Author : Prithvi Gupta

Expert Speak Raisina Debates
Published on Mar 01, 2023 Updated 0 Hours ago

चीन और रूस के द्विपक्षीय संबंध लचीली वैश्विक ऊर्जा श्रृंखला को लेकर चीन की आतुरता को जताते हैं, ताकि वो क़र्ज़ के बदले तेल की नीति के ज़रिए ऊर्जा की अपनी बढ़ती ज़रूरतें पूरी कर सके.

क़र्ज़ के बदले तेल: रूस के ऊर्जा क्षेत्र में चीन का निवेश!

बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश और तेज़ी से तरक़्क़ी करते निर्माण क्षेत्र के चलते चीन लगातार आर्थिक विकास कर रहा है. इसके चलते चीन आज दुनिया में ऊर्जा का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है. नतीजा ये हुआ है कि आज उसे रूस की शक्ल में ऊर्जा उत्पादों जैसे कि तेल, गैस और कोयला देने वाला भरोसेमंद साझीदार मिल गया है जो जीवाश्म ईंधन के ख़ज़ाने से लबरेज़ है. दोनों देशों के लिए इस रिश्ते की उपयोगिता और सुरक्षा के मसलों की हाल के वर्षों में ख़ूब चर्चा और समीक्षा की गई है. यूक्रेन युद्ध और उसके बाद रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने रूस को के हितों को और पूरब यानी चीन और भारत की ओर धकेल दिया है. य लेख में रूस के ऊर्जा क्षेत्र का मूल्यांकन करने के साथ साथ चीन द्वारा चीन के सरकारी बैंकों और कंपनियों की वित्तीय मदद से रूस की कई तेल और गैस कंपनियों के अधिग्रहण को भी प्रदर्शित करता है. 

रूस के सरकारी ऊर्जा प्रतिष्ठानों और चीन के बीच एक भरोसेमंद साझेदारी

1992 के बाद से चीन अपनी ऊर्जा ज़रूरत का लगभग सारा तेल आयात करने वाला देश बन गया था. 2021 में चीन ने हर दिन 1.413 करोड़ बैरल तेल की खपत की थी. ये तादाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 95 लाख बैरल प्रतिदिन खपत के पूर्वानुमान से 14 प्रतिशत अधिक थी. 2002-03 और 2007-09 के दौरान ज़बरदस्त आर्थिक विकास ने चीन की तेल की मांग को और बढ़ा दिया. अपने लगातार बढ़ते आयात के चलते चीन के लिए कई मुश्किल सामरिक और आर्थिक कमज़ोरियां उजागर हो गईं. इनसे पार पाने के लिए चीन ने ‘क़र्ज़ के बदले तेल’ पाने और हिस्सेदारी में निवेश की नीति तैयार की (जिसमें तेल के बदले हिस्सेदारी वापस ख़रीदने का भी प्रावधान था), और ऊर्जा की अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता बनाई.

2002-03 और 2007-09 के दौरान ज़बरदस्त आर्थिक विकास ने चीन की तेल की मांग को और बढ़ा दिया. अपने लगातार बढ़ते आयात के चलते चीन के लिए कई मुश्किल सामरिक और आर्थिक कमज़ोरियां उजागर हो गईं.

रूस की ऊर्जा कंपनियों और चीन की राष्ट्रीय तेल कंपनियों ख़ास तौर से रोज़नेफ्ट और चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CNPC) के बीच सामरिक सहयोग के दौर की शुरुआत 2004 में ‘युकोस मामले’ के बाद शुरू हुई थी. युकोस, रूस की सबसे बड़ी निजी तेल और गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी थी. टैक्स में फ़र्ज़ीवाड़े के आरोपों के चलते ये कंपनी दिवालिया हो गई. जिससे चीन को अपना दांव बढ़ाने का और मौक़ा मिल गया. CNPC ने युकोस की सहायक कंपनी युगांस्कनेफ्टेगैज़ को ख़रीदने में रोज़नेफ्ट की मदद की, जो तेल की बहुत बड़ी उत्पादक थी. चीन ने इसके लिए रोनेफ्ट को CNPC से कंपनी पर नियंत्रण वाले शेयर दोबारा ख़रीदने की इजाज़त दी. इसके बदले में चीन को हर साल 4.9 करोड़ टन तेल के लगातार निर्यात हासिल हुआ.

