• Jan 23 2017

अफगानिस्तान पर ट्रंप से नई अमेरिकी नीति की दरकार: पूर्व अफगान राष्ट्रपति

'टेरर इंक: कॉम्बैटिंग स्टेट एंड नॉन स्टेट एक्टर्स' विषय पर परिचर्चा में हिस्सा लेते हुए श्री सालेह ने कहा, "यथास्थिति (नीति) ठीक नहीं है" और ट्रंप प्रशासन को पाकिस्तान को दी जा रही सैनिक सहायता का आकलन करते हुए अफगान नीति की कड़ी समीक्षा करनी चाहिए।

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Photolabs@ORF

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई का सुझाव है कि नए अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी टीम को अफगानिस्तान पर अमेरिकी नीति की समीक्षा कर पिछले 15 साल में की गई गलतियां ठीक करनी चाहिएं।

श्री करजई ने कहा: “स्वाभाविक है कि इस दौरान कुछ गलतियां हुई हैं। इसीलिए हम तमाम कोशिशों के बावजूद तालिबान और अतिवादी ताकतों को अभी तक नहीं हरा पाए हालांकि शुरूआती परिणाम अच्छे थे।”

श्री करजई ने ये विचार विदेश राज्य मंत्री श्री एम.जे. अकबर के साथ रायसीना डॉयलॉग के दूसरे संस्करण में दिए। इसका आयोजन आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया था। श्री करजई ने चर्चा के दौरान सुझाव दिया कि अमेरिका,रूस,चीन और भारत को एक साथ बैठक इस मसले पर एक नई प्रभावी नीति बनानी चाहिए। श्री करजई ने कहा कि उनका मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा आतंकवाद से निपटने के लिए रूस के साथ सहयोग को राजी होना इस क्षेत्र में आतंकवाद का और और प्रभावी मुकाबला करने में मददगार साबित होगा।

उन्होंने कहा कि अफगान नीति के विफल होने का जिम्मेदार अमेरिकी का सहयोगी पाकिस्तान है। पाकिस्तान ने आईएसआई के माध्यम से उन तालिबान लड़ाकों को दोबारा संगठित किया जो सत्ता खोने के बाद अपने गांवों को लौट गए थे। करजई के अनुसार तालिबान के सदस्यों और समर्थकों को प्रेरित करने के लिए धर्म का इस्तेमाल किया गया , ठीक वैसे ही जैसे कि भारत सहित अन्य पड़ोसी देशों में भी आईएआई ने धर्म का दुरूपयोग करता रहा है।

श्री करजई ने कहा दुख की बात है कि अमेरिका को इस बारे में सारी जानकारी दे दी गई थी लेकिन उसने पाकिस्तान को अपनी हरकतों से रोका नहीं बल्कि उसे सभी प्रकार की सहायता देना भी जारी रखा। अगर सहायता के लिए अमेरिका ने कड़ी शर्तें रखी होतीं तो इससे पाकिस्तान में नेतृत्व और सेना द्वारा तालिबान को समर्थन देने से पहले सोचना पड़ता।

जब श्री अकबर ने पूछा कि क्या वह मानते हैं कि ट्रंप का रूख बुश व ओबामा प्रशासन से लअग होगा, तो इसके जवाब में श्री करजई ने कहा, “अमेरिकी नीति में बदलाव की जरूरत है। अगर उसे सफल होना है तो अमेरिका को बदलना होगा।”

श्री करजई ने कहा, “अमेरिका में मूलभूत बदलाव की जरूरत है।उन्होंने कहा कि वह अमेरिका के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के विरोध में नहीं हैं, पर उनकी यही मांग थी कि इसमें कुछ और शर्तों को जोड़ने की जरूरत है।”

श्री करजई ने जोर देते हुए कहा कि अमेरिका की अफगान नीति कभी सफल नहीं होगी अगर उसने पुरानी पाकिस्तान नीति जारी रखी। अफगान नीति की सफलता के लिए अमेरिका को पाकिस्तान नीति बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि ट्रंप के रूसी राष्ट्रपति से संभावित बेहतर संबंध इस क्षेत्र के लिए अच्छी खबर साबित होंगे। उन्हें कोई शक नहीं है कि इस क्षेत्र में और खासकर अफगानिस्तान में आतंकवाद से लड़ने के लिए रूस को साथे लेना होगा क्योंकि वह तकरश में जबरदस्त तीर है और ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ निभा सकता है।

श्री करजई ने कुछ देशों द्वारा आतंकवादियों के खिलाक आतंकवादियों के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा कि यह हताशा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह अलग अलग फार्मा कंपनियों से मिलने वाली कैंसर की दवा की तरहं है।

श्री अकबर ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान इस मामले में समान सोच रखते हैं कि दोनों ही आतंकवािदयों को ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ की श्रेणी में बांटने के पक्षधर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस मामले में स्पष्ट है कि आतंकवादी बस आतंकवादी होते हैं और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने की जरूरत है।

इससे पूर्व अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालयके पूर्व अध्यक्ष अमरूल्लाह सालेह ने कहा,वही सांप (आतंकवादी) सबको — अफगानिस्तान, भारत व अन्य देशों — डस रहे हैं।

‘टेरर इंक: कॉम्बैटिंग स्टेट एंड नॉन स्टेट एक्टर्स’ विषय पर परिचर्चा में हिस्सा लेते हुए श्री सालेह ने कहा, “यथास्थिति (नीति) ठीक नहीं है” और ट्रंप प्रशासन को पाकिस्तान को दी जा रही सैनिक सहायता का आकलन करते हुए अफगान नीति की कड़ी समीक्षा करनी चाहिए।

ये लेखक के निजी विचार हैं।

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