• Apr 14 2017

यातायात प्रबंधन में मॉस्को का अनुभव

भारत जब स्मार्ट यातायात व्यवस्था वाले स्मार्ट शहर विकसित करने के लक्ष्य में जुटा हुआ है, दूसरे शहरों के इस संदर्भ में अनुभवों से अहम सीख मिल सकती है।

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दुनिया भर के प्रमुख शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या के साथ ही यातायात सेवाओं की मांग भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में एक तरफ कुशल यातायात प्रबंधन और दूसरी तरफ शहर की आबादी को अच्छी यातायात व्यवस्था उपलब्ध करवाने का फार्मूला कैसे हासिल किया जाए यह अब तक रहस्य बना हुआ है।

इन समस्याओं से निपटने के लिए, शहरों के नीति निर्माताओं, योजनाकारों और प्रबंधकों के सामने तीन महत्वपूर्ण काम हैं, जिन्हें उनको पूरा करना है। पहला है सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करना और बेहतर करना, दूसरा है सड़क परिवहन प्रबंधन को ज्यादा कारगर बनाना और तीसरा है मोटर गाड़ियों की संख्या को कम करना।

भारत में ही नहीं, दुनिया भर में उभरती इन समस्याओं से निपटने के लिए नए-नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। लेकिन सरकारों को शहरों में सड़क परिवहन प्रबंधन से निपटने में खासी दिक्कत आ रही है। ऐसे में इनसे निपटने के लिए प्रयासों को तेज करना होगा।

बीजिंग, लंदन, मॉस्को और शंघाई जैसे दूसरे वैश्विक शहरों और भारत के बीच व्यापक फर्क है। हालांकि इन सभी शहरों में सड़कों पर लगने वाले जाम की समस्या है, लेकिन इससे निपटने के तरीके सभी के अलग-अलग है।

मॉस्को की नगर सरकार ने इस लिहाज से एक नया प्रयास किया है जो सफल भी रहा है और जिसने स्थायी परिवहन विकास के क्षेत्र में एक पुरस्कार भी हासिल किया है। इसे दूसरे शहरों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसने एकीकृत यातायात प्रबंधन योजना बनाई है जिसे इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) नाम दिया गया है। इसने मॉस्को में ट्रैफिक जाम को दूर करने में काफी सफलता हासिल की है। 2012 में आईटीएस योजना को लागू करने के बाद, जाम को ले कर की जाने वाली रैंकिंग में मॉस्को की स्थिति काफी बेहतर हुई है। टॉम टॉम ट्रैफिक रेटिंग कंपनी ने 2014 में जहां इसे दुनिया के 390 शहरों में सबसे ज्यादा जाम वाला शहर घोषित किया था, अब यह 13वें स्थान पर है। इसी तरह लोमोनोसोव मॉस्को स्टेट विश्वविद्यालय के अध्ययन के मुताबिक सड़क सुरक्षा के आंकड़ों में मॉस्को विश्व के सबसे ऊपर के दस शहरों में शामिल है।

इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम यातायात की निगरानी और प्रबंधन के साथ ही ट्रैफिक की स्थिति के बारे में पूर्वानुमान करने और यातायात के वास्तविक प्रवाह के मुताबिक सड़कों का संतुलन कायम करने में मदद करता है। इस व्यवस्था में शहर में विभिन्न इलाकों में 2048 सीसीटीवी और 1402 स्टिल कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे मॉस्को यातायात प्रबंधन केंद्र के केंद्रीय नियंत्रण और निगरानी कक्ष से जुड़े हैं, जहां बड़े डिजिटल इंफोर्मेशन स्क्रीन पर सड़कों की स्थिति और ठीक उसी समय के ट्रैफिक के चित्र और सूचना मिलती रहती है। इस तरह से यातायात की रीयल-टाइम सूचना हासिल करना बहुत उपयोगी होता है।

नियंत्रण कक्ष में ड्यूटी पर मौजूद संचालकों की ओर से वाहन चालकों और शहर की प्रबंधन एजेंसियों को उद्घोषणा और अन्य साधनों के जरिए हर 1-2 मिनट की स्थिति के आधार पर सूचना उपलब्ध करवाई जाती है। मॉस्को 24 टीवी चैनल, शहर की सड़कों पर लगाए गए 157 इंफोर्मेशन स्क्रीन, वेबसाइट और रेडियो के जरिए यह बताया जाता है कि किसी खास जगह से दूसरी जगह तक पहुंचने में उस वक्त कितना समय लगेगा। इसी तरह सबसे बुरे जाम वाली जगह, गाड़ियों के बीच सड़क खराब हो जाने, एक्सीडेंट और उल्लंघन आदि के बारे में लगातार सूचना दी जाती है।

