आने वाले दिनों में जब अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध और तेज़ होगा, शी जिनपिंग को सारे अधिकारों की ज़रूरत पड़ेगी।
हाल के महीनों में यह चर्चा चलती रही है कि शी जिनपिंग पर अंदरूनी दबाव बढ़ रहे हैं — अपनी नीतियों के नतीजे से भी और पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के नए सदस्य वांग हूनिंग की मुश्किलों की वजह से भी। इसका सबसे उल्लेखनीय उदाहरण झिन हुआ विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफेसर शू झांगरून का 24 जुलाई को लिखा हुआ एक लेख है जिन्होंने शी की सख्त नीतियों की आलोचना की है — इसमें पारंपरिक मार्क्सवाद और माओवादी सर्वसत्तावाद को पुनर्जीवित करने की उनकी कोशिश की भी आलोचना है। [i]
राष्ट्रपति से असंतोष के दूसरे संकेत भी हैं — ‘अमेज़िंग चाइना’ जैसी डॉक्युमेंटरी की तरह के बेतरह सकारात्मक प्रचार और अपनी पीठ थपथपाने की भी आलोचना हो रही है।
अगस्त के पहले पंद्रह दिन शी सरकार मीडिया में नहीं नज़र आए — शायद वे बीदेहे बीच के रिसॉर्ट पर पारंपरिक छुट्टी/बैठकों में शामिल थे। यह देश के क़रीब दो दर्जन नेताओं की सालाना छुट्टी या बैठक होती है जिसमें अहम फ़ैसले लिए जाते हैं।
शी इस कामकाजी छुट्टी से 4 महत्वपूर्ण बैठकों के साथ निकल कर आए — यह इशारा करते हुए कि चीज़ें पूरी तरह उनके नियंत्रण में हैं। 17 से 19 अगस्त के बीच पहली बैठक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) [ii] के नेतृत्व के साथ थी जिसने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के नेतृत्व को पीएलए से मज़बूत करने की बात कही। बैठका का संदेश असामान्य नहीं था — फौज को सीपीसी के नेतृत्व में पूरी आस्था दिखानी थी।
इसके बाद 22 और 23 अगस्त को उन्होंने प्रचार और वैचारिक कामकाज पर पांच साला राष्ट्रीय कॉन्फ़्रेंस की अध्यक्षता की जहां उन्होंने 2012 की अठारहवीं कांग्रेस के बाद से लिए गए पार्टी फ़ैसलों की उपयुक्तता पर ज़ोर दिया और वैचारिक और प्रचार कार्य में लगे अधिकारियों (मसलन वांग हूनिंग, जो वैचारिक प्रमुख हैं और पीबीएससी के सदस्य हैं जिन्होंने बैठक की अध्यक्षता की) की विश्वसनीयता पर मुहर लगाई। पार्टी के वैचारिक उपकरणों और पीएलए पर अपनी कमान के अलावा शी ये भी इशारा कर रहे थे कि पार्टी के नज़रिए में अपरिहार्य एकता है — बिल्कुल कांग्रेस तक जिसने उन्हें सीपीसी का चेयरमैन चुना है।
हाल के महीनों में सीपीसी के बहुत बढ़ा-चढ़ा कर किए गए राष्ट्रवादी प्रचार की आलोचना हुई है जिसमें चीन की उपलब्धियों को वास्तविकता से काफी बड़ा दिखाने की कोशिश की गई है। अब पीपुल्स डेली जैसे प्रमुख अखबार भी उन लगातार ‘बड़बोली और अहंकारी’ चर्चाओं की आलोचना कर रहे हैं और मीडिया से अपील कर रहे हैं कि वे अमेरिका के चीन से डरे होने और बीजिंग की उपलब्धियों से जापान के हैरान होने जैसे दावों से बचें। और यह सब करते हुए भी, चीन के अघिकारी इस बात पर बल देते हैं, जैसा शी ने 22 और 23 अगस्त की बैठकों में किया — कि बीते पांच वर्षों में विचारधारा और प्रचार को लेकर पार्टी का कामकाज ‘पूरी तरह सही’ रहा है। [iii]
24 अगस्त को, शी ने विधि आधारित प्रशासन आयोग की पहली बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने ‘सभी क्षेत्रों में विधि आधारित प्रशासन’ को बढ़ावा देने के मुद्दे पर सीपीसी के एकीकृत और केंद्रीय नेतृत्व को मज़बूत करने की अपील की। कुल मिलाकर, ‘कमीशन का लक्ष्य विधि के प्रशासन’ को बढ़ावा देने के साथ-साथ, सीपीसी की राय में, यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी का नेतृत्व इस ‘विधि आधारित शासन’ से ऊपर रहे। [iv]
फिर 27 अगस्त को, उन्होंने बेल्ट ऐंड रोड पहल पर एक सेमिनार की अध्यक्षता की जहां उन्होंने इस पहल का बचाव किया और कहा कि ये ‘चाइना क्लब’ बनाने का मामला नहीं है। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना था कि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि चीन बीआरआई की कई परियोजनाओं के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए अपनी रणनीति में कुछ संतुलन की शुरुआत कर रहा है। इस मामले में, ये बयान तब आया जब मलेशिया ने चीन के सहयोग से बन रही रेल परियोजना से हाथ खींच लिए। शी ने कहा कि बीआरआई एक आर्थिक सहयोग की पहल है, भूराजनैतिक या सैनिक गठजोड़ की नहीं। [v]
