• Jan 21 2017

सशक्त बहुपक्षीय मंच खतरों का कम कर सकते हैं: कमांडर हार्वर्ड

अमेरिकी नौसेनिक कमांडर हार्वर्ड का मानना है कि नॉटो जैसे बहुपक्षीय मंच दुनिया भर में सुरक्षा को और बेहतर बना सकते हैं।

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Photolabs@ORF

अमेरिकी नौसेना में यूरोप और अफ्रीका के कमांडर मिशेल हॉवर्ड का कहना है कि तेजी से आपस में जुड़ते इस विश्व में विवादित स्थानों से उत्पन्न होने वाले खतरों को कम करने के लिए “सशक्त बहुपक्षीय मंचों” की आवश्यकता है।

उन्होंने नई दिल्ली में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन और विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित दूसरे रायसीना डॉयलाग के तीसरे दिन प्रमुख भाषण देते हुए कहा कि सामूहिक रक्षा के लिए नॉटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) बहुपक्षवाद के लिए मॉडल है।

अटलांटिक और प्रशांत में अमेरिका के व्यापार में आए बदलाव की ओर इशारा करते हुए एडमिरल हॉवर्ड ने कहा कि यह वैश्विक व्यापार के विािन्न आयामों को भी आकार दे रहा है।

एडमिरल हॉवर्ड ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ नॉटो का संबंध “यूरोप की सुरक्षा के केंद्र में है” और अफ्रीकी संघ के साथ संबंध “उम्मीदों से भरपूर और फलदायक” है। ये इस बात के उदाहरण हैं कि क्षेत्रीय मंच किस प्रकार उनकी अपनी सुरक्षा में सहयोग और वैश्विक सुरक्षा में योगदान देने के लिए भी उपयोगी मंच हैं।

एक सवाल का जवाब देते हुए एडमिरल हॉवर्ड ने कहा कि नॉटो और यूरोपीय संघ अपनी “गतिविधियों को साथ-साथ संचालित कर रहे हैं और साजो — सामान से जुड़ी सहायता को साझा कर रहे हैं।”

एडमिरल हॉवर्ड ने कहा कि आज विश्व के समक्ष मौजूद साइबर क्षेत्र की चुनौतियों और साइबर सुरक्षा के खतरों से निपटने के लिए “हमें प्रगतिशील होने की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि अब जबकि आपस में जुड़ना वैश्विक सुरक्षा में बदलाव ला रहा है, तो ऐसे में असहिष्णुता और धार्मिक उग्रवाद वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़े खतरे हैं। उन्होंने कहा, “नॉटो लोकतांत्रिक चरित्र की रक्षा करना और मुक्त समाजों को सहायता देना जारी रखेगा।”

एडमिरल हॉवर्ड ने कहा कि नॉटो अनेक देशों को सहयोगपूर्ण संवाद में शामिल करेगा और “यह सामूहिक रक्षा की उत्कृष्ट अवधारणा है।” उन्होंने कहा कि साझेदारियों के निर्माण से सामान्य परिस्थितियां तैयार होनी चाहिए।

65 देशों के 250 से ज्यादा प्रतिभागी इस तीन दिवसीय संवाद में भाग ले रहे हैं। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को किया था। इसके पहले संस्करण में 40 देशों के 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

ये लेखक के निजी विचार हैं।

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