Author : Lelo Nxumalo

Published on Sep 11, 2018 Updated 0 Hours ago

संघीय व्यापार और गिल्ड सिस्टम का विरोध करनेवाले एडम स्मिथ पहले शख़्स थे। स्मिथ मानते थे कि किसी राष्ट्र की तरक़्क़ी इस बात पर निर्भर करती है अपने श्रमिकों को रोज़गार देने में वो देश किस रफ़्तार से आगे बढ़ा है। स्मिथ, डेविड रिकार्डो समेत उनसे प्रभावित तमाम लोगों ने इस विश्वव्यापी विचारधारा को विकसित किया और आख़िरकार औद्योगिक कामकाज के तरीक़ों में बदलाव लाने में सफल रहे।

काम का बदलता स्वरुप: अतीत से सबक़

हम पहले भी इस दौर में रहे हैं। इस दौर से मेरा तात्पर्य एक महत्वपूर्ण परिस्थिति से है, जहां वैश्विक स्तर पर काम की प्रकृति कुछ नई, कुछ अलग हो जाती है। 19वीं सदी की शुरुआत में शुरू हुई औद्योगिक क्रांति ने फ़ैक्ट्रियों में गिल्ड रेगुलेटेड रोज़गार को विशेष संगठित रोज़गार में बदलते देखा। म के स्वरुप में मौजूदा बदलाव विध्वंसकारी तकनीकों की वजह से है, जो औद्योगिक युग से व्यवसायों को स्वचालित कर साझा अर्थव्यवस्था [1] और फ़्रीलांसर अर्थव्यवस्था को समर्थ बना रही हैं। यहां मेरा तर्क है कि कामकाज के तरीक़ों में भारी बदलावों के पिछले एपिसोड्स देखकर हम वर्तमान के हक़ीक़त को समझने और उसका बेहतरी से सामना करने का सबक़ लेने में सक्षम हो सकते हैं।

व्यापारिक युग के दौरान — 1776 [2] में ऐडमस्मिथ के ‘वेल्थ ऑफ़ नेशंस’ से पहले, विभिन्न पेशों में गिल्ड सिस्टम- यानी मंडलियों द्वारा मानक तय होते थे। सारे अहम पेशों तक पहुंच का रास्ता गिल्ड से होकर ही जाता था। किसी भी पेशे में अपरिहार्य तौर पर तीन तरह की विशेषज्ञताएं थीं — युवा कामगार होते थे जो शागिर्द होते और उस्ताद कारीगर [3] से काम सीखते। जब शागिर्दी पूरी हो जाती तो शागिर्द कारीगर बन जाता। ढेर सारा अनुभव [4] हासिल करने के बाद वह ख़ुद उस्ताद कारीगर बन जाता।

व्यापारिक युग के दौरान — 176 में ऐडमस्मिथ के ‘वेल्थ ऑफ़ नेशंस’ से पहले, विभिन्न पेशों में गिल्ड सिस्टम- यानी मंडलियों द्वारा मानक तय होते थे।

एडम स्मिथ संघीय व्यापार और गिल्ड सिस्टम की मुख़ालफ़त करनेवाले पहले शख़्स थे। स्मिथ मानते थे कि किसी राष्ट्र की तरक़्क़ी इस बात पर निर्भर करती है अपने श्रमिकों को रोज़गार [5] देने में वो देश किस रफ़्तार से आगे बढ़ा है। स्मिथ, डेविड रिकार्डो समेत उनसे प्रभावित तमाम लोगों ने इस विश्वव्यापी विचारधारा को विकसित किया और आख़िरकार औद्योगिक कामकाज के तरीक़ों में बदलाव लाने में सफल रहे। शागिर्द, कारीगर और उस्ताद के इस पारंपरिक सिलसिले को एक अन्य व्यवस्था ने तोड़ दिया जिसमें कामगार एक काम करते थे या कई छोटे-छोटे काम करते थे। मसलन, खनन, जहाज़-निर्माण और लौह-इस्पात में बहुत से ऐसे काम उन खोजों द्वारा भी पैदा किए गए जो औद्योगिक क्रांति की पहचान बनीं।

औद्योगिक युग में काम की नई वास्तविकता को बेहतर तरीक़े से समझाया हेनरी फ़ोर्ड की नई खोज — द असेंबली लाइन ने। चलती असेंबली लाइन में मॉडल T छोटे यूनिटों में रखा गया था, ताकि कामगार असेंबली प्रक्रिया के एक हिस्से में योगदान करते हुए एक ही स्थान पर रहें। असेंबली लाइन सुस्त श्रमिकों को तेज़ करने और बहुत तेज़ लोगों को धीमा करने में असरदार रहा। पूरी कोशिश श्रमिकों को और अधिक कुशल बनाने की थी। [6] एडम स्मिथ ने 1776 में द वेल्थ ऑफ़ नेशंस में श्रम विभाजन के महत्व को रेखांकित किया था, लेकिन असेंबली लाइन ने कुल उत्पादन को अधिकतम करने के लिए कामों का बंटवारा कर इसे जीवन में उतारा।

