• Apr 11 2017

भारत की असीम पर्यटन क्षमता से लाभ उठाएं

घरेलू पर्यटन खास मायने रखता है और वर्ष 2016 के दौरान इसमें 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी,2017-18 में यह दर 25 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

Agra, Taj Mahal, Tourism

प्रतिष्ठित (आइकॉनिक) ताजमहल

स्रोत: विकीपीडिया

लोगों, खासकर पर्यटकों को होटल की वैकल्पिक सुविधा मुहैया कराने के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम है एयरबीएनबी। इस प्रसिद्ध स्टार्टअप के सीईओ ब्रायन चेस्की का हाल ही में भारत आगमन हुआ था। इस दौरान उन्होंने बड़े जोश के साथ अपने दिल की यह बात कही कि भारत के पर्यटन उद्योग में उनकी कंपनी के लिए अपार संभावनाएं हैं। एयरबीएनबी को दुनिया के उच्च मूल्यवान स्टार्टअप्‍स में शुमार किया जाता है, जिसकी कुल कीमत या हैसियत 31 अरब डॉलर होने का अनुमान लगाया गया है। यही नहीं, एयरबीएनबी को वैश्विक पर्यटन उद्योग के एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है। फिर भी, भारत असीम गुंजाइश के बावजूद वैश्विक पर्यटकों के महज 1 प्रतिशत और वैश्विक विदेशी व्यय के केवल 2 प्रतिशत को ही आकर्षित कर पाता है।

पर्यटन, जो भारत के सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, भारत के युवाओं को व्‍यापक रोजगार अवसर उपलब्‍ध कराने की क्षमता रखता है। दरअसल, देश के युवाओं को पर्यटन से जुड़ी अनगिनत गतिविधियों में रोजगार सुलभ कराया जा सकता है। पर्यटन उद्योग को अपनी कई जरूरतों की पूर्ति के लिए विनिर्माण (मैन्‍युफैक्‍चरिंग) उद्योगों एवं कृषि क्षेत्र से संपर्क साधना पड़ता है। जहां एक ओर स्‍मारिका, हस्तशिल्प और यादगार चीजों की मांग पूरी करने में विनिर्माण उद्योग सहायक साबित हो सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर कृषि क्षेत्र पर्यटकों के लिए खाद्य उत्पादों की आपूर्ति करता है। पर्यटन ने भारत में 40 मिलियन नौकरियां सृजित कीं और वर्ष 2015 में जीडीपी में 7.2 प्रतिशत का योगदान दिया। भविष्य में इसका योगदान 7 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने की आशा है। पर्यटन ने 124.8 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा का भी सृजन किया। हाल ही में मोदी सरकार द्वारा वीजा व्यवस्था में कुछ बदलाव किए जाने के परिणामस्‍वरूप भारत में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिला है। इसी तरह यात्रा से संबंधित ई-पोर्टल्स की संख्या में भी वृद्धि हुई है जो पर्यटन को बढ़ावा देने में काफी मददगार साबित हो रही हैं। वर्ष 2016 में भारत से और भारत में अंतर्राष्ट्रीय हवाई यातायात में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2015 के दौरान भारत में 8.07 मिलियन पर्यटकों का आगमन हुआ।

आगमन पर वीजा और ई-वीजा, जो अब लगभग 150 देशों को कवर करते हैं, से व्यवसाय संबंधी यात्राओं में काफी सहूलियत हुई है। फिर भी, पर्यटकों के आगमन के मामले में थाईलैंड जैसे छोटे देशों से बराबरी करने के लिए हमें अब भी लंबा सफर तय करना बाकी है। इस मामले में दुनिया के बड़े पर्यटन स्थलों जैसे कि अमेरिका (77.7 मिलियन), फ्रांस (84.5 मिलियन), स्पेन (68.2 मिलियन), इटली (50.7 मिलियन) और चीन (56.9 मिलियन) से बराबरी करने की कल्‍पना तो हम कभी कर भी नहीं सकते। पर्यटकों के आगमन के मामले में थाईलैंड के आसपास कहीं भी भारत के पहुंचने के मार्ग में अनगिनत बाधाएं हैं। वर्ष 2015 के दौरान थाईलैंड में कुल मिलाकर 29.8 मिलियन पर्यटक आए थे। फिर भी आज भारत आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी खतरों के कारण कुछ पसंदीदा पर्यटन स्थलों जैसे कि तुर्की, सीरिया, मिस्र एवं म्यांमार में उत्‍पन्‍न गंभीर समस्‍याओं से लाभ उठा सकता है।

