकारें शिक्षा में यूरोपीय भाषाओं के औपनिवेशिक काल के दबदबे को तेज़ी से कम कर रही हैं. 2023 में तंज़ानिया ने स्वाहिली को पढ़ाई के प्राथमिक माध्यम के रूप में मज़बूत किया. इथियोपिया ने लंबे समय से अफान ओरोमू और अमहरिक जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिक शिक्षा में अनिवार्य बनाया है. भारत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पांचवी क्लास तक मातृभाषा में पढ़ाई को अनिवार्य बनाती है. इसकी वजह से दर्जनों अनुसूचित और जनजातीय भाषाओं में स्थानीय भाषा की सामग्री की मांग बहुत बढ़ गई है. पापुआ न्यू गिनी में 800 से ज़्यादा भाषाएं हैं लेकिन औपचारिक शिक्षा में अंग्रेज़ी पर लगभग पूरी तरह निर्भरता है. ये एक संरचनात्मक असंतुलन है जिसे AI की सहायता से सामग्री तैयार करके ठीक किया जा सकता है. 

माली में सफल पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक साल के भीतर सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त 140 किताबें बम्बारा भाषा में तैयार की गईं. ये दिखाता है कि मानवीय-AI काम-काज का मेलजोल मौखिक प्रभुत्व, कम संसाधन वाले संदर्भ में भी तेज़ी से साहित्यिक सामग्री तैयार कर सकता है. इससे बड़े पैमाने पर मातृभाषा में पढ़ाई संभव हो पाती है. 

माली राष्ट्रीय नीति में बदलाव के बाद AI के उपयोग की गति और सोच-समझ के मामले में विशेष स्थान रखता है. इस तरह ये एक अनुकरणीय मॉडल की पड़ताल करने के लिए एक असाधारण रूप से स्पष्ट मामला बनता है. शिक्षा के लिए AI की पहल लिपि के विकास के साथ AI से प्रेरित साहित्य तैयार करने का लाभ उठाने में एक मज़बूत उदाहरण स्थापित करती है. ये दुनिया भर में भाषाई विकास का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करती है. माली में सफल पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक साल के भीतर सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त 140 किताबें बम्बारा भाषा में तैयार की गईं. ये दिखाता है कि मानवीय-AI काम-काज का मेलजोल मौखिक प्रभुत्व, कम संसाधन वाले संदर्भ में भी तेज़ी से साहित्यिक सामग्री तैयार कर सकता है. इससे बड़े पैमाने पर मातृभाषा में पढ़ाई संभव हो पाती है. 

रोबोट्समाली इस बात का उदाहरण है कि कैसे AI से प्रेरित साहित्य निर्माण शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा को संस्थागत बनाने में पुरानी बाधाओं को दूर कर सकता है. इस तरह मातृभाषा बोलने वाले लोगों के बीच निरक्षरता को दूर कर सकता है. दुनिया भर के नीति निर्माताओं को इस ब्लूप्रिंट का इस्तेमाल करके भाषाई खामियों को दूर करना चाहिए और समावेशी प्रगति की आधारशिला के रूप में समान साक्षरता सुनिश्चित करना चाहिए.


प्रणॉय जैनेंद्रन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर सिक्योरिटी, स्ट्रेटेजी एंड टेक्नोलॉजी में रिसर्च असिस्टेंट हैं.
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