ये रुख इशारा कर रहा था कि शी के हाथ में पूरी मज़बूती से लगाम है और अमेरिका के साथ टकराव ने दरअसल उनके हाथ मज़बूत ही किेए हैं। वे राष्ट्रवादी गाड़ी घुमा रहे हैं और ऐसे हालात में उनके विरोध को राष्ट्रविरोधी मान लिया जाएगा। इस चलन की पुष्टि तंग श्याओ फंग को पृष्ठभूमि में धकेलने की कोशिश से होती है। यह 2017 की उन्नीसवीं पार्टी कांग्रेस में लिए गए इस निर्णय का स्वाभाविक नतीजा है कि शी जिनफिंग के नेतृत्व में चीन एक ‘नया युग’ देख रहा है। ‘नए युग में चीनी क़िरदार के साथ समाजवाद पर शी चिनफिंग के विचार’ पार्टी के संविधान में शामिल किए जा चुके हैं। 2018 तंग द्वारा शुरू किए गए चीनी सुधारों और खुलेपन की 40वीं जयंती देख रहा है।
26 अगस्त को सीपीसी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अनुशासन के नए क़ायदे प्रकाशित किए। इन कायदों का मक़सद ये है कि कैडर पार्टी की नीतियों को भरोसे के साथ आगे बढाएं। ये का़यदे, सरकारी रिलीज़ में लिखा गया, महासचिव शी की मूल हैसियत को पूरी तरह बनाए रखने के लिए हैं। नए क़ायदे कहते हैं कि पार्टी सदस्य केंद्रीय नीतियों के ख़िलाफ़ नहीं बोल सकते या ऐसी अफ़वाह नहीं फैला सकते जो सीपीसी को नुक़सान पहुंचाएं। ज्यादा अहम बात, ये कहते हैं, “जिन पार्टी सदस्यों की धार्मिक आस्थाएं हैं, उन्हें विचार शिक्षा को मज़बूत करना चाहिए था, अगर वे नहीं बदलते, उन्हें पार्टी छोड़ने को प्रेरित करना चाहिए।” [vi]
द वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक शेनजेन के एक म्यूज़ियम में तंग श्याओ फंग की जो विशालकाय प्रतिमा लगी थी, उसकी जगह अब वीडियो स्क्रीन्स लगाई जा रही हैं जिन पर शी के उद्धरण आ रहे हैं। ये सब शी चिनफिंग को ज़्यादा विशाल शख़्सियत के तौर पर पेश करने की बड़ी प्रक्रिया का हिस्सा है। [vii] बीजिंग में नेशनल म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट के दौरे के बाद एक रिपोर्टर ने 40वीं वर्षगांठ पर एक प्रदर्शनी की ख़बर देते हुए ध्यान दिया कि तंग की जगह प्रदर्शनी में नहीं के बराबर थी, पूरा शो शी के नाम था। [viii]
तंग की हैसियत कम करने क वास्ता इस तथ्य से भी है कि सभी क्षेत्रों में पार्टी के नेतृत्व की शी की राजनीतिक लाइन तंग की उन नीतियों के ख़िलाफ़ पड़ती हैं जिनमें पार्टी और राज्य के अलगाव को बढ़ावा देने की कोशिश की गई थी।
जेरोम कोहेन के मुताबिक तंग श्याओ फिंग के सुधारों की शुरुआत से लेकर 2012 तक, मार्क्सवाद-लेनिनवाद की आधिकारिक लाइन के बावजूद चीन के जजों, अभियोजकों, वकीलों, विधायकों, अफ़सरों, कानून से जुड़े लोगों और पुलिस तक को मोटे तौर पर पश्चिमी कानूनी मूल्यों का सम्मान करना सिखाया गया। लेकिन शी के नेतृत्व में चीन ने ‘विधि आधारित शासन’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया है और सत्ता के पृथक्कीकरण, न्यायिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार आयोग के वकीलों की भूमिका जैसे सर्वव्यापी मूल्यों की आलोचना की है और इसकी जगह सीपीसी के संपूर्ण दबदबे को बढ़ावा दिया है। [ix]
हाल ही में, पीपुल्स डेली में ली जुनरू द्वारा लिखे एक लेख में 19वीं पार्टी कांग्रेस में शी द्वारा दिए गए वक्तव्य का उल्लेख किया गया है — सरकार, फौज, समाज और स्कूल, उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम — हर जगह पार्टी सबका नेतृत्व करती है। ली की दलील थी कि तंग द्वारा बढ़ाई जा रही व्यवस्था से लौटने का फ़ैसला उचित है। [x]
आने वाले दिनों में जब अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध और तेज़ होगा, शी को सारे अधिकारों की ज़रूरत पड़ेगी। सितंबर में अमेरिका के साथ यह व्यापार युद्ध तीखा हो सकता है। ख़बरों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 200 बिलियन ़डॉलर [xi] के बराबर का कारोबार करने वाले 6,000 और उत्पादों पर पाबंदी लगा सकते हैं। चीन भी 60 बिलियन डॉलर के उत्पादों पर टैक्स बढ़ा कर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। लेकिन इसके बाद उसके पास पाबंदी लगाने को उत्पाद नहीं रह जाएंगे और उसे दूसरे क़दमों का सहारा लेना पड़ सकता है।