बड़ी संख्‍या में पर्यटकों को आकर्षित करने के मार्ग में सबसे पहली समस्या पर्याप्त बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की कमी है। वैसे तो ज्‍यादातर पर्यटक सबसे पहले बड़े शहर ही पहुंचते हैं, लेकिन इसके साथ ही वे आसपास के इला‍कों की भी यात्रा करना चाहते हैं। हालांकि, उनके द्वारा चयनित किए जाने वाले गंतव्‍यों या पर्यटन स्थलों पर पहुंचने के लिए अच्छी कनेक्टिंग सड़कों, उड़ानों और सुरक्षित एवं विश्वसनीय रेलवे परिवहन जैसी आवश्यक बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का सख्‍त अभाव है। छोटे हवाई अड्डों को अभी उन्नत किया जाना बाकी है। इसी तरह अधिक सुरक्षा जांच सुविधाओं के जरिए बड़े हवाई अड्डों को भीड़-भाड़ से मुक्‍त करना भी अभी बाकी है।

पर्यटकों की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्‍त संख्‍या में उचित किराये पर होटल के कमरे न मिलना भी एक अन्य गंभीर समस्या है। मांग स्पष्ट तौर पर आपूर्ति से कहीं अधिक है और निजी क्षेत्र ने बड़ी संख्‍या में किफायती अतिथि गृहों एवं बिस्तरों और ब्रेकफास्‍ट होटलों के रूप में कई विकल्प उपलब्‍ध कराए हैं। गोवा जैसे पर्यटक स्थल अनगिनत विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हाल ही में गोवा के एक समुद्र तट (बीच) पर एक आयरिश-ब्रिटिश महिला की हत्या के मामले का बहुत बुरा असर पड़ा है। यही नहीं, हाल ही में द गार्जियन (यूके) ने गोवा में पर्यटकों की सुरक्षा के बारे में अत्‍यंत नुकसानदेह आंकड़ों का हवाला देते हुए गोवा में हुई इस हत्या पर एक लेख छापा है। इस लेख के अनुसार, पिछले 12 वर्षों के दौरान गोवा के चार स्थानीय जिलों में रहस्यमय परिस्थितियों में 245 पर्यटकों की मौत हुई है। महिलाओं के लिहाज से भारत के एक असुरक्षित देश होने की धारणा को निराधार साबित करने के लिए महिला पर्यटकों को सुरक्षा की गारंटी देना निश्चित तौर पर खास मायने रखता है। विदेशी महिला पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ और दुष्‍कर्म वास्तव में एक बड़ा कलंक है जिससे छुटकारा पाने के लिए भारत को कड़ी मेहनत करनी होगी।

भारत की केवल ऐतिहासिक धरोहरों और स्मारकों को ही प्रदर्शित करने संबंधी पुराने जमाने की अवधारणा बदल रही है क्‍योंकि दुनिया भर के लोग अब ईको टूरिज्‍म में अधिक दिलचस्‍पी दिखाने लगे हैं, जिसके तहत वे स्थानीय वनस्पतियों और जीवों का अवलोकन करना चाहते हैं। पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना एक आकर्षक सुझाव है। इस क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा सदाबहार (मैंग्रोव) वन और मनमोहक वनस्पतियां एवं जीव हैं और इसके साथ ही यहां रॉयल बंगाल टाइगर भी है। हालांकि, ईको टूरिज्‍म को ध्‍यान में रखते हुए इस क्षेत्र में आगमन के लिए आम पर्यटकों के बजाय केवल विशिष्‍ट या पैसे वाले पर्यटकों को ही आकर्षित करना चाहिए, ताकि इस क्षेत्र को और ज्‍यादा पारिस्थितिकीय क्षति से बचाया जा सके।

आम जन वाला पर्यटन (मास टूरिज्‍म) हिमालय क्षेत्र के कई निर्जन इलाकों के लिए भी उपयुक्‍त नहीं है क्योंकि दूरदराज के इन स्थानों में पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ों में कचरे का अंबार नजर आता है जिस वजह से हिमालय पहाड़ अपनी नैसर्गिक सुंदरता खोते जा रहे हैं। वहीं, प्लास्टिक की थैलियां मनमोहक जल धाराओं को अवरुद्ध कर देती हैं। इसी तरह शिमला जैसे कई पर्यटन स्थलों के रास्ते में यहां-वहां गंदगी के ढेर पाए जाते हैं।

चिकित्सा पर्यटन एक नया और आकर्षक क्षेत्र है। पड़ोसी देशों, विशेषकर बांग्लादेश और अफगानिस्तान से बड़ी संख्‍या में लोग अपनी बीमारी के इलाज के लिए भारत आने लगे हैं। ऐसे में इस बात को भलीभांति ध्‍यान में रखा जाना चाहिए कि निजी अस्पतालों में कदाचार का कोई भी मामला घटित नहीं हो और इसके साथ ही भारतीय स्वास्थ्य सेवा आगे भी सस्ती एवं विश्वसनीय बनी रहे।