टेबल 1: रूस की सरकारी तेल और गैस कंपनियों में चीन की हिस्सेदारी

S. No. Year Investor Transactional party Quantity in Millions ($) Share size in percentages
1. 2006 China National Petroleum Corp. (CNPC) Rosneft 500 0.62
2. 2009 China Investment Corporation (CIC) Nobel Holdings 300 45
3. 2010 China Huadian Corporation (CHC) JSC Territorial 360 51
4. 2011 Three Gorges EuroSibEnergo 2290 50
5.   CHC TGC-S 590 100
6. 2013 State Grid Sintez 1140 N/A
7. 2013 Shenhua En+ 460 50
8. 2014 CNPC Rosneft 990 10
9. 2014 Power Construction Corporation (Power China) RusHydro 1460 49
10. 2014 CNPC Novatek 940 20
11. 2015 State Administration of Foreign Exchange (SAFE) Novatek 1210 10
12. 2015 China Petroleum and Chemical (Sinopec) Sibur 1340 10
13. 2016 SAFE Sibur 1150 10
14. 2016 CEFC China Energy EN+ 500 N/A
15. 2017 CIC Eurasia Drilling 100 6
16. 2019 CNPC Rosneft 9100 18

Source: Oxford Energy, Russian Government data, Chinese Government data, Reuters 

2005 से 2021 के बीच रूस में चीन के मोटा-मोटी निवेश को देखें तो पता चलता है कि चीन की सरकारी कंपनियों ने वहां ऊर्जा के मूलभूत ढांचे में 95 अरब डॉलर की रक़म निवेश की है. इसके साथ साथ उसने रूस की सरकारी तेल और गैस कंपनियों में हिस्सेदारी ख़रीदे के लिए 48 अरब डॉलर का निवेश किया है.

टेबल 2: चीन की मदद से रूस में चल रही ऊर्जा के मूलभूत ढांचे की परियोजनाएं

S. No. Subsector Project Contractor Chinese investments in US$ Year
1 Gas Amur gas processing plant (GPP)* China Petroleum Engineering & Construction (CPECC)*  12,700 2015
2 Gas Power of Siberia Gas Pipeline China National Petroleum Corporation (CNPC) N/A 2019
3 Gas Ust-Luga Gas and Chemical Complex* China National Chemical Engineering (CNCE)*  13,300 2019
4 Gas Amur Gas Chemical Complex (40% stake) CNPC  11,600 2019
5 Gas Yamal LNG Export Facility (20% + 10% stake) China National Offshore Oil Corporation (CNOOC), Silk Road Fund (SRF)  5,900 2017
6 Gas Arctic-2 Liquefied Natural Gas Project (20% stake) CNPC, CNOOC  4,040 2020
7 Gas Chayandinskoye LNG plant (10% stake) CNCE  1,170 2019
8 Gas Process modules (Arctic LNG-2)* Bomsec OffShore Engineering*  520 2019
9 Oil Eastern Siberia Pacific Ocean Pipeline* CNPC*  25,000 2009

Source: Oxford Energy, Russian Government data, Chinese Government data, Reuters; *fully funded by China

चीन के इस वित्तीय निवेश ने रूस की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की संपत्तियों में सामरिक रूप से हिस्सेदारी हासिल की और नई संपत्तियां भी खड़ी कीं. इससे रूस को ‘एशिया पर केंद्रित करने’ की नीति को भी मज़बूत करने का मौक़ा मिला. दोनों देशों की सरकारों के उच्च स्तरों पर राजनीतिक इच्छाशक्ति, चीन के विशाल वित्तीय संसाधनों, रूस की ‘पूरब की ओर देखो’ की नीति, 2014 से रूस पर लगे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और दोनों के बीच बढ़ती दूरी ने रूस और चीन के रिश्तं को और मज़बूती प्रदान की.

क़र्ज़ के बदले तेल

पूर्वी साइबेरिया प्रशांत महासागर पाइपलाइन (ESPO) परियोजना, दोनों देशों के बीच तेल के आदान-प्रदान के लिहाज़ से बहुत अहम है. ये पाइपलाइन चीन की क़र्ज़ के बदले तेल की नीति को उजागर करती है. ESPO ने चीन को उसके ऊर्जा व्यापार के लिए ज़मीन आधारित रास्ता मुहैया कराया है और इसीलिए ये पाइपलाइन चीन की ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिहाज़ से सबसे अहम है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 25 अरब डॉलर के व्यापार समझौते को ‘पूरब की ओर बढ़ने का द्वार’ करार दिया था.

चूंकि चीन के ज़्यादातर बड़े बैंकों ने पश्चिमी प्रतिबंधों की शर्तें क़ुबूल कर ली थीं, तो इससे रूस के हाथ से 471 अरब डॉलर क़ीमत के संभावित पूंजी निवेश निकल गए.

चीन की सरकारी तेल कंपनी CNPC ने ESPO में पूंजी निवेश किया और इसके बदले में चीन को 2030 तक हर साल 1.5 करोड़ टन तेल की आपूर्तिसुनिश्चित की. रोज़नेफ्ट और ट्रांसनेफ्ट हर रोज़ चीन को क्रमश: 18 और 12 लाख बैरल तेल की आपूर्ति करने पर सहमत हुईं. CNPC के कहने पर चाइना डेवेलपमेंट बैंक ने रूस की इन विशाल ऊर्जा कंपनियों को लोन की सुविधा उपलब्ध कराई. CDB के पास ये अधिकार था कि वो क़र्ज़ की समय पर अदायगी के लिए इन कंपनियों के खाते से सीधे पैसे निकाल सके. अगर ये कंपनियां पैसे लौटाने में नाकाम रहती हैं, तो CDB उनके खाते से पूरे पैसे निकाल सकता था.