औद्योगिक युग में काम की नई वास्तविकता को बेहतर तरीक़े से समझाया हेनरी फ़ोर्ड की नई खोज — द असेंबली लाइन ने।

मौजूदा समय के लिए सबक़

आज की स्मार्ट फ़ैक्ट्रियों में या असेंबली लाइन में गहन श्रम संचालन खोजने के लिए काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ेगी। फ़ैक्ट्री फ़्लोर वर्कर्स की जगह अब साझा या गिग अर्थव्यवस्था में पोस्ट इंडस्ट्रियल श्रमिकों की प्रधानता दिखती है। गिल्ड सिस्टम जैसा कि हमने ऊपर भी बताया था काफ़ी हद तक अतीत का अवशेष है, लेकिन जुगाड़ और फ़्रीलांसर अर्थव्यवस्था के आगमन के साथ ये कमज़ोर रूप में ही सही, परंतु वापसी कर सकता है। द इंडिपेंडेंट ड्राइवर्स गिल्ड, [7] जो न्यूयॉर्क शहर में उबर, लिफ़्ट, जूनो और दूसरी किराए वाली गाड़ियों के चालकों का प्रतिनिधित्व करता है, इसका एक उदाहरण है। मूल गिल्ड जहां विशेषज्ञता को गहन बनाने और मानकों को परिभाषित करने पर केन्द्रित है, वहीं ड्राइवर्स गिल्ड एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जहां काम की परिस्थितियों, कमाई और फ़ायदे के अवसर को बेहतर किया जा सकता है।

अर्थव्यवस्था में गिल्ड की जिस विशेषता की मैं पहले से वकालत कर रहा हूं, वो है दक्षता/विशेषज्ञता को पश्रय देने पर ज़ोर। कंसल्टिंग पेशे को देखिए-परामर्शदाता कई ग्राहकों/क्लाइंट्स से कारोबार करता है, उसे जानता है, समझता है। और ठीक उसी समय एक फ़ील्ड का मास्टर या मैनेजमेंट एक्सपर्ट बनने के लिए ज़रूरी अनुभव भी हासिल करता है। गिल्ड सिस्टम के बाक़ी के दो चरण-कारीगर और उस्ताद इस उदाहरण से स्पष्ट हैं। पहला — शागिर्द या प्रशिक्षु — अब जुगाड़ अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर व्यक्ति विशेष की ज़िम्मेदारी है। ऑनलाइन देख-रेख आज जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी पहले कभी नहीं रही। आज प्रशिक्षु कारीगर रिकॉर्ड समय में नई स्किल सीखने की क्षमता रखता है, इसके लिए कोरसेरा, लिंडा, उडेमी और एडेक्स जैसे प्लेटफ़ॉर्म का शुक्रिया। यहां तक कि इनमें से कई प्लेटफ़ॉर्म इम्पलॉयर को दिखाने के लिए सत्यापित प्रमाण पत्र भी देते हैं।

ऑनलाइन देख-रेख आज जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी पहले कभी नहीं रही। आज प्रशिक्षु कारीगर रिकॉर्ड समय में नई स्किल सीखने की क्षमता रखता है, इसके लिए कोरसेरा, लिंडा, उडेमी और एडेक्स जैसे प्लेटफ़ॉर्म का शुक्रिया।

यह साफ़ होना चाहिए कि काम करने का व्यक्ति केंद्रित दृष्टिकोण कैसे विफल हो सकता है।

सबसे पहले, हर व्यक्ति के पास ये जानकारी नहीं हो सकती है कि कौन से स्किल डिमांड में हैं। अनभिज्ञ नौसिखिए उन औज़ारों/उपकरणों के साथ तालमेल बिठाने में घंटों लगा सकते हैं जो एक अच्छे जीवन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। महत्वपूर्ण व्यवसायों की सबूत-आधारित मार्गदर्शिका बनाने के साथ एक केंद्रीय प्राधिकरण को अनिवार्य किया जाना चाहिए। वास्तव में बहुत सारे देश ऐसा कर रहे हैं। उदाहरण के लिए मलेशिया हर साल विश्व बैंक के साथ एक गंभीर व्यवसाय सूची (सीओएल) [8] तैयार करता है। ऑस्ट्रेलिया [9] के पास भी एक है, यूनाइटेड किंगडम, [10] और दूसरे कई देश ऐसा करते हैं। गिग अर्थव्यवस्था में ये लिस्ट कामगारों के लिए इंफ़ॉर्मेशन क्लीयरिंग सेंटर्स का काम कर सकती हैं, जिसकी मदद से वो ख़ुद को ज़रूरत के मुताबिक़ तैयार कर सकते हैं।

