Expert Speak Raisina Debates
Published on Jul 04, 2023 Updated 0 Hours ago

मौजूदा सियासी संकट को देखते हुए इस बात पर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि यूरोपीय संघ (EU) पाकिस्तान के GSP+ दर्जे की बड़ी मशक़्क़त से समीक्षा कर रहा है.

यूरोपीय संघ को पाकिस्तान के GSP+ दर्जे पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है

ये लेख हमारी सीरीज़, पाकिस्तान: दि अनरेवलिंग का एक हिस्सा है


पाकिस्तान तो संकटों का अभ्यस्त है, और वो एक बार फिर इसके मुहाने पर खड़ा है. इस वक़्त पाकिस्तान जितने बड़े सियासी संकट का सामना कर रहाहै, उसका असर निश्चित रूप से अन्य देशों के साथ उसके रिश्तों पर भी पड़ रहा है.

पारंपरिक रूप से यूरोपीय संघ के साथ पाकिस्तान के रिश्तों को दुनिया भर के जानकार और अकादमिक जगत के विद्वान कोई ख़ास तवज्जो नहीं देते हैं. पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (EU) के बीच इस वक़्त पाकिस्तान-EU पॉलिटिकल डायलॉग और 2019 में हस्ताक्षर किए गए स्ट्रैटेजिक इंगेजमेंट प्लानजैसे द्विपक्षीय संस्थागत ढांचे मौजूद हैं. फिर भी दोनों पक्षों के रिश्ते मोटे तौर पर व्यापार के इर्द-गिर्द घूमते हैं.

जनवरी 2014 से पाकिस्तान, EU की जनरलाइज़्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज़+ (GSP+) दर्जे का लाभ लेता आया है. इस योजना में कम आमदनी वाले देशों को यूरोपीय संघ को किए जाने वाले उनके निर्यात पर करों में छूट दी जाती है.

जनवरी 2014 से पाकिस्तान, EU की जनरलाइज़्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज़+ (GSP+) दर्जे का लाभ लेता आया है. इस योजना में कम आमदनी वालेदेशों को यूरोपीय संघ को किए जाने वाले उनके निर्यात पर करों में छूट दी जाती है. इस छूट का मक़सद इन देशों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना औरवैश्विक अर्थव्यवस्था से उनका एकीकरण करना होता है. GSP+ की रियायत से पाकिस्तान अपने 66 फ़ीसद उत्पाद यूरोपीय संघ को शून्य व्यापार करपर निर्यात कर पाता है. फिर भी, इस योजना का लाभ कई शर्तें पूरी करने पर ही मिलता है. इसकी शर्तों में लाभार्थी देश द्वारा मानव अधिकारों, मज़दूरोंके अधिकारों, सुशासन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी 27 अंतरराष्ट्रीय संधियों को असरदार तरीक़े से लागू करना शामिल है. किसी लाभार्थी देश द्वारा इनक्षेत्रों में कितनी प्रगति की गई है, इस पर यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संसद और सदस्य देशों के प्रतिनिधियों वाली यूरोपीय परिषद के अलावा नागरिकसंगठन भी नज़र रखते हैं. इसलिए पाकिस्तान को लेकर EU  की व्यापार नीति सज़ा और ईनाम के नज़रिए वाली है.

यूरोपीय संघ, पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात साझीदार है. व्यापार का पलड़ा यूरोपीय संघ की तरफ़ बुरी तरह झुका हुआ है. 2020 में पाकिस्तान केकुल बाहरी व्यापार में EU की हिस्सेदारी 16.1 प्रतिशत थी. जबकि, यूरोपीय संघ के बाहरी व्यापार में पाकिस्तान की हिस्सेदारी महज़ 0.3 प्रतिशत थी. हालांकि, जब से पाकिस्तान को GSP+ का दर्जा मिला है, तब से यूरोपीय संघ को उसका निर्यात लगातार बढ़ता जा रहा है. GSP+ ने यूरोपीय संघ औरपाकिस्तान के बीच व्यापार को किस तरह बढ़ावा दिया है, इसकी गवाही आंकड़े देते हैं. 2013 में दोनों के बीच 6.9 अरब यूरो का व्यापार होता था, जो2021 में बढ़कर 12.2 अरब यूरो पहुंच गया था. इस तरह पाकिस्तान EU से GSP+ की रियायत का सबसे ज़्यादा लाभ लेने वाला देश बन गया है. दिसंबर 2023 में पाकिस्तान को EU से मिला GSP+ का दर्जा ख़त्म होने वाला है. इस वक़्त यूरोपीय संघ इस बात की समीक्षा कर रहा है किपाकिस्तान का ये दर्जा आगे भी जारी रखा जाए या इसे ख़त्म कर दिया जाए. पाकिस्तान के मौजूदा सियासी संकट को देखते हुए इस बात पर हैरानी नहींहोनी चाहिए कि पाकिस्तान को प्राथमिकता वाले दर्जे की EU में बारीक़ी से पड़ताल की जा रही है.