1698 चौराहों पर 2,313 ऐसे एडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं, जो यहां लगाए गए डिटेक्टरों के आधार पर काम करते हैं। दूसरे चौराहों और तिराहों पर लगभग 40,000 अन्य ट्रैफिक सिग्नल काम कर रहे हैं। इससे यातायात के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलती है। इसी तरह, ट्रैफिक लाइट के खराब हो जाने की स्थिति में एजेंसी को इसे ठीक करने में औसतन डेढ़ घंटे का समय लगता है।

मोटरवाहन चालकों को ट्रामवे के इस्तेमाल से और फुटपाथ पर गाड़ी खड़ी करने से रोकने के लिए नॉ स्टॉप का नियम लागू कर दिया गया है। कुछ सड़कों को वन-वे कर दिया गया है ताकि गाड़ियां आसानी से आगे बढ़ सकें और पार्किंग के लिए भी अतिरिक्त जगह मिल सके।

पार्किंग संबंधी नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। पहले खाली सड़कों पर 2.9 मीटर तक लंबवत पार्किंग की इजाजत थी। नियमों के मुताबिक रोड पर खाली जगह कम से कम 5.9 मीटर होनी चाहिए। अब वाहनों को सड़क के समानांतर पार्क करना होता है जिससे सड़क पर खाली जगह 6 मीटर तक हो गई है। सड़क के फुटपाथ भी पैदल चलने वालों के लिए उपलब्ध हैं।

पार्किंग स्थलों को कंप्यूटर से जोड़ दिया गया है, ताकि उनका बेहतर उपयोग हो सके। भुगतान के लिए लोगों के पास पार्किंग मीटर या मोबाइल एप्लीकेशन का विकल्प है।

मैजिस्टल नाम से एक नया सड़क लोक परिवहन नेटवर्क विकसित किया गया है जो आसानी से बिना रुकावट के यातायात को मुमकिन बनाता है। बड़ी संख्या में बस, ट्रॉली और ट्राम की व्यवस्था की गई है ताकि लोगों को इसके लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े। सवारियों के बीच सबसे लोकप्रिय जगहों पर इनकी ज्यादा से ज्यादा उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। 17 सीधे रैडियल रूट के माध्यम से सिटी सेंटर को बाहरी इलाकों से जोड़ दिया गया है साथ ही इन्हें आपस में भी जोड़ा गया है। यह ट्रांजिस सिस्टम कार से 20–30 % ज्यादा तेज है और लगभग 15 लाख लोग अब इस तेज और आरामदेह सफर का रोजाना उपयोग कर रहे हैं।

मॉस्को में यातायात प्रबंधन में लाए गए सुधार के साथ निम्न बदलाव दिखाई दिए हैं:

  • यातायात संबंधी समस्याओं को ले कर 26% ज्यादा लोग मॉस्को यातायात सेवा केंद्र से संपर्क कर रहे हैं।
  • पिछले पांच साल में औसत यातायात स्पीड 12% बढ़ गई है और मॉस्को रिंग रोड पर ड्राइविंग की रफ्तार 5% बढ़ गई है।
  • 2016 के छह महीनों (जनवरी से जून) के बीच ही तय सीमा से ज्यादा रफ्तार से वाहन चलाने के मामलों में 15% कमी आई है।
  • सड़कों पर समानांतर पार्किंग व्यवस्था की वजह से वाहनों के आने-जाने के लिए ज्यादा जगह मिल रही है। पार्किंग संबंधी नियमों के उल्लंघन में जून 2016 में 27% की कमी आई।
  • फुटपाथ पर खड़ी होने वाली गाड़ियों की समस्या दूर कर इसे पैदल चलने वालों के लिए उपलब्ध करवाया जा सका है।
  • पार्किंग के लिए जगह ढूंढ़ने के समय में 65% की कमी आई है, जिसकी वजह से सड़क पर जाम भी कम हुआ है।
  • 2015 और 2016 के बीच सड़क हादसों, चोटों और मौतों में कमी आई है।

ऐसे में जब भारत स्मार्ट यातायात सुविधा वाले स्मार्ट शहर तैयार करने की कोशिश में जुटा है, इस लिहाज से पहले से जिन उपायों को प्रभावी पाया गया है, उनसे सबक लिया जा सकता है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में ऊपर बताए गए उपायों में से कुछ को अपनाना उपयोगी साबित हो सकता है।

मॉस्को की परिवहन प्रबंधन सूचना के बारे में दी गई सूचना लेखक के मॉस्को ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर के दौरे पर आधारित है।

ये लेखक के निजी विचार हैं।

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