Author : Soumya Bhowmick

Expert Speak Raisina Debates
Published on Mar 02, 2024 Updated 0 Hours ago

जैसे-जैसे ब्रिक्स विकसित हो रहे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को आगे बढ़ा रहा है, उसकी व्यापार, निवेश और वित्त से जुड़ी प्रगति एक परिवर्तनकारी ताकत के रूप में उसके महत्व को रेखांकित करती है. 

एक उपयोगी ब्रिक्स: वैश्विक आर्थिक सुधार की नवीन कल्पना!

मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बहुपक्षीय संस्थानों की राह में निर्णायक परिवर्तन हो रहा है और इस बदलाव में ब्रिक्स गठबंधन एक महत्वपूर्ण किरदार है. जैसे-जैसे हम ब्रिक्स के भीतर व्यापार, निवेश और वित्त के क्षेत्रों में छानबीन करते हैं तो हम ख़ुद को लगातार विकसित हो रहे भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक मानक की जटिलताओं का मार्ग-निर्देशन करते हुए पाते हैं.

50 अरब अमेरिकी डॉलर की शुरुआती पूंजी के साथ NDB की परिकल्पना मौजूदा वित्तीय संस्थानों के विश्वसनीय विकल्प के तौर पर की गई थी. ये इस संगठन के द्वारा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को चुनौती देने और उसमें सुधार लाने के दृढ़ निश्चय को दिखाता है.

ब्रिक्स की पहल नई शताब्दी की शुरुआत में हुई थी जब ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन ने ब्रिक (BRIC) के नाम से एक ढीले-ढाले समूह की स्थापना की. हालांकि, 2009 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से ये गठबंधन मज़बूत हुआ. इस सहयोग के पीछे प्राथमिक प्रेरणा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बदलते समीकरण को लेकर प्रतिक्रिया थी. इसे बढ़ाने वाली एक प्रमुख प्रेरक शक्ति अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संगठनों के भीतर एक अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी निर्णय लेने की प्रक्रिया का आकर्षण था जो मुख्य रूप से उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को ज़्यादा प्रभावी आवाज़ देने पर केंद्रित थी.

ब्रिक्स विकसित होकर एक संगठित और स्थिर संस्थान में बदल गया है जो वैश्विक शासन व्यवस्था (ग्लोबल गवर्नेंस) के लोकतंत्रीकरण के स्पष्ट इरादे के साथ बड़े बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है. इस राह में एक निर्णायक सफलता 2013 में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना थी. 50 अरब अमेरिकी डॉलर की शुरुआती पूंजी के साथ NDB की परिकल्पना मौजूदा वित्तीय संस्थानों के विश्वसनीय विकल्प के तौर पर की गई थी. ये इस संगठन के द्वारा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को चुनौती देने और उसमें सुधार लाने के दृढ़ निश्चय को दिखाता है. NDB का मुख्यालय शंघाई में है और इसने कर्ज़ बांटने, इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और चार महाद्वीपों में सतत विकास में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की है. ब्रिक्स के सदस्यों के बीच शुरुआती सदस्यता पूंजी (सब्सक्राइब्ड कैपिटल) का समान बंटवारा सामूहिक कार्रवाई को लेकर प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है. 

व्यापार समीकरण

ब्रिक्स के भीतर व्यापार और निवेश परिदृश्य की पड़ताल करने पर महत्वपूर्ण प्रगति का पता चलता है जो व्यापक ब्रिक्स की छतरी के भीतर भारत और चीन के बीच भरोसेमंद समीकरण पर केंद्रित है. भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2022 में 135.98 अरब अमेरिकी डॉलर की ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया. चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है और ये पहली बार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया है. ब्रिक्स के अन्य सभी देशों की कुल GDP से दोगुने से ज़्यादा GDP के साथ इस संगठन में चीन की भूमिका अहम है. चीन ब्रिक्स का फायदा उठाकर अमेरिका की वैश्विक शक्ति का मुकाबला और वैश्विक शासन व्यवस्था के लिए एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देना चाहता है. 

हालांकि, ब्रिक्स के देशों के बीच विविधता आम राय पर आधारित निर्णय के लिए चुनौती पेश करती है, ये ऐसी पेचीदगी है जो इस संगठन के विस्तार की वजह से बढ़ी है. भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ब्रिक्स के आर्थिक वज़न में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करती है, इसकी सामूहिक वित्तीय मज़बूती और संभावना बढ़ाती है. ब्रिक्स में शामिल देश सामूहिक रूप से दुनिया के कुल भू-भाग में 26 प्रतिशत और दुनिया की कुल आबादी में लगभग 42 प्रतिशत की नुमाइंदगी करते हैं. जहां तक बात व्यापार की है तो वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स के सभी देशों का कुल मिलाकर 18 प्रतिशत हिस्सा है. ध्यान देने की बात है कि वैश्विक निर्यात में उनका योगदान बढ़ रहा है और ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच निर्यात की वृद्धि दर वैश्विक औसत को पार कर गई है. ब्रिक्स के भीतर निर्यात में ये बढ़ोतरी संकेत देती है कि ब्रिक्स के देशों के बीच गहरे आर्थिक सहयोग से ठोस फायदा मिलता है और ये संगठन के भीतर अधिक निवेश को बढ़ावा देने में निर्णायक भूमिका अदा करती है. 

वैसे तो हाल के वर्षों में ब्रिक्स के भीतर निवेश में बढ़ोतरी हुई है लेकिन संगठन के भीतर और ज़्यादा निवेश की संभावना होने की आवश्यकता है, विशेष रूप से अंतर-क्षेत्रीय व्यापार की महत्वपूर्ण मात्रा को देखते हुए.