पकिस्तान की स्थिति

2021 में यूरोपीय संसद ने एक ग़ैर बाध्यकारी प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें पाकिस्तान के ईशनिंदा क़ानूनों और धार्मिक असहिष्णुता को देखते हुएउसके GSP+ दर्जे की समीक्षा करने को भारी समर्थन मिला था. पाकिस्तान की धार्मिक असहिष्णुता उस वक़्त उजागर हो गई थी, जब वहां की सरकार, फ्रांस के ख़िलाफ़ इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन तहरीक--लब्बैक के विरोध प्रदर्शनों को रोकने में नाकाम रही थी और जिसके कारण फ्रांस की कंपनियोंऔर नागरिकों को पाकिस्तान छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था. इसके अलावा, यूरोपीय संसद के कई सदस्यों जैसे कि बारबरा माटेरा ने पाकिस्तान मेंइज़्ज़त के नाम पर महिलाओं के क़त्ल और उनके साथ घरेलू हिंसा के मुद्दे पर ज़ोर देते हुए कहा था कि GSP+ के दर्जे को आगे बढ़ाते वक़्त इन बातों काभी ख़याल रखना चाहिए. यूरोपियन इंस्टीट्यूट फॉर एशियन स्टडीज़ के टॉम विल्म्स की एक रिपोर्ट में भी पाकिस्तान की दमनकारी सामंतवादी व्यवस्थाका ज़िक्र किया गया था, जिसको GSP+ जैसी रियायत से और भी बढ़ावा मिलता है. इसके अलावा, हाइडेलबर्ग यूनिवर्सिटी के विश्लेषक डॉक्टरसेगफ्रीड वोल्फ जैसे जानकारों ने पाकिस्तान को आतंकवाद को पालने पोसने वाला मुल्क बताकर, उसके GSP+ दर्जे को ख़त्म करने का सुझाव दिया है, जोपाकिस्तान को उसकी करतूतों की सज़ा देनेजैसा उपाय होगा.

मानव अधिकारों के भयंकर उल्लंघन, बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार, धार्मिक कट्टरपंथ, प्रेस की आज़ादी पर पाबंदियों, विरोध के सुरों और प्रदर्शनकारियोंके दमन, प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा, विपक्षी दलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई, लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दमन, ईशनिंदा के क़ानून, अल्पसंख्यकों परज़ुल्म, सियासी बदले की भावना से कार्रवाइयों और अफ़ग़ान तालिबान से संबंध- आज के पाकिस्तान की यही ख़ूबियां हैं. इन सब ने मिलकर पाकिस्तानके मौजूदा सियासी संकट को और बढ़ा दिया है.

पाकिस्तान के मौजूदा सियासी संकट को लेकर EU की प्रतिक्रिया में कहा गया है कि, ‘पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने का तरीक़ा और आगे की राह केवल पाकिस्तान के नागरिक ही आपस में तय कर सकते हैं.

पाकिस्तान में हो रहे सकारात्मक बदलावों से यूरोप को प्रभावित करने और अपने देश में मानव अधिकारों के बिगड़ते हालात और सियासी विरोधियों परकार्रवाई को लेकर यूरोपीय संघ की आशंकाएं दूर करने के लिए, पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार ने यूरोपीय संघ का दौरा किया था. लेकिन, अगर हम अपने टीवी स्क्रीन और सोशल मीडिया पर रोज़ रही तस्वीरों को देखें, तो हक़ीक़त कुछ और ही नज़र आती है. ख़ुद यूरोपीय संघपाकिस्तान के तर्क से कुछ ख़ास प्रभावित नज़र नहीं आता है. अप्रैल महीने में सुरक्षा की चिंताओं के चलते स्वीडन ने पाकिस्तान में अपने दूतावास कोअनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया था. 2018-2019 की यूरोपीय आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि 2018 के ट्रांसजेंडरपर्सन्स एक्ट जैसे कुछ बदलावों के बावजूद, कई अंतरराष्ट्रीय संधियों को अपने यहां लागू करने के मामले में पाकिस्तान की रफ़्तारतकलीफ़देह रूप सेधीमीरही है, ख़ास तौर से लागू करने और पालन कराने के मामले में. यूरोपीय संघ की निगरानी टीम द्वारा तैयार की गई 2014-2023 की ताज़ामूल्यांकन रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है. हालांकि, आगे चलकर प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता वाली मौजूदा सरकार की कमज़ोर हालत औरपाकिस्तान की सियासत का भयंकर ध्रुवीकरण होने के कारण, इन वादों को पूरा करने पर राजनीतिक रूप से लगातार ध्यान दे पाना और भी मुश्किलहोता जा रहा है.