दूसरा, व्यवसायों को परिभाषित करने के तरीक़े में गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है। मलेशियाई स्टैंडर्ड क्लासिफ़िकेशन ऑफ़ ऑक्युपेशन (MASCO) लिस्ट का इस्तेमाल कर मलेशिया का सीओएल रोज़गारों के स्किल लेवल को निर्धारित करता है। वैश्विक स्तर पर, आईएलओ (ILO) द्वारा प्रबंधित इंटरनेशनल स्टैंडर्ड क्लासिफ़िकेशन ऑफ़ ऑक्युपेशंस (ISCO) [11] व्यवसायों के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय वर्गीकरण के विकास के लिए एक आदर्श है। हालांकि मलेशिया में रोज़गारों का वर्गीकरण पिछली बार 2013 के अंत में हुआ था। ILO का ISCO 2008 के रूप में है। हमें इन सूचियों को सुधारते रहना चाहिए, अपडेट रखना चाहिए। साथ ही गिग अर्थव्यवस्था और विध्वंसकारी तकनीकों के उभार से उपज रहे व्यवसायों को रोकने की ज़रूरत है। केंद्रीय प्राधिकरण यह काम आंकड़े जुटाने के तरीक़ों के ज़रिए,‌ मसलन ऑनलाइन जॉब पोर्टल देखते हुए बिल्कुल रीयल टाइम अहम व्यवसाय सूची तैयार करते हुए कर सकता है।

तीसरा, ज़्यादातर गिग अर्थव्यवस्था के कामगार स्वतंत्र तरीक़े से काम करते हैं, ठेके के कामगार, कर्मचारी नहीं। ऐसे में वो कंपनी से मिलनेवाले लाभ या राज्यों से मिलनेवाली सामाजिक सुरक्षा के हक़दार नहीं होते हैं। ये अंतर उद्यमशील बाज़ारों के लिए गिग अर्थव्यवस्था के बचत खातों, स्वास्थ्य बीमा और रिटायरमेंट प्लान के मौक़े उपलब्ध कराता है। उदाहरण के लिए, एक केंद्रीय प्राधिकरण गिल्ड और पारंपरिक बैंकों या बीमा प्रदाताओं से तालमेल कर ऐसी पहलों को बढ़ावा दे सकता है।

अंत में, काम की बदलती प्रकृति मौक़े और चुनौतियां दोनों प्रदान करती हैं। मुझे उम्मीद है कि पाठक समझ सकता है कि कैसे अतीत में झांक कर हम सबक़ ले सकते हैं कि औद्योगिकीकरण के बाद के काम करने के तरीक़े को कैसे अपनाएं और कैसे उसमें कामयाब हों।


[1] साझा अर्थव्यवस्था का सबसे सटीक अर्थ डिजिटल मध्यस्थों के ज़रिए सहयोगियों के आपसी लेन-देन में समझा जा सकता है।

[2] 15वीं से 18वीं शताब्दी के बीच ये आर्थिक धारणा मज़बूत थी कि तरक़्क़ी के लिए देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अपनी पकड़ सुरक्षित रखने और व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) सुनिश्चित करने की ज़रूरत है।

[3] अक्सर, युवा अप्रेंटिस के परिवार की भर्ती के लिए उनके परिवार को मास्टर क्राफ़्टपर्सन को पैसा देना पड़ता होगा। घर में काम करनेवाली महिला नौकरों की तरह एक अप्रेंटिस को शादी करने से मना कर दिया गया। सिस्टम में कुरीतियां थीं, दुर्व्यवहार था, एक अप्रेंटिस ख़ुद को बिना वेतन के नौकर की तरह महसूस करता था, जिसके पास कोई अधिकार नहीं थे।

[4] ये शब्द फ़्रेंच शब्द “जर्नी” से आया है, जिसका अर्थ होता है “दिन”। जर्नीमैन को दिन के हिसाब से पैसा मिलता था।

[5] डॉक्टर पैट्रिक एन एलिट्ट (2014)। औद्योगिक क्रांति।

[6] Ibid.

[7] https://drivingguild।org/

[8] देखें — Malaysia’s Critical Occupations List – Key Figures TalentCorp Malaysia

[9] देखें — Australian Skilled Occupation List 2017-2018

[10] देखें — UK Shortage Occupations List

[11] देखें — श्रम और नौकरियों पर जानकारी संगठित करने के लिए एक वर्गीकृत संरना-अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

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