ब्रिक्स देशों ने दूसरे विकासशील देशों के साथ एकीकरण के लिए अपने दृष्टिकोण को रणनीति के हिसाब से बदला है. इसका उद्देश्य उनके व्यापार की मात्रा को बढ़ाना और अधिक पूंजी निवेश  आकर्षित करना है. नई शताब्दी के शुरुआती वर्षों से ब्रिक्स के इन देशों ने कई पहलुओं में अपने आर्थिक सहयोग और व्यापार साझेदारी को मज़बूत किया है. ब्रिक्स के भीतर उनके एकीकरण में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ में छूट, टैरिफ में कमी और अलग-अलग सामनों एवं सेवा सेक्टर में व्यापार की सुविधा समेत निर्यात केंद्रित रणनीतियां शामिल हैं. इस सक्रिय दृष्टिकोण के कारण काफी वृद्धि दर्ज की गई है, व्यापार का विस्तार हुआ है और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आने और जाने- दोनों में बढ़ोतरी हुई है. इस तरह ब्रिक्स देशों को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में स्थापित किया गया है. 

रेखा-चित्र 1: ब्रिक्स में FDI, 2001-2021, और चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर (अरब अमेरिकी डॉलर और प्रतिशत)

स्रोत: संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD)

विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 

अंकटाड के डेटा के अनुसार BRICS देशों में कुल मिलाकर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 2010 के 27 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 2020 में काफी ज़्यादा बढ़कर 167 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया. ये बदलाव सामूहिक रूप से उनकी कुल FDI संपत्ति के 1.3 प्रतिशत से 4.7 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है जो काफी ज़्यादा बढ़ोतरी दिखाता है. विशेष रूप से इसमें चीन ने एक प्रमुख भूमिका निभाई और वो ब्रिक्स देशों के बीच FDI का सबसे महत्वपूर्ण योगदानकर्ता और प्राप्तकर्ता था. इसके अलावा ब्राज़ील और भारत में भी ब्रिक्स के दूसरे सदस्यों से निवेश के विस्तार में मज़बूती देखी गई. इसके विपरीत रूस ने अपेक्षाकृत साधारण विकास देखा और दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स के देशों से निवेश में मामूली कमी देखी. 

ब्रिक्स के देश वैश्विक और क्षेत्रीय सप्लाई चेन की क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापार और निवेश सहयोग को मज़बूत करने की ज़रूरत को स्वीकार करते हैं. उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कि उत्पादन और परिवहन में निवेश को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया है. कोविड-19 महामारी के द्वारा खड़ी की गई चुनौतियों के बीच भी निवेश के स्थान (इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन) के तौर पर ब्रिक्स देशों के आकर्षण को बढ़ाने के महत्व को स्वीकार करते हुए आर्थिक और व्यापार मुद्दों पर ब्रिक्स संपर्क समूह (CGETI) ने सतत विकास पर केंद्रित निवेशों के लिए अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से और अधिक उपायों का अनुरोध किया है. इनमें पारदर्शिता में सुधार और देश की प्रशासनिक प्रक्रिया और आवश्यक शर्तों को सरल बनाने की पहल शामिल हैं.  

वैसे तो हाल के वर्षों में ब्रिक्स के भीतर निवेश में बढ़ोतरी हुई है लेकिन संगठन के भीतर और ज़्यादा निवेश की संभावना होने की आवश्यकता है, विशेष रूप से अंतर-क्षेत्रीय व्यापार की महत्वपूर्ण मात्रा को देखते हुए. बढ़े हुए निवेश सहयोग में संगठन के भीतर आर्थिक सहयोग का विस्तार करने में महत्वपूर्ण कारक बनने की क्षमता है. ये सहयोग पूंजी निर्माण (कैपिटल फॉर्मेशन) बढ़ाकर, तकनीक के ट्रांसफर को सुविधाजनक करके और रोज़गार के अवसरों को पैदा करके सतत और समावेशी घरेलू आर्थिक विकास को तेज़ कर सकता है. इसके अलावा लचीला और सुरक्षित साइबर नेटवर्क और रणनीति बनाने की सख्त ज़रूरत है ताकि ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और यूरेशियन आर्थिक यूनियन (EEU) के सदस्य देशों के बीच एक-दूसरे से संपर्क को सुविधाजनक बनाया जा सके. ये कदम अधिक सहयोग और साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देगा. 

निष्कर्ष ये है कि जैसे-जैसे ब्रिक्स विकसित हो रहे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को आगे बढ़ा रहा है, उसकी व्यापार, निवेश और वित्त से जुड़ी प्रगति एक परिवर्तनकारी ताकत के रूप में उसके महत्व को रेखांकित करती है. NDB की स्थापना और सदस्य देशों के बीच गहरा आर्थिक सहयोग वैश्विक शासन व्यवस्था को नया आकार देने की प्रतिबद्धता का संकेत देता है. रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक वज़न और एकीकरण के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण के साथ ब्रिक्स न केवल एक समूह है बल्कि एक गतिशील संस्थान भी है जो अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के भविष्य की रूप-रेखा को निर्धारित कर रहा है. उपयोग में नहीं लाई गई क्षमता और संभावनाएं ब्रिक्स के सामने ग्लोबल साउथ (विकासशील देश) के समावेशी विकास को तेज़ करने का एक अवसर प्रदान करती हैं. 


सौम्य भौमिक ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन में एसोसिएट फेलो हैं. 

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