यूरोपीय संघ लंबे समय से दक्षिण एशिया की अस्थिरता और आतंकवाद के प्रसार में पाकिस्तान की भूमिका पर लीपा-पोती करता रहा है. यहां तक किEU नियमित रूप से पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर (POK) के तथाकथित प्रधानमंत्रियों की मेज़बानी करता रहा है. 2022 में FATF के फ़ैसले केबाद यूरोपीय संघ ने भी इस साल मार्च में पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की आर्थिक मदद देने वाले अधिक जोखिम वाले देशों की अपनीलिस्ट से हटा दिया था. अब वक़्त गया है कि EU अपने इस नज़रिए पर पुनर्विचार करे.

यूरोपीय संघ लंबे समय से दक्षिण एशिया की अस्थिरता और आतंकवाद के प्रसार में पाकिस्तान की भूमिका पर लीपा-पोती करता रहा है. यहां तक कि EU नियमित रूप से पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर (POK) के तथाकथित प्रधानमंत्रियों की मेज़बानी करता रहा है.

जो देश EU की पहचान रहे बुनियादी उसूलों जैसे कि सहिष्णुता, क़ानून के राज, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के बुनियादी मानकों  जैसे उन मूलभूतसिद्धांतों का उल्लंघन करते हों, उन्हें प्राथमिकता वाला दर्जा देकर यूरोपीय संघ अपने ही सिद्धांतों और मूल्यों को ख़तरे में डाल रहा है. बिना शर्तें पूरी किएपाकिस्तान द्वारा GSP+ से मिलने वाली रियायतों के फ़ायदे उठाना, बांग्लादेश जैसे देशों को भी हतोत्साहित करने वाला है, जो श्रमिक अधिकारों जैसेकई मामलों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके अलावा, GSP+ को आगे बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव अधिकारों को लेकर चलने वाला अभियानकमज़ोर पड़ता है और दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा भी ख़तरे में पड़ती है. इसके उलट, अगर EU पाकिस्तान से उसका विशेष दर्जा छीन लेता है, तोइससे पाकिस्तान के निर्यातों को काफ़ी नुक़सान होगा और उसे पता चलेगा कि अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन नहीं करना उसको कितना महंगा पड़सकता है. फिर पाकिस्तान को उन्हें मानने को मजबूर किया जा सकेगा. यहां पर ब्रेग्ज़िट भी एक अहम भूमिका निभा सकता है. क्योंकि ब्रिटेन के यूरोपीयसंघ से अलग होने से पाकिस्तान पर जो सबसे बुरा असर पड़ा है, वो ये है कि यूरोपीय संघ में उसके GSP+ दर्जे को बरक़रार रखने के हक़ में सबसे ज़्यादाशोर करने वाला देश ब्रिटेन मौजूद नहीं होगा.

निष्कर्ष

पाकिस्तान के मौजूदा सियासी संकट को लेकर EU की प्रतिक्रिया में कहा गया है कि, ‘पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने का तरीक़ा और आगे की राहकेवल पाकिस्तान के नागरिक ही आपस में तय कर सकते हैं.फिर भी पाकिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझीदार और निर्यात के केंद्र के तौर पर EU के लिए GSP+ के रूप में एक ऐसा हथियार हासिल हो सकता है, जिसका प्रयोग वो पाकिस्तान के समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करतेहुए व्यापार में असमानता का लाभ अपने हक़ में उठा सकता है. अफ़ग़ानिस्तान से अपनी सेना वापस बुलाने के बाद अमेरिका की नज़र में पाकिस्तान कीहैसियत बहुत कम हो गई है. ऐसे में जब पाकिस्तान अपने विदेशी संबंध में संतुलन बिठाने की कोशिश कर रहा है, तो पाकिस्तान पर उसका असर औरभी बढ़ सकता है.

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.