ESPO के ज़रिए तेल आयात में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी CNPC की ही है; इसके अलावा चाइना नेशनल केमिकल कॉर्पोरेशन (केमचाइना), सिनोकेम ग्रुप और चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉरपोरेशन (CNOOC) दूसरे बड़े ख़रीदार हैं. ESPO के माध्यम से कुल तेल निर्यात में अभी भी 40 फ़ीसद हिस्सेदारी रोज़नेफ्ट की ही है. फिर भी ESPO के माध्यम से चीन और दक्षिण कोरिया व जापान जैसे दूसरे देशों को जाने वाले कच्चे तेल में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी सुरगुटएनजी जैसी कंपनियों की है.

ऊर्जा की इस साझेदारी से चीन और रूस को द्विपक्षीय व्यापार को डॉलर से मुक्त करने में मदद मिली है. क्योंकि सितंबर 2022 के बाद से चीन, तेल के बदले में रूस को रूबल और युआन में भुगतान करने के लिए राज़ी हो गया था.

2014 के पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना करना

चीन और रूस के आपसी संबंध व्यापार और वाणिज्य से भी आगे जाते हैं. जब 2014 में रूस ने क्रीमिया का अधिग्रहण किया, तो पश्चिमी देशों ने उस पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे. जब इन प्रतिबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था को नुक़सान होने लगा, तो राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक सौदा किया, जिससे इन प्रतिबंधों की मार कुछ कम हो जाए. इससे CNPC और रोज़नेफ्ट के बीच अलग समझौते हुए, नोवाटेक और चाइना पेट्रोलियम और केमिकल कॉर्पोरेशन ऑफ़ चाइना (सिनोपेक) और रोज़नेफ्ट, सिबर के बीच अलग समझौते हुए.

हालांकि, वित्तीय क्षेत्र में परिस्थितियां अलग थीं. चूंकि चीन के ज़्यादातर बड़े बैंकों ने पश्चिमी प्रतिबंधों की शर्तें क़ुबूल कर ली थीं, तो इससे रूस के हाथ से 471 अरब डॉलर क़ीमत के संभावित पूंजी निवेश निकल गए. पश्चिमी प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए चीन के कुछ बैंकों ने CDB और सिल्क रोड फंड (SRF) और चीन की सरकारी कंपनियों के ज़रिए रूस को वित्तीय मदद पहुंचाई. ये सारी कंपनियां, वैश्विक अर्थव्यवस्था से कम जुड़ी हुई थीं. इसी वजह से उनके लिए जोखिम भरे निवेश करना मुफ़ीद था. इसका एक उदाहरण SRF द्वारा दिसंबर 2015 में नोवाटेक को दिया गया वित्तीय सहयोग और उसके बाद यमाल LNG परियोजना में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीदना था. अप्रैल 2016 में CDB ने इसी परियोजना के लिए 10 अरब डॉलर का क़र्ज़उपलब्ध कराया. कहा जाता है कि रोज़नेफ्ट की वित्तीय स्थिति स्थिर करने के लिए सिनोपेक ने गैस आयात के बदले में 15 अरब डॉलर का समय से पहले भुगतान कर दिया. 2014 में रोज़नेफ्ट के निजीकरण के बाद सिनोपेक और केमचाइना ने इसमें नियंत्रण करने वाली हिस्सेदारी भी ख़रीद ली.

निष्कर्ष

2014 से 2019 के बीच पुतिन और शी जिनपिंग तीस बार मिले. ये चीन और रूस के बीच बढ़ते ऊर्जा संबंधों की मज़बूती और लचीलेपन का सुबूत है. नवंबर 2022 में चीन और रूस ऊर्जा कारोबार मंच की चौथी बैठक में शी जिनपिंग ने ऊर्जा साझेधारी को द्विपक्षीय संबंधों का बुनियादी पत्थर करार दिया था. दोनों देशों के बीच बढ़ता तालमेल, सुविधा और ऊर्जा हितों के आपसी मेल ने चीन और रूस के आपसी रिश्तों को उनके इतिहास के सबसे सहयोगात्मक दौर में पहुंचा दिया है. चीन पूरी दुनिया की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में ऊर्जा के मूलभूत ढांचे में पूंजी निवेश कर रहा है, जिसे वो अपने लिए ऊर्जा की लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार कर सके. लेकिन, ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन और ग्रिड को कार्बन से मुक्त करने को प्राथमिकता दिए जाने को देखते हुए, सवाल ये उठता है कि जीवाश्म ईंधन पर आधारित ये दोस्ती कितने दिनों तक टिकी रहती है.

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.