सांस्कृतिक पर्यटन को भी अहम माना जाता है क्योंकि बहुत से लोग गांवों में जाकर वहां की जिंदगी से रू-ब-रू होना चाहते हैं। हालांकि, इसके बावजूद हमारे गांवों के द्वार पर्यटन के लिहाज से अब भी खुले नहीं हैं। गांवों में रहने वाले लोगों को अपने घरों में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि पर्यटक उनके यहां ठहर सकें और इसके साथ ही वे स्थानीय ग्रामीण संस्कृति, त्योहारों एवं शिल्पकारिता को गहराई से जान सकें। भारत में धार्मिक पर्यटन भी लोकप्रिय है,जिसकी बदौलत घरेलू पर्यटन यातायात तेजी से बढ़ रहा है।

जहां एक ओर केंद्र सरकार विदेश में अपने विभिन्न अभियानों (अतुल्य भारत 2.0) के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने में अत्‍यंत सक्रिय रही है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के पर्यटन विभाग भी अपने-अपने पसंदीदा पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ हवाई यात्रा को बढ़ावा देते रहे हैं। उत्तर प्रदेश, जो पर्यटकों का एक पसंदीदा स्थल है, में जल्द ही तीन नए हवाई अड्डे होंगे।

वास्तव में, घरेलू पर्यटन खास मायने रखता है और वर्ष 2016 के दौरान इसमें 23 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। वर्ष 2017-18 में शायद यह 25 प्रतिशत की खासी बढ़ोतरी हासिल करने में कामयाब रहेगा। लगभग 10 करोड़ लोगों ने घरेलू हवाई यात्रा का लुत्‍फ उठाया जिनमें से कई तो पर्यटक ही थे। यह तो पहले से ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हवाई यात्रा बाजार है। घरेलू पर्यटन से विदेशी पर्यटन का भी मार्ग प्रशस्त होता है क्योंकि पर्यटक न केवल आवास की वैकल्पिक सुविधाएं देने वाली कंपनियों जैसे कि एयरबीएनबी की तलाश में जुट जाते हैं, बल्कि उनकी ओर से अच्‍छी मांग को देखते हुए बढि़या रेस्तरां और भोजनालयों, गाइड की मदद से किए जाने वाले भ्रमण, यादगार वस्तुएं बेचने वाली दुकानों और परिवहन के कुशल साधनों का विकास भी तेजी से होने लगता है। चूंकि मध्यम और उच्च आय वाले तबकों में युवा लोगों की तादाद काफी तेजी से बढ़ी है, इसलिए भविष्य में घरेलू पर्यटन में वृद्धि होना तय है। इसी तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए एयरबीएनबी के सीईओ का यह स्‍पष्‍ट मानना है कि अगले 10 वर्षों में भारत की भी गिनती दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में होने लगेगी।


लेखक के बारे में

जयश्री सेनगुप्ता ORF में एक सीनियर फेलो हैं। उनके विशिष्‍ट कार्य भारतीय अर्थव्यवस्था एवं विकास, सार्क, ब्रिक्स, आसियान एवं यूरोपीय संघ जैसे समूहों से संबंधित क्षेत्रीय सहयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा व बेरोजगारी और महिलाओं एवं विकास जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर भी केंद्रित हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातक की डिग्री पाने और फि‍र अर्थशास्त्र में एमए करने के बाद उन्‍होंने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में अध्ययन किया जहां से उन्‍होंने अर्थशास्त्र में एमएससी और एमफिल डिग्रियां हासिल कीं। उन्‍होंने लंदन स्थित नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल रिसर्च में काम किया। वह मिरांडा हाउस और इंद्रप्रस्थ कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में वर्ष 1970 से लेकर वर्ष 1977 तक एक व्याख्याता थीं। वह वर्ष 1981 से लेकर वर्ष 1985 तक नई दिल्‍ली स्थित अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के लिए भारतीय परिषद (आईसीआरआईईआर) में कार्यक्रम समन्वयक थीं। उन्‍होंने एनसीएईआर (नई दिल्ली) और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनपावर रिसर्च में भी काम किया है। वह वर्ष 1985 से लेकर वर्ष 1990 तक विश्व बैंक (वाशिंगटन, डी.सी.) के लिए और वर्ष 1991 में ओईसीडी (पेरिस) में एक सलाहकार थीं। )

ये लेखक के निजी विचार हैं।

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