ट्रंप इस टेरिफ युद्ध को लेकर आगे बढ़ने को सिर्फ इसलिए उत्साहित नहीं हैं कि वे सोचते हैं कि यह उनके घरेलू राजनीतिक आधार के अनुकूल है, बल्कि इसलिए भी कि उनको लगता है कि चीनी उनकी उत्तर कोरिया नीति को अहमियत नहीं दे रहे। अब तक दोनों देशों ने एक-दूसरे के 50 अरब डॉलर तक के सामान पर प्रतिबंध लागू किए हैं।
चीनी अब ये मानने लगे हैं कि व्यापार से जुड़े मुद्दे अमेरिका की उसी बहुकोणीय नीति का बस एक कोण हैं, जो उनकी निगाह में ‘चीन के उभार को नाकाम करना’ चाहती है। हाल ही में पीपुल्स डेली में लिखते हुए, एक आला चीनी अफ़सर ने लिखा कि अमेरिकी नीति व्यापार को लेकर नहीं, चीन को रोकने को लेकर है। [xii]
दिसंबर 2017 के नेशनल सिक्युरिटी स्ट्रेटेजी के अंक में जताई गई कि इस राय को कि चीन बराबरी का प्रतियोगी है, अमेरिका और अहमियत देते हुए नेशनल डिफ़ेंस अथॉराइ़ज़ेशन ऐक्टलेकर आया है जिसमें कहा गया है कि “चीन के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक प्रतियोगिता अमेरिका की प्रमुख प्राथमिकता है। रक्षा खर्च के लिए 716 बिलियन डॉलर का अधिकार देने के अलावा, इसने अमेरिका में चीनी प्रभाव को सीमित करने के लिए कई और क़दमों की इजाज़त दी है।” जहां चीन शुरू में शायद यह मान रहा हो कि अमेरिका की मौजूदा बंटी हुई राजनीति में बस इंतज़ार करने का एक मोल हो सकता है और देखने का कि नवंबर के चुनावों के बाद ट्रंप प्रशासन बैकफुट पर जा सकता है, वहीं शायद उसे अब ये एहसास हो रहा हो कि वे अमेरिकी नीतियों में एक आम राय बदलाव हो रहा है जैसा कि NDAA को भारी बहुमत से पास किए जाने से स्पष्ट था। [xiii]
ख़बरों के मुताबिक, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना की केंद्रीय कमेटी इस साल चौथी पूरी बैठक कर सकती है। बैठक में आर्थिक मुद्दों और सुधार से जुड़ा एजेंडा हो सकता है, लेकिन हालात शी और सीपीसी को एजेंडा बदलने पर मजबूर कर सकते हैं।
[i] https://www.nytimes.com/2018/07/31/world/asia/xi-jinping-internal-dissent.html?
[ii] http://www.xinhuanet.com/english/2018-08/19/c_137402313.htm?
[iii] https://www.scmp.com/news/china/policies-politics/article/2160904/unify-minds-president-xi-jinping-makes-ideological?
[iv] http://www.xinhuanet.com/english/2018-08/24/c_137416215.htm
[v] https://www.scmp.com/news/china/diplomacy-defence/article/2161580/xi-jinping-says-belt-and-road-plan-isnt-about-creating
[vi] https://mail.google.com/mail/u/0/?ui=2&shva=1#inbox/1657be39e53fabb7
[vii] https://chinadigitaltimes.net/2018/08/remaking-history-as-reform-anniversary-approaches/
[viii] https://supchina.com/2018/08/07/deng-xiaoping-learns-from-xi-jinpings-dad/
[ix] https://www.washingtonpost.com/news/global-opinions/wp/2018/08/02/xi-jinping-sees-some-pushback-against-his-iron-fisted-rule/
[x] http://theory.people.com.cn/n1/2018/0820/c40531-30237561.html?mc_cid=ab8ecc218d&mc_eid=d60d414cea
[xi] https://www.bloomberg.com/news/articles/2018-08-30/trump-said-to-back-200-billion-china-tariffs-early-as-next-week
[xii] https://translate.google.com/translate?sl=zh-CN&tl=en&js=y&prev=_t&hl=en&ie=UTF-8&u=http%3A%2F%2Fopinion.people.com.cn%2Fn1%2F2018%2F0829%2Fc1003-30257035.html&edit-text=
[xiii] https://www.govtrack.us/congress/bills/115/hr5515/text
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Manoj Joshi is a Distinguished Fellow at the ORF. He has been a journalist specialising on national and international politics and is a commentator and ...
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